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उदासीनता:33 साल से रेलवे लाइन किनारे झुग्गी में रह रहे 600 लोग, न भूमि मिली न घर

कुरसेलाएक महीने पहले
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  • विधायक बोले- विस्थापित को सुविधा देना मुख्य एजेंडा

गंगा व कोसी के भीषण कटाव से 33 वर्ष पहले यानी 1987 में कुरसेला का मलिनिया गांव नदी में समा गया था। जिसके बाद 70 परिवारों के लगभग 400 लोग सड़क पर आ गए थे। कुछ लोग कुरसेला से तो निकल गए लेकिन लगभग 50 परिवारों ने अपना आशियाना कुरसेला के मजदिया रेलवे ढाला तथा रेलवे स्टेशन जाने वाली सड़क के किनारे झुग्गी-झोपड़ी बनाकर रहने लगे। 33 वर्षों में आबादी बढ़ी वर्तमान समय में 100 परिवार के लगभग 600 लोग विस्थापितों की जिंदगी जी रहे हैं। इन लोगों को बरसात के मौसम में काफी कठिनाई से गुजरना पड़ता है। इनकी जिंदगी नारकीय बन चुकी है। आज भी गांव के लोग पुराने दिनों की याद कर सिहर उठते हैं। आशियाने की आस में इतने दिन गुजर गए। लेकिन प्रशासन इन कटाव पीड़ितों को न जमीन और न ही सरकारी छत मुहैया करा सकी।

विस्थापित परिवार तेतर राम, हीना देवी, मोसमात सुमित्रा, देवी मंडल, मूसाय यादव, बेचन राम, मिथुन कुमार ने कहा कि लगभग 30 वर्ष पहले गंगा और कोसी के भीषण कटाव से पूरे मलिनिया गांव नदी में समा गया था। तभी से उक्त गांव वासी सड़क के किनारे तथा रेलवे लाइन के किनारे रहने को विवश है।वर्षों से विस्थापित परिवारों को बसने के लिए गुहार लगाई, लेकिन सब बेअसर रहा। कटिहार से पटना तक सिर्फ आश्वासन दिया जाता है। गंगा और कोसी के कटाव में हम लोगों का घर सहित उपजाऊ ज़मीन नदी में समा गया है। हम लोग बेघर हो गए हैं। बच्चों की पढ़ाई लिखाई के लिए किसी प्रकार का साधन नहीं है। केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित किसी भी योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

सरकारी योजनाओं से वंचित
इंदिरा आवास, राशन-किरासन, शौचालय आदि सरकार द्वारा नही दी जा रही है। सरकार द्वारा चलाई जा रही कल्यानकारी योजना से वंचित होना पड़ रहा है। चुनाव के वक्त पंचायत जनप्रतिनिधि आश्वासन देते हैं कि समस्या का समाधान चुनाव जीतने के बाद कर दिया जाएगा। लेकिन चुनाव समाप्त होते ही कोई भी जनप्रतिनिधि विस्थापित परिवार की सुधि लेने के लिए नहीं आते है।

विस्थापित परिवारों को भूमि अधिग्रहण कर बसाया जाएगा
विस्थापित परिवार के मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराना मेरा मुख्य एजेंडा है। विस्थापित परिवारों की समस्या के बारे में मुख्यमंत्री को लिखकर दिया गया है। जल्द ही भूमि अधिग्रहण कर विस्थापितों को बसाया जाएगा।
-विजय सिंह, विधायक, बरारी

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