खेतीबाड़ी:बैदेही और सबौर-1 मखाना की उन्नत नस्ल, साल में दो बार कर सकेंगे इसकी खेती: विशेषज्ञ

महिषीएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक
मखाना की खेती के बारे में जानकारी देते विशेषज्ञ। - Dainik Bhaskar
मखाना की खेती के बारे में जानकारी देते विशेषज्ञ।
  • कोसी क्षेत्र में मखाने की खेती के लिए सभी उपयुक्त संसाधन उपलब्ध

प्रखंड कृषि सभा भवन में मंगलवार को विशेषज्ञों के द्वारा कोसी क्षेत्र के बड़े भूभाग में किसानों को मखाना की खेती के लिए कम लागत में अधिक उत्पादन की जानकारी दी गयी। कोसी क्षेत्र में मखाना की खेती की संभवना को देखते हुए सरकार द्वारा मखाना उत्पादन में वृद्धि लाने के लिए किसानों को नई तकनीक अपनाने की जानकारी दी जा रही है। इस दौरान मखाना रिसर्च सेंटर दरभंगा के वैज्ञानिक डॉ. इन्द्रशेखर सिंह ने बताया कि उन्नत किस्म के बीज भी किसान को उपलब्ध करवाया जाएगा। वहीं अगवानपुर कृषि महाविद्यालय के प्राचार्य सह कृषि वैज्ञानिक उमेश प्रसाद सिंह ने मखाना की खेती में लगने वाले उर्वरक व कीटनाशक की मात्रा पर लोगों को अधिक जानकारी दी। किसानों को प्रखंड उद्यान पदाधिकारी अभय कुमार सिंह ने जानकारी देते बताया कि निबंधित किसानों को मखाना उद्यान विभाग के अधिकारी द्वारा प्रति किसान एक हेक्टेयर में लगने वाले मखाना के उन्नत नस्ल की बीज बैदेही एवं सबौर-1 नस्ल की बीज उपलब्ध करवाई जाएगी। मखाना वैज्ञानिक डा.इन्द्रशेखर सिंह ने बताया कि किसान अगर चाहे तो इन नस्ल के बीजों से वर्ष में दो बार मखाना की खेती कर सकते हैं।

खबरें और भी हैं...