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अनदेखी:टिकुलिया के संगम घाट पर बना चचरी पुल पानी के तेज बहाव में टूटा, परेशानी

कुमारखंड16 दिन पहले
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कुमारखंड के टिकुलिया स्थित संगम घाट पर नाव से नदी पार करते लोग। - Dainik Bhaskar
कुमारखंड के टिकुलिया स्थित संगम घाट पर नाव से नदी पार करते लोग।
  • जान जोखिम में डालकर नाव के सहारे नदी पार करते हैं लोग
  • सरकारी नाव का परिचालन करने की लोगों ने की मांग

कोसी की उपशाखा सुरसर नदी का जलस्तर बढ़ने से कुमारखंड प्रखंड क्षेत्र के सुरसर नदी तट पर बसे लोगों को आवागमन में काफी परेशानी हो रही है। जान जोखिम में डालकर नाव के सहारे किसी तरह लोग नदी पार करते हैं। प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न पंचायतों से गुजरने वाली सुरसर नदी बिशनपुर, टिकुलिया, कांकड़, परसाही, लक्ष्मीनीया, कुपाड़ी, बिशनपुर, कोड़लाही व टेंगराहा सिकियाहा के लोगों को सुरसर नदी का जलस्तर बढ़ने से आवागमन में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। टिकुलिया स्थित सुरसा नदी के संगम घाट पर बना चचरी पुल पानी के तेज बहाव में तीन दिन पूर्व टूट गया। इसके बाद से वहां नाव ही आवागमन का सहारा बची है। बताया गया कि टिकुलिया, बिशनपुर, कुपाड़ी और भतनी जाने के लिए एक मात्र चचरी पुल ही सहारा था। यहां के लोग जान जोखिम में डालकर नाव के सहारे नदी पार करने को मजबूर हैं। टिकुलिया संगम घाट, विशनपुर सुंदर पंचायत के कांकड़ घाट पर लोग नाव के सहारे या तैरकर नदी पार कर खेत देखने जा रहे हैं। जबकि सुरसर नदी में जलस्तर बढ़ने से कई एकड़ में लगे धान के पौधे पूरी तरह डूब गए हैं। टिकुलिया निवासी मो. सदरे आलम, नूर आलम, पवन साह, बहादुर साह, जहांगीर आलम, छोटेलाल सरदार, भूमा सरदार, मो. इस्लाम, मो. फिरोज आलम, मो. जाकिर, जगदेव यादव व गिरधारी यादव ने बताया कि तीन दिन से लगातार नदी में जलस्तर बढ़ने से खेत में पानी घुस गया है। बाढ़ का खतरा सताने लगा है। खेत में लगा धान का पौधा भी डूब चुका है। चचरी भी टूट गया है। बस एक नाव के सहारे जान जोखिम में डालकर नदी पार करते हैं। सरकारी नाव की व्यवस्था नहीं की गई है। इस संबंध में प्रखंड कृषि पदाधिकारी शंभू शरण सिंह ने बताया कि जिन किसानों की धान की फसल डूबी है, प्रखंड समन्वयक पंचायत सलाहकार को जांच के लिए भेज रहे हैं।

पटवन कराकर किए धान की रोपनी, अब फसल डूबी
आलमनगर
| लगातार हो रही बारिश एवं कोसी बराज में छोड़े गए पानी के कारण प्रखंड क्षेत्र के किशनपुर रतवारा, खापुर, गंगापुर पंचायत के कई गांव बाढ़ की चपेट में आने लगे हैं। वहीं रविवार से जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। आसपास के लोगों की माने तो अबतक नदी का जलस्तर दो फीट बढ़ गया है। इस कारण छतोना बहियार, अठगामा बहियार, हनुमाना बहियार, मलिबा चौर एवं रतवारा पंचायत के ललिया पुनर्वास, कपसिया में सैकड़ों एकड़ में लगी धान की फसल डूब गई है। खेतों में अगर पानी ज्यादा दिनों तक लगा रहा तो धान की फसल बर्बाद हो जाएगी। वहीं रतवारा पंचायत के मुरौत, मुरौत महादलित टोला, छतौना बासा, कपसिया, सुखार घाट, भवानीपुर बासा, खापुर पंचायत के मलिया डीह सहित कई गांवों की खेतों में बाढ़ का पानी आ गया है। ग्रामीणों का कहना था कि पंपिंग सेट से पानी देकर धान बुआई की गई थी। अब धान के पौधे डूब रहे हैं। सीओ अभय कुमार ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में कुल छह नाव का परवाना देते हुए परिचालन शुरू कर दिया गया है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगातार नजर रखी जा रही है। जैसे-जैसे जलस्तर बढ़ते जाएगा, लोगों को यातायात के लिए और भी नाव दी जाएगी।

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