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उपलब्धि:6001 तरीके से गणित पहेली बनाया, नाना की स्मृति में नाम रखा ‘अटकू’

रंजीत गुप्ता | मनिहारी8 दिन पहले
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  • नवाबगंज निवासी गिनीज रिकॉर्ड्स होल्डर डॉ. सदानंद पॉल ने लॉकडाउन का किया सदुपयोग
  • इंटरनेशनल रिकॉर्ड के रूप में बिहार में बुक ऑफ रिकॉर्ड्स से मिली मान्यता

नवाबगंज निवासी सदानंद पॉल ने 14 दिन में संसार का सबसे बड़ा गणित पहेली बनाया है। जिसका नाम अपने नाना अटकू पॉल के नाम पर ’अटकू’ रखा। इसे इंटरनेशनल रिकॉर्ड के रूप में बिहार बुक ऑफ रिकॉर्ड्स से मान्यता भी मिली है। उन्होंने बताया कि यह लॉकडाउन अवधि का सदुपयोग है। सदानंद पॉल ने 6001 तरीके से 1 से 8 अंक तक के सीरीज का निर्माण किया है। यह 1 से 8 तक के अंक की संख्यात्मक वर्ग पहेली है। जिनमें 64 खाने हैं।‌ जिनमें किसी एक संख्यात्मक वर्ग पहेली में 1 से 8 तक के अंक की सीरीज अधिकतम 8 बार उपयोग हुआ है। लेकिन प्रत्येक क्षैतिज, उदग्र, अथवा आरे तिरछे या त्रियक आधार 1 से 8 तक में कोई समान नहीं है। गणित पहेली के निर्माण में सदानंद पाल को 14 दिन का समय लगा। इस गणित पहेली 8 अंक और 8 अंकों की सीरीज होने के कारण उनका नामकरण अटकू रखा।

गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज है नाम
पीएलएसएन इंटर स्तरीय गर्ल्स स्कूल में हिंदी व्याख्याता डॉ. सदानंद पॉल 3 विषयों में एमए और मानद डॉक्टरेट हैं। यह उनके द्वारा दूसरी स्वदेशी गणित पहेली है। इसके पूर्व वर्ष 2020 में भी सदानंदकु लॉकडाउन के दौरान विपदा को अवसर समझकर बनाया था। उनका नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज है। मानव शृंखला में सर्वाधिक मैसेज भेजने सहित 8 बार लिम्का बुक में, 2 बार इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में, आरएचआर यूके में 10 रिकॉर्ड्स, तेलुगु बुक ऑफ रिकार्ड्स में 50 से अधिक रिकॉर्ड्स, तो बिहार बुक ऑफ रिकार्ड्स में 200 से अधिक रिकॉर्ड्स दर्ज हैं।

पद्म अवार्ड के लिए 14 बार हो चुके हैं नामित
पद्म अवार्ड के लिए 14 बार नामांकित हो चुके हैं, तो 22,000 से अधिक आरटीआई आवेदनों को भेजने को लेकर वेबसाइट मैसेंजर ऑफ आर्ट में जगह मिली है, वहीं मैकिंग इंडिया ऑनलाइन अखबार ने उन्हें मिस्टर एनसाइक्लोपीडिया कहा है। राष्ट्रपति के हाथों कविता के क्षेत्र में नेशनल अवार्ड भी उन्हें प्राप्त है। उनकी तीन पुस्तकें, यथा- गणित डायरी, पूर्वांचल की लोकगाथा, गोपीचंद, लव इन डार्विन प्रकाशित हैं। परिवार के कई सदस्य वर्ल्ड रिकॉर्ड में किन्ही न किन्ही कारण से दर्ज हो चुके हैं। मनिहारी क्षेत्र के बुद्धिजीवियों, उनके परिजनों और विद्यालय परिवार ने उनकी इस उपलब्धि ‘’गणित पहेली अटकू’’ को अद्भुत, ज्ञानवर्धक बताया है।

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