धर्म-कर्म:50 किलो के चांदी के सिंहासन पर विराजमान हुईं मां

बड़हिया10 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
बड़हिया स्थित मां बालात्रिपुर सुंदरी की पिंडी व सिंहासन। - Dainik Bhaskar
बड़हिया स्थित मां बालात्रिपुर सुंदरी की पिंडी व सिंहासन।
  • 10 साल से दान में मिले चांदी से बना है मां बालात्रिपुर सुंदरी का 30 फीट लंबा सिंहासन

बड़हिसा स्थित मां बालात्रिपुर सुंदरी 50 किलो के चांदी के सिंहासन पर विराजमान हुई हैं। 11 जनवरी को माता के दरबार में सिंहासन की स्थापना की गई। बड़हिया प्रसिद्ध मां बाला त्रिपुर सुंदरी के पिंड के गर्भ गृह के चारो ओर चार दिन पूर्व चांदी के सिंहासन से सुशोभित किया गया है। मंदिर में 10 साल में आये दान व कोष से 40 लाख के लागत से बनारस के कुशल कारीगरों द्वारा बनाया गया है।  30 फीट लंबा और 10 फीट चौड़ा चांदी का सिंहासन मंदिर के गर्भगृह में स्थापित किया गया है। 50 किलो चांदी से बनाया गया घुमावदार सिंहासन मृतिका पिंड की चारों तरफ लगाया गया है। शक्तिपीठ जगदंबा मंदिर बड़हिया में पहली बार 50 किलो चांदी के आभूषण से बनाया गया 30 फीट लंबा 10 फीट कि चौरा घुमावदार सिंहासन स्थापित की गई है जिससे शक्तिपीठ की भव्यता और बढ़ गई है। 1992 में सफेद संगमरमर पत्थर से बनाया गया मंदिर : भक्तों के द्वारा कई सौ साल पुराने मंदिर को तोड़कर 1992 में सफेद संगमरमर पत्थर से लगभग 151 फीट से अधिक ऊंचा देवी मंदिर का निर्माण कराया गया है।मंदिर के शिखर पर स्वर्ण कलश के साथ मां जगदम्बा का ध्वज फहरता रहता है। भक्तों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए उनकी सुविधा के लिए करोड़ों की लागत से भव्य धर्मशाला श्रीधर सेवाश्रम का निर्माण कराया गया है। 1992 से शुरू हुई मंदिर के पुननिर्माण के बाद मन्दिर को धीरे धोरे ओर भी भव्य रूप दिया गया ।

पालवंश के राजा ने मंदिर के लिए दान में दी थी जमीन
शारदीय नवरात्र एवं वासंतिक नवरात्र के समय यहां दूर-दूर से हजारों संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।जहां आज मंदिर है वह जमीन सातवीं शताब्दी में पालवंश के प्रतापी राजा इंद्रद्युम्न ने मैथिल ब्राह्माण प्रथु ठाकुर व जय ठाकुर को दी थी। जय ठाकुर कर्म कांड के विद्वान थे वे मैथिल ब्राह्माण तो थे ही दान पुण्य में मिली जमीन और संपत्ति अपने भाई प्रथु ठाकुर को देने लगे। इस कारण उनके भाई भूमिहार ब्राह्माण के नाम से पुकारे जाने लगे। इन्हीं के वंश में श्रीधर ओझा पैदा हुए।

खबरें और भी हैं...