मजबूरी:दो वक्त की रोटी के लिए खतरे से खेल रही 5 वर्ष की बच्ची

मुंगेर2 महीने पहले
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रस्सी पर चलकर करतब दिखाती बच्ची। - Dainik Bhaskar
रस्सी पर चलकर करतब दिखाती बच्ची।
  • स्कूल जाने की उम्र में बच्ची रस्सी पर, सिर पर कलश, हाथों में लाठी लिए कर रही कलाबाजी

कहावत है कि बचपन हर गम से अंजाना होता है, लेकिन गरीबी की मार से पेट की खातिर बच्चों को छोटी उम्र में ही दो जून की रोटी कमाने के लिए खतरे से खेलने की मजबूरी आ पड़ती है। जिसे देखकर हम और आप हैरत में पड़ जाते हैं। पढ़ने लिखने की उम्र में कई बच्चें सड़कों पर जद्दोजहद करते देखे जाते हैं। सड़क के किनारे अक्सर छोटे मासूम बच्चे जिस तरह के कारनामे दिखाते मिल जाते हैं वह आपके और हमारे वश के बाहर की बात है। रस्सी पर करतब दिखाते इन बच्चों को जब आसपास से गुजरने वाले लोग देखते हैं तो बिना पूरा खेल देखे वे यहां से निकल नहीं पाते। शहर के आजाद चौक चौराहा के पास सोमवार की सुबह रस्सी पर अपने करबत दिखाती करीब पांच साल की बच्ची मेनका भी रोटी जुटाने की जद्दोजहद में अपने परिवार के साथ इस काम को अंजाम देती नजर आई। स्कूल जाने की उम्र में यह बालिका अपने सिर पर कलश रखे हाथों में लाठी लिए हवा में लहराती रस्सी पर कई तरह की कलाबाजियां दिखाकर लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही थी। वह कभी रस्सी पर दौड़ती तो कभी रस्सी पर अपने दोनों पैरों को साधते हुए नृत्य करती। रस्सी के एक सिरे से दूसरे सिर तक वह हवा में लहराते हुए एक लाठी के सहारे संतुलन बनाते हुए पहुंच जाती है। करतब दिखाने के बाद वह रस्सी नीचे आकर लोगों की भीड़ में रुपए लेने पहुंच जाती है। बच्ची के करतब दिखाने से लोगों द्वारा जो रुपए मिलते हैं उनसे परिवार के सदस्यों का पेट पलता है। राजस्थान निवासी शोभा देवी ने बताया कि एक दिन में उन्हें करीब 4-5 सौ रुपए मिल जाते हैं।

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