जन संकल्प से हारेगा कोरोना:पिछले साल जीएनएम हुई थी कोरोना पॉजिटिव, आज भी मरीजों की कर रहीं सेवा, अस्पताल में भर्ती संक्रमित मरीजों का बढ़ा रहीं हौसला

लखीसराय6 महीने पहले
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  • गंभीर कोरोना संक्रमण होने के बावजूद अपनी इच्छाशक्ति से कोरोना को हराने वालों की जांबाज कहानियां, नहीं मानी हार, बोलीं-जन सेवा, धैर्य और कोरोना गाइडलाइन के पालन से ही बचाव...

कोविड-19 से 29 अप्रैल तक पूरे जिले में दो दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और 1012 काेरोना के एक्टिव मरीज हैं। डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ 24 घंटे अस्पतालों में कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रहे हैं। ऐसे ही हैं सदर अस्पताल में कार्यरत जीएनएम और लैब टेक्नीशियन। पिछले सत्र में काेराेना पॉजिटिव होने के बाद 14 दिनों तक होम आइसोलेशन में रही और फिर निगेटिव होने के बाद काेरोना के कार्य में ही जुट गई। इस बार भी उनकी ड्यूटी सदर अस्पताल के कोरोना पीड़ित मरीजों के इलाज के लिए बनाए गए वार्ड में लगाया गया है।

वे अपनी ड्यूटी बेखौफ होकर निभा रही है। भर्ती मरीजों की सेवा फ्रंटलाइनर वर्कर की तरह कर रही है। सदर अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में काम करने वाली जीएनएम सीमा कुमारी ने बताया कि पिछले सत्र में कोरोना काल में उनकी ड्यूटी स्वाब कलेक्शन सेंटर में था।स्वाब कलेक्शन के दौरान वे जून माह में संक्रमित हो गई थी। संक्रमित होने के बाद मन में कई तरह का भय और चिंता सताने लगा था। घर में एक दो साल की छोटी बच्ची और पति थे। मानसिक रूप से तनाव झेल रहे थे। 14 दिनों तक होम आइसोलेशन में रही और कोरोना के लिए बनाए गए गाइडलाइंस और औषधी काढ़ा पीने के बाद स्वस्थ हुई। स्वस्थ होकर वापस लौटने के बाद फिर से टेस्टिंग सेंटर में ही ड्यूटी किया। बताया कि इस कोरोना काल में वे सदर अस्पताल में बनाए गए आइसोलेशन वार्ड में ड्यूटी कर रही है। कोरोना के प्रति सावधानी बरतते हुए भर्ती मरीजों की सेवा करने में लगे हुए हैं। मरीजों को उनके रूटीन के हिसाब से दवा देने के साथ ही ऑक्सीजन आदि की सेवा उपलब्ध करा रहे हैं।

इसके अलावा भर्ती मरीजों को उनके आत्मबल को भी बढ़ाने का काम कर रही हैं। जीएनएम सीमा ने कहा कि कोरोना से डरने का नहीं हैं,बल्कि उससे मुकाबला करने का है। काेविड के गाइडलाइंस, दृढ़ इच्छा शक्ति और आत्मबल से इस बीमारी के जंग से जीता जा सकता है। योग, प्रणायाम और पौष्टिक आहार से मनुष्य के शरीर में इम्नुनिटी पावर बढ़ता है। वहीं जांच केन्द्र में भी कई लैब टेक्नीशियन पिछले साल कोरोना से ग्रसित हुए थे, लेकिन इस सत्र में फिर से दोगुने उत्साह के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं।

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