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बाढ़ का कहर:कछार पर बसे महादलितों के दो सौ परिवार हर वर्ष होते हैं विस्थापित

किशनगंज10 महीने पहले
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प्रखंड मुख्यालय से 13 किलोमीटर दूर दौला पंचायत स्थित बलुआ डांगा मझोक में दो सौ से अधिक महादलित परिवार रहते हैं। महानंदा नदी के किनारे बसा इन गांव की किस्मत हर बार बरसात में बदल जाती है। नदी में बांध नहीं रहने के कारण बरसात में हर वर्ष महानंदा अपनी पेटी से निकलकर गांव को अपने आगोश में ले लेती है। प्रतिवर्ष इस गांव के लोग नदी का विकराल रूप देखते ही विस्थापित हो जाते हैं। भूमिहीन इन महादलितों का डेली कमाना व डेली खाना है। बस पानी का नब्ज टटोल ये सभी जानमाल लेकर बगल के स्कूल में शरण लेते रहे हैं। प्रतिवर्ष विस्थापन का दंश झेलते-झेलते अब इनलोगों का आक्रोश सातवें आसमान पर है। स्थाई निवासी रामजी ऋषिदेव, तुडला मुर्मू, सोपान मरांडी, गणेश ऋषिदेव, भोला ऋषिदेव, अहिल्या मरांडी ने कहा कि हर बार अधिकारी व नेता लोग आते हैं। लेकिन सभी हालत देख आश्वासन देकर चले जाते हैं। स्थायी लोगों का कहना है कि इसवार महानंदा ने अपनी धारा बदलकर गांव की कर रखा है। जिससे लगता है कि इसबार पूरा मझोंक तक नदी में समा जाएगा। गांव का अस्तित्व ही विलीन हो जाएगा। अभी बरसात बांकी ही है। जबकि कटाव भी तेजी से हो रहा है। लोगों में इस बात को लेकर भी आक्रोश था कि अबतक जिला प्रशासन ने एक भी सरकारी नाव नहीं दिया है। एक नाव दिया भी तो वह महानंदा की उफनती थपेड़े को सह नहीं पाएगा। बार-बार विस्थापित होने से ऊबकर कई लोगों ने प्रधानमंत्री सड़क पर ही स्थायी बसेरा बना डाला है। प्रधानमंत्री सड़क भी कटाव की जद में : इस वर्ष नदी ने अपनी धारा मोड़ लिया है। जिससे प्रधानमंत्री सड़क भी कटाव की जद में है। हालांकि सड़क को बचाने के लिए जिला प्रशासन ने जो उपाय किए हैं। उससे स्थायी लोगो को सहज भरोसा नहीं हो रहा। लोगो का मानना है कि बचाव के नाम पर संवेदक ने लूट खसोट अधिक किया है। स्थानीय लोगो का कहना है कि अपनी जान बचाने एवं अपनी जानमाल की सुरक्षा के लिए स्वयं के खर्च पर बांस -बल्ला लगाकर हर संभव प्रयास किया गया। लेकिन यह प्रयास अब हतोत्साहित कर रहा है। जल निस्सरण विभाग कर रही है फ्लड फाइट का काम : जल निस्सरण विभाग के कार्यपालक अभियंता अशोक कुमार यादव ने कहा कि डीएम के निर्देश पर फ्लड फाइटिंग का कार्य जारी है। उन्होंने कहा कि महानंदा की धारा मझोक की ओर मुड़ जाने के कारण कई जगहों पर कटाव तेज है। जिसे नियंत्रण करने की कोशिश किया जा रहा है।

बलिया डांगा में दो नाव दिया गया है
96 घंटा पानी से घिरे रहने के बाद ही लोगों को बाद पीड़ित माना जाएगा। यह आपदा के मापदंड है। उन्होंने कहा कि लगातार नजर रखा जा रहा है।उन्होंने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि बलिया डांगा में दो नाव दिया गया है। उन्होंने कहा कि यहां के महादलित कहीं और जाना ही नहीं चाहते। भूमिहीन महादलित को पांच डिसमिल जमीन देने का प्रावधान है। लेकिन ये लोग किसी अन्य पंचायत में नहीं जाना चाहते हैं।
मोहम्मद शफी अख्तर, अंचल अधिकारी

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