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जिम्मेदारों की बेशर्मी देखिए:गंगा पुल के एप्रोच पथ निर्माण स्थल पर खुले गड्‌ढे में डूबने से 3 साल की बच्ची की मौत, एक लाख रु. देकर मामला दबाया

मुंगेर4 दिन पहले
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परी कुमारी। (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar
परी कुमारी। (फाइल फोटो)
  • पानी स्टोर करने के लिए साइट पर 10 फीट गहरे कई गड्‌ढे, घेराबंदी नहीं होने से मौत को दे रहे दावत
  • टीओपी प्रभारी बोले-पटरी पर लोग चलेंगे तो मरेंगे ही, प्रोजेक्ट इंचार्ज बोले-कुछ नहीं बोलूंगा जो लिखना है लिखो

गंगा पर रेल सह सड़क पुल के एप्रोच पथ के निर्माण स्थल पर पानी स्टोर करने के लिए बने गड्‌ढ़े में डूबने से तीन साल की एक बच्ची की मौत हो गई। बच्ची की लाश मिलने के बाद ग्रामीणों ने काम रुकवाकर मुआवजे के लिए थोड़ी देर हंगामा किया।

जिसके बाद कंपनी द्वारा मृत बच्ची के परिजनों को एक लाख रुपए देने का आश्वासन देने हुए मामले को रफा-दफा कर दिया गया। बच्ची के साथ-साथ इंसानियत, संवेदनाएं और कानून को डूबकर मरने की यह घटना कोतवाली थाना क्षेत्र के लालदरवाजा टीओपी के नजदीक बुधवार शाम करीब 4 बजे घटित हुई। मृत बच्ची की पहचान लालदरवाजा निवासी सुबोध कुमार यादव की तीन वर्षीय बच्ची परी कुमारी के रूप में की गई है, जो दोस्तों के साथ वहां खेलने गई थी।

निर्माण एजेंसी की ओर से 50 हजार रुपए नकद मिलने के बाद परिजन शव को लेकर चले गए और कई अनसुलझे सवालों के साथ मामला शांत हो गया। एप्रोच पथ का निर्माण एसपी सिंघल कंस्ट्रक्शन कंपनी करा रही है। जहां पिलर को पानी देने के उद्देश्य से 10 फीट गहरे गड्‌ढों में पानी भरकर रखा जाता है। इसी पानी में डूबने से बुधवार शाम परी की मौत हो गई।

गड्‌ढे में बच्ची ही नहीं, इंसानियत, संवेदनाएं और कानून भी डूबकर मरे

निर्माण स्थल पर पानी स्टोर करने के लिए इस तरह बनाया गया है गड्‌ढा, जिसकी कोई घेराबंदी नहीं है।
निर्माण स्थल पर पानी स्टोर करने के लिए इस तरह बनाया गया है गड्‌ढा, जिसकी कोई घेराबंदी नहीं है।

तत्काल 50 हजार नगद देकर हंगामा कराया शांत
निर्माण स्थल के आस-पास रिहायशी इलाका है। सुबोध का परिवार भी इसी मोहल्ले में रहता है। शाम करीब 4 बजे के परी अपनी उम्र के अन्य बच्चों के साथ खेलने के लिए गई थी। खेलकूद के दौरान ही वह पानी भरे गड्‌ढ़े में डूब गई। जिसके बाद उसके साथ खेलने वाले बच्चों ने मामले की जानकारी परिजनों को दी। सूचना पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग जुट गए और काफी मशक्कत के बाद बच्ची के शव को बाहर निकाला गया। गड्‌ढ़े से शव निकाले जाने के बाद ग्रामीणों का गुस्सा भड़क उठा। भीड़ ने हंगामा करते हुए थोड़ी देर के लिए काम को बंद करवा दिया गया। जिसके बाद परिजनों को कंपनी द्वारा बतौर मुआवजा देकर मुंह बंद करवा दिया गया। मृतक बच्ची दो बहनों व एक भाई में दूसरे स्थान पर थी। उसके पिता बिजली का प्राईवेट काम करते हैं। घटना के बाद मृतक की मां टिंकू देवी का रो-रो कर बुरा हाल है।

अनसुलझी रह गई पहेली, न केस हुआ न ही पोस्टमार्टम
मृतक बच्ची की मौत एक अनसुलझी पहेली बन कर रह गई। न तो मामले में एफआईआर हुआ और न ही पोस्टमार्टम ही हुई। मुआवजा लेकर परिजन बच्ची को गंगा किनारे मिट्‌टी में दफना दिया। ज्ञात हो कि वर्किंग साइट पर लोगों का आना-जाना बहुत कम होता है। पोस्टमार्टम होता तो परी की मौत की सही वजह भी सामने आती, जो नहीं आ सकी।

मानकों का अभाव, पहले भी पैसा दे दबाए मामले
एप्रोच पथ के निर्माण कार्य करवा रही एसपी सिंघल कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जाता है। साइट पर सुरक्षा गार्डों की कमी है वहीं अपने कार्य क्षेत्र की घेराबंदी तक नहीं की गई है। जिस गड्‌ढे में डूबकर बच्ची मरी वैसे दस से अधिक गड्‌ढे अभी भी साइट पर खुले हैं जिसमें पानी भर कर रखा जाता है। जिससे पिलर निर्माण के दौरान पानी लेकर कार्य किया जाता है। वहीं इस तरह के खुले गड्‌ढे होने के कारण अक्सर दुर्घटना होती रहती है। जिसे पैसे देकर दबा दिया जाता है। मामले में प्रोजेक्ट इंचार्ज संजय कुमार ने कहा कि जो लिखना है लिखो, मैं कुछ नहीं बोलूंगा।

गलती पब्लिक की ही, आवेदन नहीं मिला, आपस में सुलझाया
आपस में मिलकर लोगों में मामले को सेटेल कर दिया है। जानकारी हुई तो घटनास्थल पर पहुंचा। गलती पब्लिक की ही थी। क्षेत्र को घेर के रखा जाता है फिर भी लोग चले जाते हैं। रेल पटरी पर लोग चलेंगे तो मरेंगे ही। परिजनों द्वारा सेटेलमेंट कर मामले को रफा-दफा कर दिया गया है। अबतक कोई आवेदन नहीं दिया गया।
-कौशल, लाल दरवाजा टीओपी अध्यक्ष

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