पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

श्रद्धांजलि:कवियों ने कहा-आलोचना पर हो रही हिंसा, आत्मावलोकन का नहीं बचा दौर

बड़हिया10 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के बाद उपस्थित कविगण। - Dainik Bhaskar
आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के बाद उपस्थित कविगण।
  • मथुरा प्रसाद नवीन की आदमकद प्रतिमा पर किया माल्यार्पण
  • मगही के कबीर कहे जाने वाले कवि मथुरा प्रसाद नवीन की मनाई गई 92वीं जयंती

बड़हिया के धरती पुत्र मगही के कबीर कहे जाने वाले कवि मथुरा प्रसाद नवीन का 92वां जयंती मथुरा प्रसाद नवीन चेतना समिति के तत्वावधान में मनाया गया। कार्यक्रम में उपस्थित स्थानीय कवि रौशन अनुराग, कृष्णमोहन सिंह, कवि राममूर्ति ने इस अवसर पर अपनी कविता प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों को सुनाया। इससे पूर्व उपस्थित लोगों ने नागवती स्थित स्व. नवीन प्रसाद के प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। 
    कवियों ने कहा कि देश में असहिष्णुता बढ गई है या मतभिन्न, भिन्न विचारधारा का जवाब हिंसा से दिया जा रहा है तो कुछ लोग इसे क्रिया के विपरीत प्रतिक्रिया बताते हैं। लेकिन, सोचिए एक वह दौर भी रहा जब सत्तासीन विनम्र थे, वे विरोधी का भी सम्मान करते थे। आलोचना करने वाले के खिलाफ हिंसात्मक नहीं बल्कि आत्मवलोकन करते थे। अब वह दौर नहीं। मथुरा प्रसाद नवीन से भी यही जुड़ा है। 2 सितंबर 1977 को भ्रष्टाचार एवं दुराचार के खिलाफ बड़हिया प्रखंड के छात्र, नौजवान, किसान, मजदूर एवं व्यावसाइयों ने हजारों की संख्या में ऐतिहासिक जुलूस निकालकर जब बिहार के बड़हिया थाना पर प्रदर्शन किया तो पुलिस ने निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर अंधाधुंध गोलीबारी की जिसमें आधा दर्जन से अधिक की मौत हो गई। कई प्रदर्शनकारियों ने अस्पताल में दम तोड़ दिया तो कई लोग विकलांग हो गये।
      हालांकि इस घटना पर लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने चुप्पी साध ली और मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर का कोई अतापता नहीं था। घटना के दस दिन बाद 12 सितंबर को बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर बड़हिया आये तो मथुरा प्रसाद नवीन ने सवाल किया कि- “मरले दिन से कैलियो खोज, एैला ठाकुर दशमा रोज, संते जब गिल गेलखुन गाय, ता कि करतै सीबीआई” (बिहार में नाई को ठाकुर कहा जाता है और किसी की मौत के बाद दसवें दिन लोग नाई से बाल मुड़वाते हैं। कर्पूरी ठाकुर की जाति भी नाई थी, इसलिए गुस्साए नवीन ने कटाक्ष किया था। कर्पूरी ठाकुर जैसी सहिष्णुता अब के नेताओं में कहां रही। ऐसा नहीं था कि नवीन जी सिर्फ राजनेताओं पर मुखर थे, वे अपने समाज और गांव के अाततायियों के खिलाफ भी इसी तरह लिखते थे। अपराधियों पर लिखा हमर गांव हो आला बबुआ, हमर गांव हो आला। बेटा हो बंदूक उठयले बाप जपो हो माला। नवीन प्रसाद का युग अलग था और उस दौर के लोग भी। उन्हें मगही के कबीर की उपाधि कवि नागार्जुन से मिली थी।
कई नामचीन कवियों के चहेते थे नवीन 
नागार्जुन, गोपाल सिंह नेपाली, फनीश्वरनाथ रेणु, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, रामधारी सिंह दिनकर, महादेवी वर्मा सरीखे दर्जनों साहित्यकारों के चहेते कवि मथुरा प्रसाद नवीन ने यथार्थ के धरातल पर बेबाक टिप्पणी कर ख्याति अर्जित की। साहित्य के माध्यम से समाज में परिवर्तन करने वाले समाज के लिए हर प्रकार की कुर्बानी देने को तैयार कवि नवीन ने समाज में जागृति पैदा करने के लिए सभी क्षेत्रों के लिए कविताएं लिखीं थी। नवीनजी ने इस क्षेत्र की पहचान साहित्य जगत में स्थापित कराई। मौके पर युवा नेता सुजीत कुमार, सौरभ कुमार, सौरव कुमार, राम कुमार, आकाश गुंजन, मिथलेश कुमार, रौशन कुमार, रूपक कुमार, कवि राममूर्ति, निरंजन पाठक, दिग्विजय कुमार सहित कई सदस्य उपस्थित थे।

खबरें और भी हैं...

    आज का राशिफल

    मेष
    Rashi - मेष|Aries - Dainik Bhaskar
    मेष|Aries

    पॉजिटिव- सकारात्मक बने रहने के लिए कुछ धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में समय व्यतीत करना उचित रहेगा। घर के रखरखाव तथा साफ-सफाई संबंधी कार्यों में भी व्यस्तता रहेगी। किसी विशेष लक्ष्य को हासिल करने ...

    और पढ़ें