परेशानी / पचना रोड की बदहाल स्थिति को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश

ग्रामीणों ने बताया कि गत लोकसभा चुनाव में भी सरकार की उदासीन रवैया के विरोध में वोट का बहिष्कार किया गया था। तब क्षेत्रीय सांसद ने चार माह में सड़क बना देने का आश्वासन दिया था। उसके बाद ग्रामीणों ने चुनाव में मतदान किया था। चार माह से अधिक बीतने के बाद भी सड़क निर्माण का कार्य शुरू नहीं किया गया है। बारिश से सड़क की स्थिति काफी बदतर हो चुकी है। मोरमा-तिलोखर गांव की 10 किलोमीटर की दूरी दोपहिया वाहन से भी डेढ़ घंटे में तय की जाती है। विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही सभी गांव के लोग एकजुट होकर वोट बहिष्कार का मन बना चुके हैं। ग्रामीणों ने बताया कि गत लोकसभा चुनाव में भी सरकार की उदासीन रवैया के विरोध में वोट का बहिष्कार किया गया था। तब क्षेत्रीय सांसद ने चार माह में सड़क बना देने का आश्वासन दिया था। उसके बाद ग्रामीणों ने चुनाव में मतदान किया था। चार माह से अधिक बीतने के बाद भी सड़क निर्माण का कार्य शुरू नहीं किया गया है। बारिश से सड़क की स्थिति काफी बदतर हो चुकी है। मोरमा-तिलोखर गांव की 10 किलोमीटर की दूरी दोपहिया वाहन से भी डेढ़ घंटे में तय की जाती है। विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही सभी गांव के लोग एकजुट होकर वोट बहिष्कार का मन बना चुके हैं।
Resentment among villagers over the dire situation of Pachana Road
Resentment among villagers over the dire situation of Pachana Road
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ग्रामीणों ने बताया कि गत लोकसभा चुनाव में भी सरकार की उदासीन रवैया के विरोध में वोट का बहिष्कार किया गया था। तब क्षेत्रीय सांसद ने चार माह में सड़क बना देने का आश्वासन दिया था। उसके बाद ग्रामीणों ने चुनाव में मतदान किया था। चार माह से अधिक बीतने के बाद भी सड़क निर्माण का कार्य शुरू नहीं किया गया है। बारिश से सड़क की स्थिति काफी बदतर हो चुकी है। मोरमा-तिलोखर गांव की 10 किलोमीटर की दूरी दोपहिया वाहन से भी डेढ़ घंटे में तय की जाती है। विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही सभी गांव के लोग एकजुट होकर वोट बहिष्कार का मन बना चुके हैं।ग्रामीणों ने बताया कि गत लोकसभा चुनाव में भी सरकार की उदासीन रवैया के विरोध में वोट का बहिष्कार किया गया था। तब क्षेत्रीय सांसद ने चार माह में सड़क बना देने का आश्वासन दिया था। उसके बाद ग्रामीणों ने चुनाव में मतदान किया था। चार माह से अधिक बीतने के बाद भी सड़क निर्माण का कार्य शुरू नहीं किया गया है। बारिश से सड़क की स्थिति काफी बदतर हो चुकी है। मोरमा-तिलोखर गांव की 10 किलोमीटर की दूरी दोपहिया वाहन से भी डेढ़ घंटे में तय की जाती है। विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही सभी गांव के लोग एकजुट होकर वोट बहिष्कार का मन बना चुके हैं।
Resentment among villagers over the dire situation of Pachana Road
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  • 20 गांव के लोगों का सड़क से आवागमन, कई वर्षो से सड़क का हाल बेहाल, ग्रामीणों का निर्णय-रोड नहीं तो वोट नहीं

दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 04:00 AM IST

लखीसराय. लखीसराय पचना रोड की स्थिति भयावह है। इस पर पैदल चलना भी मुश्किल है। लखीसराय में ग्रामीण गतिविधियों की लाइफ लाइन पचना रोड पतनेर सहित जोकमैला, भेनौरा, डि‌हरा, झाखड़, जनकपुर, चरोखरा, खीरहो, मोरमा, करौता, पचौता, विकम, तिलोखर, दोगाय, कछियाना, किशनपुर, कालभैरो, गंगटा, दिगहा आदि कई गांवों को जोड़ते हुए शेखपुरा जिला में एसएच18 से सीधे जुड़ जाती है। 
    पचना रोड की की बदहाली दूर हो तो लखीसराय से शेखपुरा का यह शॉर्टकट रास्ता है, जो लगभग 15 किमी दूरी कम करता है। पहले यह मुंगेर से राजगीर का मुख्य मार्ग थी लेकिन विभागीय उपेक्षा एवं राजनीतिक उदासीनता से जर्जर हो गई। लखीसराय से लगभग 20 गांव इस सड़क से जुड़े हैं। सड़क जर्जर होने से क्षेत्र के लोगों में आक्रोश है। अब यह जन आंदोलन का रूप ले रहा है। 28 जून को प्रभावित क्षेत्र के लोगों की बैठक में निर्णय हुअा कि यदि सड़क का अधिग्रहण पीडब्ल्यूडी मेंें नहीं हुआ तो सभी बीस गांव के लोग एक साथ वोट बहिष्कार कर विरोध प्रदर्शन करेंगे। 
लोकसभा चुनाव में आश्वासन देकर लिया वोट, नहीं बनी सड़क 
ग्रामीणों ने बताया कि गत लोकसभा चुनाव में भी सरकार की उदासीन रवैया के विरोध में वोट का बहिष्कार किया गया था। तब क्षेत्रीय सांसद ने चार माह में सड़क बना देने का आश्वासन दिया था। उसके बाद ग्रामीणों ने चुनाव में मतदान किया था। चार माह से अधिक बीतने के बाद भी सड़क निर्माण का कार्य शुरू नहीं किया गया है। बारिश से सड़क की स्थिति काफी बदतर हो चुकी है। मोरमा-तिलोखर गांव की 10 किलोमीटर की दूरी दोपहिया वाहन से भी डेढ़ घंटे में तय की जाती है। विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही सभी गांव के लोग एकजुट होकर वोट बहिष्कार का मन बना चुके हैं।

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