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परेशानी:विधिज्ञ संघ के महासचिव बोले-जेलर का ब्रोकर न्यायिक कार्य में लेता है पैसा, जेलर ने कहा-पैसे लेने का औचित्य नहीं, आरोप बेबुनियाद

लखीसराय8 दिन पहले
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लखीसराय जेल की टूटी चारदीवारी की हो रही मरम्मत। - Dainik Bhaskar
लखीसराय जेल की टूटी चारदीवारी की हो रही मरम्मत।
  • लखीसराय जेल के कैदियों से बेलबांड, रिलीज, टिप्पा लगाने में पैसे वसूली पर जेलर और अधिवक्ता आमने-सामने
  • जेल की दीवार टूटने से दूसरे जेलों में बंद हैं कैदी, मुवक्किल व अधिवक्ता परेशान, खर्च के बाद भी समय पर नहीं हो रहे कार्य

लखीसराय मंडल कारा की दीवार डेढ़ साल से टूटी हुई है। कैदियों को भागलपुर एवं मुंगेर जेल में शिफ्ट किया गया है। दीवार का निर्माण कार्य शुरू हुआ है लेकिन पूरा होेने में समय लगेगा। इन सब के बीच न्यायालय के अधिवक्ता एवं उनके मुवक्किल काफी परेशान हैं। बंदियों के जमानत के लिए बेलबांड पर टिप्पा लाने, न्यायालय से जमानत मिलने के बाद भागलपुर या मुंगेर रिलीज आर्डर भेजने आदि के कार्य में काफी फजीहत हो रही है तो कुछ लोगों के लिए रोजगार का अवसर खुल गया है। अधिवक्ताओं ने इसके लिए जेलर पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। जिला विधिज्ञ संघ के महासचिव ओम प्रकाश वर्मा ने कहा कि जेलर ब्रोकर रखे हुए हैं। टिप्पा व रिलीज के लिए ब्रोकर से राशि की वसूली करा रहे हैं। इससे मुवक्किल व अधिवक्ता परेशान हैं। स्थानीय कोर्ट के अधिवक्ताओं ने भी समर्थन कर कहा कि दूसरे जगह कैदियों के शिफ्ट होने से कोर्ट से जमानत मिलने के बाद भी दो से तीन दिनों तक बेवजह जेल में बिताना पड़ रहा है। इससे कानून निरूद्ध हो रहा है। मुवक्किलों का आर्थिक दोहन भी हो रहा है। इधर जेल की दीवार के निर्माण में बेस बनाकर ईंट की जोड़ाई हो रही है। निर्माण मार्च तक पूरा करने का लक्ष्य है। जेलर राकेश कुमार गिर ने बताया कि खुद मॉनिटरिंग कर दीवार का निर्माण करा रहे हैं। तेजी से कार्य हो रहा है। ताकि परेशानी को दूर किया जा सके। आरोप गलत हैं।

हर कार्य के लिए अलग-अलग रेट हैं फिक्स
दिनेश कुमार मंडल विधिज्ञ संघ के कोषाध्यक्ष ने कहा कि मुदालय मुंगेर में रहते है। दूसरे दिन रिलीज मुंगेर जाता है। प्रत्येक रिलीज पर पैसा लिया जाता है। सभी कार्य के लिए अलग-अलग रेट तय है। भागलपुर से टिप्पा के लिए तीन सौ रुपए, मुंगेर से इसी कार्य के लिए दो सौ रुपए लिए जाते हैं। कचहरी में एक दुकान इसके लिए फिक्स है।

यह कानून के निरुद्ध का मामला है
पूर्व लोक अभियोजक सह वरीय अधिवक्ता शंभूशरण सिंह ने कहा कि कैदियों के भागलपुर एवं मुंगेर जेल में शिफ्ट होने से अधिवक्ता के साथ मुवक्किल भी परेशान हैं। जमानत हाेने के बाद भी दो से तीन दिन जेल में रहना पड़ता है। खर्च भी अधिक होता है। यह कानून के निरूद्ध है।

हो रही है आर्थिक व मानसिक परेशानी
वरीय अधिवक्ता महेंद्र साव ने कहा कि जेल की दीवार टूटने पर डेढ़ साल से कैदी व अधिवक्ता भी परेशान हैं। कोई भागलपुर तो कोई मुंगेर जेल में शिफ्ट है। न्यायिक कार्य में अधिवक्ता व मुवक्किलों को मानसिक, शारीरिक व आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ रही है।

कैदी का टिप्पा लाने, रिलीज भेजने में परेशानी, गरीबों को हो रही दिक्कत
अधिवक्ता फारुख आलम ने कहा कि डेढ़ साल के बाद टूटे हुए जेल की घेराबंदी शुरू हुई है। कार्य भी काफी सुस्त है। इसके कारण न्यायिक कार्य प्रभावित हो रहा है। कैदी का टिप्पा लाने, रिलीज भेजने में जद्दोजहद करना पड़ता है। मुवक्किल को अधिक खर्च उठाना पड़ रहा है। गरीब लोगों को परेशानी हो रही है।

टिप्पा लाने, रिलीज पहुंचाने, बेलबांड लाने में लिया जा रहा पैसा : विधिज्ञ संघ महासचिव
जब से लखीसराय मंडल कारा की दीवार टूटी है तब से कैदी को मुंगेर, भागलपुर के जेल में ही रखा जाता है। दूसरे जेलों में रखने से कैदी व मुवक्किलों को काफी परेशानी होती है। जब न्यायालय से बंदियों की जमानत होने के बाद रिलीज भेजा जाता है तो दो से तीन दिन लगता है। मॉनिटरिंग सेल की बैठक में जेलर को प्रत्येक दिन आने-जाने की व्यवस्था करने को कहा गया है। इस संबंध में जिला जज से भी बात की गई है। डीएम, एसपी जेलर को पार्टी बनाने की बात कही थी। लेकिन वास्तविकता में लखीसराय जेलर के दो-चार ब्रोकर प्रत्येक दिन घूमते रहते हैं। टिप्पा लाने, रिलीज पहुंचाने, बेलबांड लाने में पैसा ले रहा है। मुवक्किल एवं अधिवक्ता को परेशानी हो रही है।
ओमप्रकाश वर्मा, महासचिव, जिला विधिज्ञ संघ, लखीसराय

टिप्पा, रिलीज व बेलबांड लाना मेरी ड्यूटी, पैसा लेने का औचित्य नहीं : जेलर
कैदियों का टिप्पा, रिलीज या बेलबांड लाना मेरी ही ड्यूटी है। इन कार्यों में किसी तरह का कोई पैसा लेने का कोई औचित्य ही नहीं है। लगाए गए सारे आरोप निराधार व बेबुनियाद हैं। आज तक किसी अधिवक्ता ने ऐसी शिकायत नहीं की है। कोरोना काल से ही जेल की दीवार टूटने के बाद से ही जेल आईजी का निर्देश है कि मुवक्किलों की सुविधा को लेकर वाय हैंड इन कार्यों को मुंगेर व भागलपुर से कराएं। जो भी खर्च आएगा विभाग वहन करेगी। फिर पैसे लेने की कोई बात ही नहीं है। पूर्व में रजिस्ट्री से इन कागजाताें को मुंगेर व भागलपुर से मंगाया जाता था। इसमें विलंब होने के करण बाय हैंड मंगवा रहे। इन कार्यों में कोई पैसा लेता है तो जानकारी दें, कार्रवाई होगी।
राकेश कुमार गिर, जेलर, लखीसराय मंडल कारा

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