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दर्दनाक:दवा है, डोज की जानकारी नहीं कह सर्पदंश पीड़ित महिला को किया रेफर, रास्ते में मौत

महिषी6 दिन पहले
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अस्पताल में मामले की छानबीन करती पुलिस।
  • महिषी पीएचसी में आयुष चिकित्सक डॉ. बीके मिश्रा ने खड़े किए हाथ, एमबीबीएस रहे गायब

महिषी थाना क्षेत्र के महिषी दक्षिणी पंचायत अन्तर्गत लहटा बथान महपुरा में शनिवार की रात विपिन कुमार की 25 वर्षीय पत्नी ममता देवी की मौत बदहाल चिकित्सा व्यवस्था के कारण हो गई। सर्पदंश पीड़ित महिला को उसके परिजनों ने महिषी पीएचसी लाया। चिकित्सा केंद्र में सर्पदंश की दवा भी थी लेकिन तैनात आयुष चिकित्सक को सर्पदंश की दवा का डोज मरीजों को देने की जानकारी नहीं थी। लिहाजा उसने मरीज को सहरसा रेफर कर दिया लेकिन ममता ने रास्ते में ही दम तोड़ दी। अहम सवाल यह कि इस मौत का जिम्मेदार किसे ठहराया जाए। सरकारी चिकित्सा व्यवस्था किस कदर चरमरा गई है कि अब अस्पताल में दवा रहते मरीजों की जान नहीं बचायी जा सकती है वजह साफ है कि सरकार ने जिस चिकित्सक को अस्पताल में नियुक्त किया है उसे अंग्रेजी दवा देने और लिखने की जानकारी नहीं है। ‌इधर सिविल सर्जन डॉ. अवधेश कुमार ने घटना पर संज्ञान लेते जांच का आदेश दिया है। मृतक महिला ममता देवी के परिजन ने बताया कि वह पानी लाने घर के पास लगे चापाकल पर जा रही थी कि जहरीले सांप ने डस लिया। पति विपिन कुमार ने बताया कि जब वे पत्नी को लेकर महिषी अस्पताल पहुंचे तो वहां उपस्थित आयुष चिकित्सक डॉ. बी के मिश्रा ने उपचार करने के बजाए रेफर कर दिया। लोगों ने पूछा अस्पताल में सर्पदंश की दवा नहीं है ? लेकिन आयुष चिकित्सक ने यह जबाब देने के बजाए उसकी गंभीर हालत बताते रेफर करने की बात कही।

दो बच्चों से छिन लिया मां का आंचल
परिजन सहित ग्रामीण ने बताया कि ममता देवी को 4 वर्ष और 2 वर्ष के दो छोटे बेटे हैं। मां के शव को दोनों बालक एक टक निहार रहे थे। उसे पता ही नहीं कि उनके सिर से मां का साया उठ चुका है। बैद्यनाथ खिरहरि, अभय खिरहरि, कमलेश्वरी निराला आदि ने कहा कि मौत के लिए महिषी के चिकित्सा पदाधिकारी जिम्मेवार है।

स्टोरकीपर बुलाने पर ही आते अस्पताल
मुखिया नरेश कुमार यादव ने कहा प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रामाधार सिंह कभी अस्पताल में नहीं रहते और आपातकाल दवा भी स्टोर में बंद रहता है और स्टोरकीपर चिकित्सक के बुलाने पर ही अस्पताल आते हैं।

प्रभारी चिकित्सक की अनुपस्थिति में केवल दो आयुष डॉक्टर ही रहते

महिषी पीएचसी में एमबीबीएस चिकित्सक मात्र दो हैं। जिसमें प्रभारी चिकित्सक केवल बैठक में भाग लेने आते हैं। लोगों ने बताया कि चार आयुष चिकित्सक के सहारे कोसी पीड़ित क्षेत्र के सबसे बड़े अस्पताल में तैनात आयुष चिकित्सक सिर्फ मरीजों को रेफर करते हैं। पीएचसी में प्रतिदिन दो आयुष चिकित्सक उपलब्ध रहते हैं जिसमें डॉ. बीके मिश्रा एवं डॉ. उत्तमलाल महतो के भरोसे मरीजों का इलाज भगवान भरोसे ही चल रहा है।

मरीज की गंभीर हालत को देखते हुए रेफर किया
दवा उपलब्ध रहते हुए भी मरीज की गंभीर हालत को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल रेफर किया गया। उन्होंने कहा कि वेक्सीन के लिए जब तक वे स्टोरकीपर को बुलाते तब तक पीड़िता की हालत और नाजुक हो जाती।
-डॉ. बीके मिश्रा, आयुष चिकित्सक

लापरवाही की जांच की जाएगी
सर्पदंश की दवा स्टोर में रखने की चीज नहीं है उसे इमरजेंसी किट में रखा जाता है। इस मामले में किस स्तर पर लापरवाही हुई है उसकी कल वे जांच कराएंगे। महिषी अस्पताल के चिकित्सा पदाधिकारी से स्पष्टीकरण पूछा जाएगा चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रामाधार सिंह के अस्पताल में नहीं रहने के संबंध में पूछे गए सवाल के जबाब में सिविल सर्जन ने कहा कि इसी आरोप में उनका वेतन दो महीना से बंद है।
-डॉ. अवधेश कुमार, सिविल सर्जन

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