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तैयारी पूरी:1 माह में बच्चों में वायरल फीवर के 21 मामले पर जिले में एक भी चाइल्ड स्पेशलिस्ट नहीं

किशनगंज9 दिन पहले
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सदर अस्पताल में बना पीडियाट्रिक वार्ड। - Dainik Bhaskar
सदर अस्पताल में बना पीडियाट्रिक वार्ड।
  • कोरोना के संभावित तीसरी लहर के पूर्व वायरल फीवर ने दी दस्तक, तैयारी में जुटा विभाग
  • प्रतिदिन सरकार को भेजी जाएगी रिपोर्ट, विशेषज्ञ चिकित्सकों की है कमी
  • निजी क्लीनिक को भी वायरल फीवर से पीड़ित बच्चे की सूचना सदर अस्पताल को देने का निर्देश

कोरोना के संभावित तीसरी लहर के पूर्व जिले में वायरल फीवर ने दस्तक दे दी है। सदर अस्पताल में पिछले एक महीने में इससे ग्रसित 21 बच्चे अब तक इलाज के लिए आए। हालांकि इनमें से किसी को भी भर्ती कराने की जरुरत नहीं पड़ी। सलाह के साथ बच्चों को दवाइयां दी गई। आश्चर्यजनक बात यह है कि जिले में एक भी बच्चे का स्पेशलिस्ट डॉक्टर नहीं है। गौरतलब है कि जिले में डॉक्टरों के 126 स्वीकृत पद हैं। पूर्व से यहां 30 चिकित्सक तैनात थे, जबकि 25 चिकित्सक अभी संविदा पर बहाल किए गए हैं। इसके बावजूद चिकित्सकों की घोर कमी है। हर साल बरसात के बाद वायरल फीवर के मामले सामने आते हैं। सिविल सर्जन डॉ. श्रीनंदन के अनुसार अब प्रत्येक दिन वायरल फीवर का आंकड़ा मुख्यालय को भेजा जाना है। कोविड के थर्ड वेब सहित वायरल फीवर से निपटने के लिए विभाग ने कई तैयारियां की है। निजी क्लीनिक को भी वायरल फीवर से पीड़ित बच्चे की सूचना सदर अस्पताल को देने का निर्देश दिया गया है। साथ ही पीड़ित बच्चों को सर्विलांस पर रखने का निर्देश दिया गया है। सदर अस्पताल सहित सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित किया गया है। बेड के साथ दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की गयी है।

ये हैं वायरल फीवर के लक्षण
सिविल सर्जन ने बताया कि बच्चों को तेज बुखार, बदन में सुस्ती का अनुभव, सांस लेने में परेशानी अथवा सांस बहुत तेज चलना, लगातार सर्दी का बना रहना और सांस लेने में आवाज सुनाई दे तो ये वायरल बुखार के लक्षण हो सकते हैं। बुखार से ग्रसित होने पर गले में दर्द रहना और मुंह में छालों की भी समस्या देखी जा रही है। इन लक्षणों के नजर आते ही बच्चे को तुरंत नजदीक के अस्पताल ले जाने की जरूरत है। इसके अलावा इस मौसम में बच्चे को तेज धूप, बारिश से बचाएं। पानी उबालकर पीना आवश्यक है।

पीएचसी में भी 10 -10 बेड वाला वार्ड तैयार रखने का निर्देश
जिले में स्पेशलिस्ट के तौर पर एक सर्जन, एक महिला रोग विशेषज्ञ ही हैं। सिविल सर्जन डॉक्टर श्री नंदन ने बताया कि चाइल्ड स्पेशलिस्ट सहित कई असाध्य रोगों के विशेषज्ञ की कमी है। उपलब्ध चिकित्सकों की सेवा लेकर ही हम किसी भी चुनौती से निपटने की तैयारी में हैं। सदर अस्पताल में वायरल बुखार से ग्रसित बच्चों के लिए स्पेशल वार्ड बनाया गया है। इसमें 40 बेड पूरी तरह से वातानुकूलित एवं पाइपलाइन ऑक्सीजन युक्त है। इसके अलावा सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भी तत्काल उपचार की व्यवस्था की गयी है। सातों प्रखंडों के सभी स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सा पदाधिकारी को आवश्यक दिशा निर्देश दिया गया है। चाइल्ड फ्रेंडली डेडिकेटेड पेडिएट्रिक वार्ड में इंटेंसिव केयर यूनिट की भी व्यवस्था की गई है। जहां पांच वर्ष तक के बच्चों का उपचार किया जाएगा। इसके अलावा सदर अस्पताल में एसएनसीयू भी कार्यरत है। जहां शून्य से दो माह के नवजात शिशु का इलाज किया जाता है। सदर अस्पताल में डेडिकेटेड पीडियाट्रिक वार्ड बनाए गए हैं। वार्ड में चाइल्ड फ्रेंडली वातावरण बनाए रखने के लिए सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। 40 बेड वाले इस वार्ड में सभी बेड ऑक्सीजन पाइप लाइन से जुड़े हुए हैं। इसके अलावे सभी पीएचसी में भी 10 -10 बेड वाला वार्ड तैयार रखने का निर्देश प्रभारियों को दिया गया है।

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