जिला स्थापना दिवस आज:चाय और अनानास के उत्पादन ने दिलाई जिले को बिहार में विशेष पहचान 25 हजार एकड़ में चाय और 4 हजार एकड़ में हो रही

नीरज | किशनगंज6 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
किशनगंज प्रखंड में चाय के बागान। - Dainik Bhaskar
किशनगंज प्रखंड में चाय के बागान।
  • पूर्णिया से अलग होने के बाद जिले ने शैक्षणिक और आर्थिक तौर पर विकास के नए आयाम गढ़े
  • राज्य का एकमात्र चाय उत्पादक जिला है किशनगंज, यहां के चाय और अनानास की देशभर में होती है मांग

आज मकर संक्रान्ति के दिन ही जिले का स्थापना दिवस है। 14 जनवरी 1990 को पूर्णिया से अलग होकर किशनगंज जिला बना था। जिला बने हुए 32 वर्ष हो चुके हैं। जिला बनने के बाद किशनगंज ने शैक्षणिक और आर्थिक तौर पर खूब तरक्की की है। शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना, परिवहन, उर्जा जैसे क्षेत्र में उल्लेखनीय तरक्की हुई है। इन सबसे अलग जिले की दो ऐसी चीजें हैं, जो बिहार में खास बनाती है। वो है चाय और अनानास का उत्पादन। इसका क्रेडिट यहां के किसानों को जाता है। ये दोनों फसलें सिर्फ किशनगंज में होती है। तमाम कठिनाइयों और समस्याओं के बावजूद किसानों ने अपने दम पर चाय और अनानास की खेती को न सिर्फ कैश क्रॉप के रूप में बदल दिया है, बल्कि बड़ी संख्या में इन बागानों में लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं। किसान आज भी बंगाल की तर्ज पर टी सिटी का दर्जा और अनानास के लिए प्रोसेसिंग प्लांट की मांग कर रहे हैं। अगर ये हो जाए तो और भी तेजी से किसानों का रुझान इन दो फसलों की ओर होगा।

चाय : हर वर्ष 75 लाख किलो चाय का उत्पादन
अपनी मेहनत के दम पर यहां के किसान रिकार्ड चाय उत्पादन कर रहे हैं। किशनगंज की आबोहवा चाय उत्पादन के लिए मुफीद हैं। यहां की चाय 120 रुपए प्रति किलो से शुरू होकर चार हजार रुपए प्रति किलो तक बिकती है। किशनगंज में प्रतिवर्ष 75 लाख किलोग्राम चाय का उत्पादन होता है जबकि एक सौ वर्षों से अधिक समय से चाय की खेती कर रहे बंगाल में प्रतिवर्ष 125 लाख किलो चाय ही उत्पादन होता है। अपनी मेहनत के दम पर यहां के किसान बंगाल और असम के चाय से मुकाबला कर रहे हैं। ढाई दशक पहले किशनगंज के कपड़ा व्यापारी राजकरण दफ्तरी ने यहां चाय की खेती की शुरुआत की। इनकी सफलता देख अन्य कई व्यवसायी और स्थानीय बड़े किसान इस खेती से जुड़े। प्रोसेसिंग प्लांट भी लगाए। आज यहां नौ निजी और एक सरकारी टी प्रोसेसिंग प्लांट है। 10 एकड़ जमीन से जिले में शुरु चाय की खेती आज 25 हजार एकड़ से अधिक तक पहुंच चुकी है। यहां के बागानों और फैक्ट्री में अस्सी हजार से अधिक लोगों को साल भर रोजगार मिलता है।

पोठिया में खेत में लगे अनानास।
पोठिया में खेत में लगे अनानास।

अनानास : पोठिया और ठाकुरगंज प्रखंड में होती है अनानास की खेती
अनानास जिले की प्रमुख कैश क्रॉप बन चुकी है। पोठिया और ठाकुरगंज प्रखंड में दो हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में इसकी खेती होती है। सहायक निदेशक उद्यान डॉ. रजनी सिन्हा के अनुसार वित्तीय वर्ष 2021-22 में 235 हेक्टेयर में इसकी खेती का लक्ष्य था जो पूरा हो चुका है। यह राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के तहत है, जिसमें किसानों को अनुदान भी दिया जाएगा। प्रगतिशील किसान और पोठिया के उप प्रमुख दुलालजीत सिंह बताते हैं कि इसी साल सरकार ने अनानास की खेती को कृषि माना है। इसके पूर्व तक यह व्यवसाय माना जाता है। पहले किसानों को इसकी पुल्ली (बागान तैयार करने के लिए नए छोटे पौधे) के लिए असम और अन्य राज्यों पर निर्भर रहना पड़ता था। आज यहां के किसान पुल्ली निर्यात करते हैं। सबसे बड़ी समस्या यहां इसका प्रोसेसिंग प्लांट का नहीं होना है।

खबरें और भी हैं...