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परेशानी:सरकारी विद्यालय के बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई का नहीं उठा पा रहे हैं लाभ

चानन13 दिन पहले
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सुबह 10 बजे खेलते हुए जगुआजोर गांव के बच्चे। - Dainik Bhaskar
सुबह 10 बजे खेलते हुए जगुआजोर गांव के बच्चे।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में संसाधनों का अभाव, दूरदर्शन पर क्लास के समय चली जाती है बिजली, खेल में बीत रहा वक्त

लगातार बढ़ रहे कोरोना संक्रमण के मद्देनजर कोरोना के चेन को तोड़ने के लिए लॉकडाउन लगाया गया है। लॉकडाउन के कारण छात्र-छात्राओं की पढ़ाई भी विभिन्न निजी विद्यालयों द्वारा ऑनलाइन की जा रही है जबकि सरकारी विद्यालय के बच्चों के लिए सरकार ने डीडी बिहार चैनल पर 12वीं तक की पढ़ाई शुरु की है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे संसाधन के अभाव में इसका लाभ नही उठा पा रहे हैं। चानन प्रखंड क्षेत्र के सुदूर ग्रामीण व जंगली क्षेत्रों के रहने वाले छात्र- छात्राएं की ऑनलाइन पढ़ाई में आर्थिक तंगी रोड़ा बनने लगी है। जिस कारण छात्र-छात्राओं को अपने भविष्य की चिंता सताने लगी है। जिन अभिभावकों के तीन या चार बच्चे हैं और ऑनलाइन पढ़ाई का समय एक ही है तो ऐसी स्थिति में किन बच्चों को मोबाइल दें। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी प्रत्येक घर टीवी नहीं है। कुछ घरों में अगर टीवी है है भी तो ऐन वक्त बिजली रहेगी इसकी कोई गारंटी नहीं है। इन परेशानियों के सबब से कई अभिभावकों को गुजरना पड़ रहा है। प्रखंड क्षेत्र के कई ऐसे गांव हैं जहां,गरीब अभिभावकों को आज भी स्मार्ट फोन और घर में टीवी नहीं है। कई ऐसे अभिभावक हैं जिन्हें स्मार्टफोन तो है लेकिन इस लॉकडाउन के अवधि आर्थिक तंगी के कारण बच्चों के पठन-पाठन के लिए मोबाइल में डाटा भरवायें या पेट भरें। यह प्रश्न अभिभावकों को परेशान कर रखा है। इन समस्याओं के कारण ग्रामीण क्षेत्र के स्कूली बच्चे पिछले वर्ष से ही पढ़ाई से वंचित रह रहे हैं।

पढ़ाई के बदले खेलकर समय व्यतीत कर रहे है ग्रामीण बच्चे | लॉकडाउन के दौरान सरकारी विद्यालयों के बच्चे की पढ़ाई जारी रहे इसके लिए सरकार ने डीडी बिहार पर सुबह 10 बजे से पहली से 12वीं तक की ऑनलाइन पढ़ाई शुरु की है। इस दौरान कुशल शिक्षकों के द्वारा प्रत्येक विषयों की जानकारी आसान तरीकों से दी जाती है। लेकिन इस पढ़ाई का ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे संसाधन के अभाव में लाभ नहीं उठा पा रहे हैं।

ऑनलाइन पढ़ाई में निजी स्कूल के बच्चे आगे
लॉकडाउन में ऑनलाइन पढ़ाई को लेकर निजी विद्यालय सरकारी विद्यालय से काफी आगे हैं।निजी स्कूलों के बच्चों के पास जहां स्मार्टफोन, लैपटॉप, टैबलेट व अन्य इलेक्ट्रानिक डिवाइस है। वहीं सरकारी विद्यालय के बच्चों के पास ये सब संसाधन नहीं हैं। निजी स्कूलों ने तो ऑनलाइन क्लास भी कई दिन पहले ही शुरू कर दी थी। जबकि सरकारी विद्यालयों में तो अभी तक शुरू नहीं हो सकी हैं। क्षेत्र में मध्य व प्राथमिक विद्यालय की संख्या 104 है। लगभग 30 की संख्या में निजी विद्यालय भी है और 5 इंटर स्तरीय विद्यालय है। जिसमें लगभग 25 हजार से भी अधिक छात्र-छात्राएं नामांकित हैं। इनमें से बहुत से विद्यार्थी ऐसे हैं जिनके पास ऑनलाइन पढ़ाई के लिए कोई संसाधन नहीं हैं। हालात यह है कि सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के पास सभी विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के संपर्क नंबर ही नहीं है। ऐसे में ऑनलाइन पढ़ाई का सपना कैसे साकार किया जा सकता है।

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