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शिक्षा विभाग में फर्जीवाड़ा उजागर:जिले में 3002 नियोजित शिक्षक वेतन उठा रहे 34 साै से अधिक

लखीसराय13 दिन पहले
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तत्कालीन डीएम का आदेश पत्र जिसमें नियोजन इकाई में शिक्षकों की बहाली को विलोपित किया गया था बावजूद 12 शिक्षकों की हुई बहाली।
  • डीएम के 2012 में पदों को विलोपित करने के बाद भी उन्हीं पदों पर नियोजन
  • हलसी के 12 फर्जी शिक्षकों के वेतन भुगतान से खुला मामला

जिले के शिक्षा विभाग में 3002 नियाेजित शिक्षक हैं लेकिन 34 हजार से अधिक शिक्षक वेतन उठा रहे हैं। हालांकि फर्जी नियोजित शिक्षकों की निगरानी जांच भी चल रही है। जिले में नियोजन इकाई द्वारा कुल 3440 प्रारंभिक शिक्षकों का नियोजन किया गया था। बाद में निगरानी जांच के भय से 16 शिक्षकोंं ने स्वेच्छा से त्याग पत्र दे दिया। कुछ शिक्षकों ने निजी कारणों से भी नियोजित शिक्षकों की नौकरी छोड़ी। अब कुल 3002 नियोजित शिक्षक ही शेष रह गए हैं। जबकि जिले में 34 हजार से अधिक नियोजित शिक्षक वेतन उठा रहे है। फर्जीवाड़े की जांच के दौरान निगरानी विभाग द्वारा नियोजन इकाईवार नियोजित शिक्षकों के फाेल्डर की मांग की गई थी। शिक्षा विभाग द्वारा अब तक मात्र 1986 शिक्षकाें के ही फोल्डर निगरानी को उपलब्ध कराए गए हैं। हालांकि निगरानी जांच की प्रक्रिया अभी चल रही है। फर्जी शिक्षक नियोजन इकाई से लेकर शिक्षा विभाग की संलिप्तता सामने आ रही है। जिन पदों को तत्कालीन डीएम द्वारा 2012 में ही विलोपित किया गया बाद के वर्षों में उन्हीं पदों पर विभाग ने शिक्षकों का नियोजन किया। शिक्षा विभाग में फर्जी बहाली की लंबी फेहरिस्त है। हलसी प्रखंड के कैंदी पंचायत में दो रिक्त पदों को 2012 में तत्कालीन डीएम रामस्वरूप राम ने विलाेपित कर दिया था। रिक्त पदों के विलोपन के बाद उस पंचायत में कोई भी रिक्तियां नहीं थी। फिर 2015-16 में इन 12 शिक्षकों का नियोजन कैसे हुआ, यह सवाल उठ रहा है। नियोजन के लंबे समय के बाद स्थापना शाखा ने इन शिक्षकों को एक महीने के वेतन का भुगतान भी कर दिया।

चानन में नियोजन से पूर्व वेतन लेते रहे हैं शिक्षक
शिक्षा विभाग में अजीबोगरीब कारनामे हुए हैं। चानन प्रखंड में कुछ ऐसे भी शिक्षक मिले, जिनका नियोजन से पहले ही वेतन का भुगतान होता रहा। जब मामले का खुलासा हुआ तो विभाग में हड़कंप मच गया। नियोजन से पूर्व वेतन के मामले में शिक्षा विभाग ने जांच कमेटी भी बनाई थी। जांच के क्रम में बीईओ और डीपीओ एक दूसरे को जिम्मेवार ठहराते रहे।

जांच हुई तो फंसेंगे अधिकारी और कर्मी
शिक्षा विभाग में हुई गड़बड़ी की गहराई से जांच हुई तो अधिकारी एवं कर्मियों के गर्दन फंसेंगे। शिक्षक संगठनों द्वारा शिक्षा विभाग के भ्रष्टाचार की पोल खोली गई है। बिहार पंचायत नगर प्रारंभिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष बबलु कमार ने कहा कि शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार फैला हुआ है। संगठन द्वारा कई बार जांच की भी मांग की गई है। बबलु कुमार ने कहा कि फर्जीवाड़े एवं भ्रष्टाचार की उच्च स्तरीय जांच हो तो शिक्षा विभाग के अधिकारी व कर्मी नहीं बचेंगे। कहा कि 3002 नियोजित शिक्षकाें के अलावा चार सौ से अधिक फर्जी शिक्षक भी वेतन उठा रहे हैं।

किसी को बख्शा नहीं जाएगा

नियोजित शिक्षकों के हर मामले की गंभीरता से जांच होगी। कितना वेतन भुगतान हुआ, कितने फर्जी शिक्षक हैं उसकी जांच कर दोषी पर करवाई करेंगे। कई गड़बड़ी की सूचना है। किसी को नहीं बख्शा जाएगा।
संजय कुमार सिंह, जिला शिक्षा पदाधिकारी

रुपए की होगी रिकवरी

कितने शिक्षकों को वेतन मिलता है इसकी जानकारी नहीं है। संख्या से अधिक लोगों को वेतन दिया जा रहा है तो पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। गलत तरीके से वेतन लेने वाले शिक्षकों से रुपए की रिकवरी की जाएगी।
शिवचंद्र बैठा, डीपीओ स्थापना

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