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वेबिनार आयोजित:जिले का अतीत गौरवशाली, कृषि आधारित उद्योग लगाकर होगा आर्थिक विकास

किशनगंज12 दिन पहले
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  • बिहार स्वाभिमान आंदोलन की ओर से आयोजित वेबिनार में किशनगंज कल, आज और कल’ विषय पर बोले वक्ता

बिहार स्वाभिमान आंदोलन के द्वारा आयोजित वेबिनार कार्यक्रम में ‘किशनगंज कल, आज और कल’ शीर्षक पर परिचर्चा हुई। इसमें शरीक हुए बुद्धिजीवी, पत्रकार एवं प्रोफेसर। परिचर्चा व संवाद कार्यक्रम में किशनगंज के गौरवशाली अतीत और उसके विश्व पटल पर प्रतिष्ठा की चर्चा की गई। कार्यक्रम का समायोजन अमित कुमार ने किया और कार्यक्रम का सफल संचालन युवा कवि साहित्यकार प्रवीण कुमार ने किया। किशनगंज के एसोसिएट प्रोफेसर, कवि, व्यंग्यकार, लेखक डॉ. सजल प्रसाद ने कहा कि केवल बिहार ही नहीं, अपितु देश और दुनिया में किशनगंज की प्रतिष्ठा काफी रही है। संस्कृति, भौगोलिक सीमाएं, सामरिक महत्व, राजनीति, कूटनीति, धार्मिक व आध्यात्मिक महत्व के पर्यटन स्थल, कृषि के लिए भी किशनगंज को जाना जाता रहा है। उन्होंने किशनगंज से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें बताई और किशनगंज के शैक्षणिक व सांस्कृतिक वैभव का उल्लेख करते हुए कहा कि बिहार को शिक्षित बनाने तथा चहुंओर ज्ञान की ज्योति फैलाने में भी किशनगंज का श्रेष्ठतम योगदान हो सकता है, जिसके लिए थोड़ा ध्यान देने के साथ सामूहिक सहभागिता और सरकारी सहायता आवश्यक है।

बांस आधारित उद्योग की स्थापना हो
शिक्षाविद शिफा सैयद हफीज ने कहा कि किशनगंज की सांस्कृतिक धरोहर यहां की मिली जुली गंगा-जमुनी तहजीब, आपसी प्रेम और सद्भाव है। शिक्षा के क्षेत्र में यहां बहुत से काम किए गए हैं, लेकिन अभी बहुत से काम किए जाना बाकी है। विशेषकर महिला शिक्षा के क्षेत्र में। रमजान नदी के सौंदर्यीकरण व ऐतिहासिक खगड़ा मेला को और अच्छा किया जा सकता है। नदियों में छोटे-छोटे हाइड्रो प्रोजेक्ट लगाकर बिजली उत्पन्न की जा सकती है और बांस पर आधारित उद्योग स्थापित किए जा सकते हैं।

जिले में कृषि आधारित उद्योग लगे
वरिष्ठ पत्रकार सुखसागर नाथ सिन्हा ने कहा कि किशनगंज में अच्छी सड़कों का निर्माण, साफ-सफाई, जल निकासी की उत्तम व्यवस्था और कानून व्यवस्था को मजबूत कर पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता है। पत्रकार अवधेश कुमार ने कहा कि किशनगंज में चाय, अनानास, ड्रैगन फ्रूट आधारित उद्योग व पर्यटन को एक उद्योग के रूप में विकसित कर इतना राजस्व मिल सकता है, जिससे यहां की अर्थव्यवस्था को मजबूती दी जा सके। पत्रकार नीरज ने कहा कि किशनगंज के मूल निवासी शांतिप्रिय और कानून के पालक रहे हैं। मिलजुल कर यहां के लोग रहते आए हैं। आदिवासी और राजवंशी समाज के लोगों ने अपनी लोक कलाओं को जीवित रखा है। इनकी संस्कृति के संरक्षण व आर्थिक उत्थान के लिए प्रयास होने चाहिए। कृषि आधारित उद्योग लगने चाहिए।

सामाजिक कार्यकर्ता, कुलपति और शिक्षाविदों ने अपने विचार रखे
कार्यक्रम के संचालक वरिष्ठ साहित्यकार प्रवीण कुमार के एक सवाल का उत्तर देते हुए शिक्षाविद प्रोफेसर सजल प्रसाद ने कहा कि बिहार ही नहीं बल्कि देश में शांति व भाईचारगी के लिए किशनगंज की एक अलग पहचान है। पिछले कुछ दशकों में विकास कार्य हुआ है किन्तु किशनगंज के गौरव को प्रतिष्ठित करने के लिए जिस प्रकार के राजनीतिक सोच की आवश्यकता थी, वह नहीं हो सका है। उन्होंने युवा पीढ़ी को स्वर्णिम अतीत का गौरव बोध कराने तथा सामाजिक स्तर पर गौरव यात्रा निकाले जाने की बात कही। अंत में सभी वक्ताओं ने किशनगंज को पुनर्प्रतिष्ठित करने के लिए युवा पीढ़ी एवं बुद्धिजीवियों को व्यक्तिगत स्तर पर प्रयास करने की बात कही। बिहार स्वाभिमान आन्दोलन के संस्थापक सदस्य रंगीश ठाकुर ने बताया कि कि मार्च 2020 से अभी तक बिहार स्वाभिमान आन्दोलन बिहार के समसामयिक मुद्दों, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, विधानसभा के चुनावी मुद्दे, बिहार के गौरवशाली इतिहास, जागरूकता, रोजगारपरक तथा स्वरोजगार संबंधी कुल 149 वर्चुअल परिचर्चा आयोजित कर चुका है। इन सभी विषयों पर देश के नामी वैज्ञानिक, चिन्तक, पत्रकार, सफल उद्यमी, सामाजिक कार्यकर्ता, कुलपति और शिक्षाविदों ने अपने विचार रखे हैं।

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