लापरवाही का आरोप:निजी क्लीनिक में इलाज के बाद घर पहुंचते बच्चे की मौत

मुंगेर19 दिन पहले
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बच्चे की लाश को गोद में लिए रोते-बिलखते परिजन। - Dainik Bhaskar
बच्चे की लाश को गोद में लिए रोते-बिलखते परिजन।
  • पेट दर्द की शिकायत पर इलाज कराने पहुंचे थे परिजन, डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप

सुतुरखाना में संचालित निजी क्लीनिक में शुक्रवार सुबह 9 बजे पेट दर्द की शिकायत लेकर हरदियाबाद निवासी 8 वर्षीय राजेश का इलाज कराने परिजन पहुंचे थे। जहां डॉक्टर ने सुई लगाकर अल्ट्रासाउंड का प्रेशक्रिप्शन लिख घर भेज दिया। घर पहुंचने के बाद अपराह्न बच्चे की तबियत बिगड़ने लगी। इसके बाद परिजन बच्चे को लेकर सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड पहुंचे। जहां ड‍्यूटी पर तैनात चिकित्सक ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया। इसपर परिजनों ने निजी क्लीनिक के डाक्टर पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हो हल्ला करने लगे। मामले की सूचना पर मुफ्फसिल थाना की पुलिस सदर अस्पताल पहुंची और परिजन से मामले की जानकारी ली। मुफ्फसिल थानाध्यक्ष राजेश कुमार सिंहा ने बताया कि मृत बच्चे के परिजनों ने इस संबंध में किसी प्रकार का लिखित आवेदन नहीं दिया है। हरदियाबाद निवासी रमेश गुप्ता शुक्रवार की सुबह 9 बजे 8 वर्षीय पुत्र राजेश को पेट दर्द की शिकायत लेकर इलाज कराने सुतुरखाना में संचालित निजी क्लीनिक पहुंचे थे। जहां डाक्टर ने जांच के बाद परिजन को अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह देते हुए एनाफोटन सुई लगाया और कुछ दवा लिख कर बच्चे को घर भेज दिया। रमेश ने बताया कि दोपहर बाद घर पर बच्चे की तबीयत बिगड़ने लगी और बच्चे का हाथ-पैर खींचने लगा। इसके बाद बच्चे को लेकर सदर अस्पताल पहुंचे थे।

अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट मिलने पर पता चलेगा कारण
पिता का कहना था कि निजी क्लीनिक में ही जब डॉक्टर ने सुई लगाया था तभी से उसकी तबीयत बिगड़ने लगी थी, बावजूद हमलोगों को घर भेज दिया। अगर निजी चिकित्सक ने लापरवाही नहीं बरती होती तो हमारा बेटा जिंदा रहता। बच्चे का इलाज करने वाले डॉक्टर ने बताया कि बच्चा तीन चार दिन से पेट दर्द की शिकायत से पीड़ित था। जिसका इलाज पहले गांव के डॉक्टरों से करा रहे थे। बच्चे की मौत कैसे हुई, बच्चे में क्या बीमारी थी, बिना अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट आने पर बता सकेंगे।

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