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बाढ़ का कहर:एक माह के दौरान तीसरी बार लोहंद्रा नदी उफान पर, दर्जनों गांव में घुसा बाढ़ का पानी

कुर्साकांटा14 दिन पहले
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जागीर चौक से परबत्ता जाने वाली सड़क पानी में बह गया। - Dainik Bhaskar
जागीर चौक से परबत्ता जाने वाली सड़क पानी में बह गया।
  • सौरगांव, रहटमीना,जागीर परासी व लक्ष्मीपुर पंचायत सबसे ज्यादा प्रभावित
  • जागीर चौक से परबत्ता जाने वाली सड़क ध्वस्त, आवागमन में हो रही परेशानी

प्रखंड क्षेत्र में एक बार नदियों के जलस्तर बढ़ने से कई इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। प्रखंड क्षेत्र से होकर बहने वाली सभी नदियों का उद्गम स्थल नेपाल है। नेपाल के तराई वाले भागों में वर्षा होने के कारण लोहन्द्रा, बरजान, बहेलिया, बकरा व भलुवा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बहने लगा है। बाढ़ की सबसे ज्यादा त्रासदी सौरगांव, रहटमीना, जागीर परासी व लक्ष्मीपुर पंचायत के वासियों को झेलना पड़ रहा है। इन पंचायतों में एक माह के दौरान तीसरी बार बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। बाढ़ प्रभावित लोगों का हाल बेहाल बना हुआ है। लोहन्द्रा नदी ने सबसे ज्यादा तबाही परबत्ता, शर्मा टोला, ब्राह्मण टोला, मिल्की, लक्ष्मीपुर, रहटमीना, जागीर, बरकुरवा, महादलित टोला, कुम्हार टोला आदि जगहों पर मचाई है। पंचायत समिति सदस्य राकेश यादव ने बताया कि यह क्षेत्र बाढ़ की विभीषिका को प्रतिवर्ष झेलता आ रहा है। नदियों में उफान आने से क्षेत्र में पानी प्रवेश कर जाता है। वहीं बारिश अगर कम हुई तो पानी फिर निकल भी जाता है। इस वर्ष एक माह के दौरान अभी तक तीन बार बाढ़ आ चुकी है। लोगों को अपने घरों से बाहर निकलकर किसी अन्य जगह पर शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ता है। उन्होंने बताया कि इस बार आई बाढ़ ने जागीर चौक से परबत्ता जाने वाली सड़क को लगभग 20 फीट तक ध्वस्त कर दिया है। साथ ही पकड़ी से चिकनी जाने वाली सड़क भी कट गया है। जिससे दो पंचायतों के ग्रामीणों का आवागमन अवरुद्ध हो गया है। उन्होंने बताया कि रहटमीना व सौरगांव पंचायत के अधिकांश भागों में बाढ़ के पानी का जमाव है। उन्होंने कहा कि प्रशासन की तरफ से कोई भी राहत की व्यवस्था अभी तक नहीं की गई है।बाढ़ के कारण सैकड़ों एकड़ में लगा फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गया है।

पीड़ित परिवारों के बीच बांटा जाएगा जरूरत का सामान
अंचल अधिकारी श्यामसुन्दर से बात करने पर उन्होंने बताया कि कुछ निचले इलाकों में बाढ़ का पानी जमा होनी की खबर मिली है। बताया कि पिछले दिनों आई बाढ़ के समय पीड़ित परिवारों के बीच प्लास्टिक का वितरण किया गया था। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर उचित कार्यवाही की जाएगी। पीड़ित परिवारों के बीच जरूरत के सामानों को प्रदान किया जाएगा।
तीसरी बार घर से बेघर हुए लोग
पीड़ित परिवारों ने बताया कि एक माह के अंदर तीन बार अपने घरों को खाली करके बाहर निकलना पड़ा है। घरों में पानी आ जाने से काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। सबसे ज्यादा दिक्कत मवेशियों को लेकर हो जाती है। चारों तरफ सिर्फ पानी ही पानी नजर आने से मवेशियों के लिए हरा चारा कहीं उपलब्ध नहीं हो पाता है।

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