आस्था:कलश स्थापना के साथ शारदीय नवरात्र शुरू, आस्था में डूबे श्रद्धालु

मनीष कुमार | किशनगंज9 दिन पहले
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शहर के बड़ी कोठी में स्थापित मां की प्रतिमा व कलश। - Dainik Bhaskar
शहर के बड़ी कोठी में स्थापित मां की प्रतिमा व कलश।
  • शुभ मुहूर्त में श्रद्धालुओं के घरों और मंदिरों में पंडितों ने कराई कलश की स्थापना, पहली पूजा को लेकर सुबह से ही बाजारों में उमड़ी लोगों की भीड़
  • पूजन सामग्रियों सहित फूल-फल की दुकानों में लगी रही भीड़

कलश स्थापना के साथ ही गुरुवार को शारदीय नवरात्र शुरू हो गया। शुभ मुहूर्त में घरों और मंदिरों में पुरोहितों ने कलश की स्थापना की। इस दौरान मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी रही। कई मंदिरों और पूजा पंडालों में कलश स्थापना के साथ ही मां की प्रतिमा स्थापित हो गई है जबकि कई ऐसे मंदिर हैं जहां स्थायी प्रतिमा है। शेष जगहों पर षष्ठी को प्रतिमा की स्थापना की जाएगी। वहीं पूजा को लेकर सुबह से ही बाजारों में खरीदारों की भारी भीड़ उमड़ी। पूजन सामग्रियों सहित फूल-फल की दुकानों में भीड़ देखी गई। सुबह नौ बजे ही डे-मार्केट में बाजार से फूल गायब हो गए। जो थोड़े बहुत बचे भी उसकी कीमत अन्य दिनों की तुलना में बेहद अधिक रही। पूजन सामग्रियों में दो से लेकर पांच रुपए तक की वृद्धि रही जबकि तेल और घी में 15-20 रुपए तक की तेजी रही। शहर की सबसे पुरानी दुर्गा मंदिर बड़ी कोठी में भक्तों की भीड़ दिन भर रही। यह मंदिर शहर की सबसे प्राचीन दुर्गा मंदिर है। जानकारी के अनुसार थिरानी परिवार द्वारा वर्ष 1903 में यहां मां दुर्गा की पूजा अर्चना शुरू करायी गई थी। तब से अब तक लगातार यहां पूजा होती आ रही है। मंदिर के व्यवस्थापक गोपाल सोमानी के अनुसार पहले मंदिर का आकर छोटा था बाद में मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया। यहां शारदीय नवरात्र के अलावे चैत्र नवरात्र में भी पूरे विधि विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मां दुर्गा की पूजा आराधना की जाती है।

हर वर्ष प्रतिमा का रूप एक जैसा
पश्चिम बंगाल के मूर्तिकार जयपाल पिछले कई वर्षों से मूर्ति बनाते आ रहे हैं। बड़ी कोठी दुर्गा मंदिर में पुराने परम्परा एवं एक ही शैली से पूजा होती है और यहां मां की प्रतिमा क़ो वर्षों से एक ही रूप दिया जाता है। आज भी इनके द्वारा ही मूर्ति बनाया जाता है। एक माह पूर्व से ही दुर्गा मंदिर परिसर में मूर्तिकार प्रतिमा बनाने में जुट जाते हैं। एक ही पुरोहित के वंशज पूजा कराते आ रहे हैं। मंदिर के सबसे पहले पुरोहित प्रगास पाण्डेय थे। इसके बाद दूधनाथ पाण्डेय, गया प्रसाद पाण्डेय और अब इनके वंशज धंतोष पाण्डेय एवं मंतोष पाण्डेय पूजा कराते हैं। इन पुरोहितों द्वारा 9 दिनों तक पूरे विधि विधान के साथ मा दुर्गा की पूजा-अर्चना की जाती है। आरती में शामिल होने के लिए भक्तों में होड़ लगी रहती है। हर वर्ष शारदीय नवरात्र में होने वाले खर्च का वहन थिरानी परिवार के लोग करते हैं। यहां पूजा के लिए चंदा नहीं ली जाती है।

पूजन सामग्री के मूल्य-रुपए में
कलश- 1 बड़ा- ‌~25 , छिपा- 1-‌~10
दीपक बड़ा- 1- ‌~10 , दीपक छोटा-11 पीस- ‌~22
पान-11-‌~22
सुपाड़ी- ‌200 ग्राम- ‌~50 , तिल, जौ, रोड़ी, सोली -51
जनेऊ- 10 रुपए जोड़ा
कपूर, अबीर, हल्दी पाउडर, रुईबनी, मलाई, अगरबत्ती- 111 रुपए
अरवा चावल-एक केजी-‌~55
नारियल- ‌~30
गिरिगोला- ‌~30

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