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गुणवत्ताविहीन निर्माण:122 करोड़ से बनी एलकेवी कैनाल की दीवार 13 महीने में ही टूटी, 100 एकड़ में फैला पानी

चानन2 दिन पहले
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बुधवार की शाम एलकेवी नहर की टूटी हुई दीवार। - Dainik Bhaskar
बुधवार की शाम एलकेवी नहर की टूटी हुई दीवार।
  • सीएम के उद‌्घाटन करने के साल भर बाद ही 6 फीट टूटी दीवार

साल 2020 में 16 जुलाई को 122 करोड़ की लागत से कुंदर बराज से बन्नुबगीचा के बीच दीवार का निर्माण कराया गया था। इसके बाद पूरे तामझाम से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसका उद‌्घाटन किया और निर्माण कार्य पूरा करने पर अधिकारियों की खूब पीट थप-थपाई। लेकिन निर्माण के 13 माह बाद ही सुशासन बाबू की सरकार में निर्माण में किस तरह अनियमितता बरती गई इसकी पोल खुल गई। दरअसल, बुधवार की सुबह की नहर की दीवार में रिसाव शुरू हो गया और शाम 7:30 बजे तक 6 फीट दीवार टूट गई। दीवार टूटते ही नहर के बगल में बसा धनबा बेलदरिया गांव नगर के पानी में डूब गया। इससे करीब 1200 लोग बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। वहीं गांव के करीब 100 एकड़ खेती योग जमीन जलमग्न हो गई। ज्ञात हो कि कुंदर बराज के साथ साथ कुंदर से लेकर बन्नुबग़ीचा तक 13 किलोमीटर लंबी एलकेवी नहर का पक्कीकरण कराया गया था। प्रोजेक्ट के शुरू होने से गद्गद् दिख रहे मुख्यमंत्री व स्थानीय सांसद ने क्षेत्र के किसानों का सपना पूरा करने के लिए अधिकारियों की जमकर तारीफ की, लेकिन ये सारा उत्साह कुछ दिन का ही रहा।

देर शाम टूटी दीवार, धनबा बेलदरिया की 1200 की आबादी पानी में डूबी

पहले 84 करोड़ रुपए से नहर की दीवार का होना था निर्माण
बाद में राशि बढ़ाकर 122 करोड़ रुपए की गई
20 हजार किसानों को फायदा पहुंचाने किया गया था दावा
लगभग 38 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचाई की थी योजना
34 हजार खरीफ व 4 हजार हेक्टेयर रबी को मिलता पानी
कुंदर से बन्नुबगीचा तक 13 किमी लंबी है नहर की दीवार

निर्माण एजेंसी ने नहर में कई जगहों पर नहीं बनाई दीवार

बीते दिनों नहर में पानी छोड़े जाने के बाद पानी के साथ कमजोर दीवारों को भी अपने साथ बहा ले गयी है। नहर की पक्की साथ टूटू कर नहर में जहां तहां मलवा जमा हो गया है। वहीं कई जगहों पर निर्माण एजेंसी के द्वारा बिना पक्कीकरण किये ही छोड़ दिया गया है।ग्रमीणों ने बताया कि निर्माण एजेंसियों के द्वारा नहर पक्कीकरण कार्य में घटिया किस्म की सामग्री का इस्तेमाल किया गया है।जिससे कि उद्घाटन के दूसरे साल में ही एलकेवी नहर जहां तहां टूट गया है। कई जगहों पर स्थानीय किसानों ने नहर की टूटी दीवारों के ऊपर मट्टी डालकर पानी के बहाव को रोकने का प्रयास किया गया है। नहर के किनारे से सारी मिट्टी बह कर नहर में जा गिरी है। जिससे नहर क्षतिग्रस्त हो गया है। अगले एक दो वर्षों में यह नहर फिर से ज्यों का त्यों हो जायेगा। फिलहाल सिंचाई विभाग की जानकारी मिलते ही नहर में पानी तुरंत कम किया गया।जिससे कि नहर की मरम्मती कर फजीहत से बची जा सके।

2015 में सीएम ने निर्माण कराने की घोषणा की थी

सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने साल 2015 में कुंदर बराज से लेकर एलकेवी नहर तक 13 किलोमीटर लंबे नहर पर दीवार निर्माण कराने की घोषणा की थी। इसके बाद साल 2016 में मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह ने निर्माण कार्य का शिलान्यास किया था। इसके बाद तीन साल पहले 2017 में दीवर निर्माण का कार्य प्रारंभ हुआ था। पहले 84 करोड़ रुपये की लागत से निर्माण कार्य किया गया। फिर इसकी लागत बढ़ाकर 122 करोड़ रुपए कर दी गई। अधिकारियों ने दावा किया कि निर्माण कार्य पूरा होने से 20 हजार से अधिक किसानों को फसल सिंचाई में इसका लगभग मिलेगा और 38 हजार हेक्टेयर भूमि में सिंचाई हो सकेगी। इसमें 34 हजार खरीफ तथा चार हजार हेक्टेयर रबी फसल की जमीन शामिल है। लेकिन स्थानीय किसानों को इसका लाभ मिल सकता उससे पहले ही नहर की दीवार टूट गई।

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