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मृत्यु पर गम बांटिए..:मृत्यु भोज पर रोक के अभियान को समाज के हर तबके का मिला समर्थन भोज के बदले प्रियजन की स्मृति में समाज कल्याण में खर्च करनेे की मांग

मुंगेर10 महीने पहले
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  • सामाजिक बदलाव के लिए दैनिक भास्कर की समाज के साथ एक पहल
  • जिले भर से 150 के करीब वाट्स एप प्रतिक्रियाएं, 525 संदेश तथा 500 फोन कॉल आए
  • पुरोहितों, बुद्धिजीवियों ने माना कि मृत्यु भोज का कोई धार्मिक आधार नहीं, शास्त्रों के 16 कर्मकांडों में नहीं है कोई वर्णन

मृत्यु भोज बंद किए जाने के उद्देश्य से शुरू हुए दैनिक भास्कर के साप्ताहिक अभियान मृत्यु पर गम बांटिए... को बीते सातों दिन मुंगेर के हर तबके का समर्थन मिला। विभिन्न समाज के साथ-साथ आम लोग और प्रबुद्ध जनों ने भी इस अभियान को सही मानते हुए स्वीकार किया कि मृत्यु भोज बंद होना चाहिए। लिखित और मौखिक तौर पर सामने आई तथ्यपरक और तार्किक बातों में मृत्यु भोज को सामाजिक बेड़ी मानते हुए पं. मनोज मिश्र, नंदन बाबा, डा. सुदर्शन, संजीव कुमार, वासुदेव पुरी, विजय शर्मा, शशांक रंजन, मधुलिका भारती, प्रणय मिश्र आदि जैसे आध्यात्मिक चिंतकों, युग पुरोहितों, बुद्धिजीवियों ने माना कि इसका काेई धार्मिक आधार नहीं है।  शास्त्रों के 16 कर्मकांडों में इसका कोई वर्णन नहीं है। यह पूरी तरह से औचित्यहीन और अवैज्ञानिक प्रथा है। प्राचार्य चंदन माइकल का कहना था कि बहुव्यंजनों से सजी थालियां मृतकों की आत्मा को शांति पहुंचाने का कार्य नहीं कर सकती है। वहीं कमल लाल के अनुसार, भोज खुशी का आहार है, इसे दुख की घड़ी में खिलाया जाना सर्वथा अनुचित है।

भास्कर का ये अभियान सामाजिक बदलाव का क्रांतिकारी कदम
पत्रकारिता का उद्देश्य जरूरी सामाजिक बदलाव के लिए क्रांतिकारी कदम उठाया जाना होना चाहिए। दैनिक भास्कर ने पोर्न साइट्स पर प्रतिबंध जैसी सामाजिक विकृति सहित मृत्यु भोज जैसे अमानवीय प्रथा पर रोक के लिए सामाजिक पहल कर अपना पत्रकारिता धर्म निभाया है। मृत्यु भोज अंधविश्वास की पराकाष्ठा है। 
कपिल कुमार मंडल, विज्ञान प्राध्यापक

इस अभियान का अवश्य आएगा बेहतर परिणाम
गायत्री शक्तिपीठ के ट्रस्टी मूलचंद मंडल ने कहा कि मैंने अपने पिता हरिनंदन मंडल और मां कौशल्या देवी के दिवंगत होने पर श्रेष्ठ साहित्य वितरण और स्मृतिस्वरूप पौधरोपण किया। दैनिक भास्कर जैसे प्रतिष्ठित अखबार के द्वारा चलाए गए इस सामाजिक पहल के अच्छे परिणाम सामने आएंगे। 
मूलचंद मंडल, ट्रस्टी, गायत्री शक्तिपीठ

लोगों ने मृत्यु भोज नहीं करने का लिया संकल्प
मृत्यु भोज की खातिर तीन लाख रुपए के बैंकों के कर्ज में डूबे तथा अपनी खेती की जमीन सुदभरना में रखे युवा उत्तम सिंह, भरत कुमार, संजीव मिश्र, प्रमोद पासवान आदि ने इसे अमानुषिक व सड़े-गले सामाजिक रिवाज करार देते हुए भविष्य में मृत्यु भोज ना करने का संकल्प लिया।

पौधरोपण, पुस्तकदान सहित कई सुझाव आए
इस मुहिम के दौरान कुछ लोगों की संघर्ष गाथा भी सामने आई। अलगाव की पीड़ा को सहकर भी मृत्यु भोज से ना सिर्फ परहेज किया, बल्कि सैंकड़ों पेड़ लगवाए लगाए। भोज के बदले फ्री कोचिंग सेन्टर चलाने, पुस्तक दान सहित गरीबों की मदद किए जाने के उदाहण और सुझाव सामने आए। 

525 सहमति संदेश कई प्रतिक्रियाएं मिली
सप्ताह भर चले इस पहल के दौरान दैनिक भास्कर को जिले भर से 150 के करीब वाट्स एप प्रतिक्रियाएं, 525 सहमति संदेश तथा 500 के आसपास फोन कॉल समर्थन व सहमतिस्वरूप प्राप्त हुए। इस बीच मृत्यु भोज के पक्ष में भी दो लोगों ने फोन कर अपनी प्रतिक्रिया दी।  

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