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डॉक्टरी सलाह:बरसात में भींगने से पशुओं काे हो सकता है निमोनिया

चानन9 दिन पहले
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  • बरसात के दौरान पशुओं में कई तरह की गंभीर बीमारियों के होने का रहता है डर

बरसात के मौसम में पशुपालकों को अपने-अपने पशुओं पर सामान्य दिनों की अपेक्षा विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। इस मौसम में जगह-जगह हुए जलजमाव और पशुओं को निचले हिस्से वाली जमीन में लगे चारे को खिलाने से कई तरह की बीमारियों के होने का खतरा बना रहता है। ये बातें प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. संजीव कुमार ने कही। उन्होंने कहा कि वैसे पशुपालक जिनके पशुशाला के छप्पर या छत से बारिश के दौरान पानी टपक रहा हो वे अविलंब पशुशाला के छप्पर को ठीक करा लें। पशुशाला में पानी टपकने से फर्श हमेशा गीला रहने और पशुओं के भींगने से उन्होंने निमोनिया और कबसीडिया जैसी बीमारी हाे सकती है। पशुपालक पशुओं के आवश्यकता के अनुसार भूसा, दाना, चोकर और खल्ली का स्टोर भी कर लें।उन्होंने बताया कि पशुपालक बरसात के दिनों में मवेशियों को केवल हरा चारा न खिलाएं वे हरे चारे के साथ-साथ मवेशियों को भूसा मिलाकर जरूर खिलाएं। बरसात में हरे चारे में पानी की मात्रा अधिक होती है पशुओं को अगर केवल हरा चारा खिलाया जाएगा तो पशु पतला गोबर करने लगेंगे। इसके अलावे पशुपालक अपने मवेशियों को सामान्य दिनों में जितना दाना का मात्रा देते है बरसात के दिनों में उस दाने की मात्रा आधा किलो बढ़ाकर खिलाएं। चूंकि बरसात के दिनों में पशुओं को शरीर के तापमान को नियंत्रित करने के लिए ज्यादा ऊर्जा की आवश्यकता होती है। पशुओं को चारे में नहीं दें खराब हो चुका भूसा उन्होंने कहा कि पशुपालक अपने पशुओं को फफूंद लगा हुआ भूसा, चोकर और चारा बिल्कुल न खिलाएं इससे पशुओं को कई तरह के संक्रमण होने का डर रहता हैं। पशुपालकों को सुझाव देते हुए पशु चिकित्सक ने बताया कि बरसात के दिनों में पशुओं में बाह्य परजीवी जैसे अठैल, चमौकन आदि की समस्याएं बढ़ जाती है। बाह्य परजीवियों के कारण पशुओं में सर्रा, लाल पेशाब आदि जैसी खतरनाक बीमारियों के उत्पन्न होने का भी खतरा काफी अधिक बढ़ जाता हैं। ऐसी स्थिति में पशुपालक बाह्य परजीवियों को नियंत्रित करने के लिए पशुओं को समय समय पर दवा लगाए तथा इन्हीं दवाओं से पशुशाला के दीवाल, जमीन, नाद के नीचे आदि जगहों पर अच्छे से स्प्रे भी करें। ताकि अठैल व चमौकन पूर्णरूपेण मर जाएं।

पशुओं को दें पेट के कीड़े की दवा
पशु चिकित्सक ने बताया कि पशुपालक बरसात के दिनों में अपने-अपने मवेशियों को पेट के कीड़े से संबंधित दवा जरूर खिलाएं। इसके अलावे पशुपालक पशुओं को गलाघोटु, लंगड़ी, खुरपक्का व मुहपक्का आदि बीमारियों से बचाव के लिए प्रत्येक वर्ष टीका भी लगवाएं। उन्होंने बताया कि पशुपालक अपने पशुओं को बरसात के दिनों में गड्ढे वाले जमीन पर लगे घास को न खिलाएं तथा किसी गड्ढे में लगे पानी को भी न पिलाएं।

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