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  • Did Not Go Home For Last 30 Days, Stay In The Crematorium Said Food Forget The Fear Of Infection And Burn 100 Corona Patients In 15 Days

कहानी उन जाबांजों की:पिछले 30 दिनों से घर नहीं गए, श्मशान में ही हो रहा रहना-खाना बोले- संक्रमण का डर भूल 15 दिनों में 100 कोरोना मरीजों को जलाया

मुंगेर6 महीने पहले
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अग्निपथ जैसा कत्तर्व्यपथ: विद्युत शवदाह गृह में बुधवार को कोरोना मृतक के शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाते पप्पू मल्लिक और राम मल्लिक। - Dainik Bhaskar
अग्निपथ जैसा कत्तर्व्यपथ: विद्युत शवदाह गृह में बुधवार को कोरोना मृतक के शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाते पप्पू मल्लिक और राम मल्लिक।
  • जो दिन-रात कोरोना केे साथ हैं...

कोरोना के इस भयावह काल में हर कोई अपने-अपने घरों से बाहर निकलने से पहले दस बार सोचता है। किसी संक्रमित के बारे में जानकारी मिलते ही उससे दूरी बना लेता है। लेकिन इसके बाद भी इस महामारी से युद्ध में कई योद्धा दिन-रात डटे है। मुंगेर के विद्युत शवदाह के पांच कर्मी भी ऐसे ही कोरोना योद्धा हैं, जो शवदाह गृह से मात्र एक किलोमीटर दूर घर रहने के बाद भी बीते 30 दिनों से अपने परिवार से नहीं मिल रहे हैं।

इन लोगों का रहना-खाना शवदाहगृह में ही रो रहा है। शवदाह गृह में ड्यूटी पर तैनात पप्पू मल्लिक और राम मल्लिक ने बताया कि यहां कुल पांच लोग हैं, जो अलग-अलग शिफ्ट में काम करते हैं। बीते एक महीने से हम पांचों का यहीं रहना हो रहा है। कोरोना संक्रमण के डर को भूलकर बीते 15 दिनों में करीब 100 कोरोना मरीजों का हमलोगों ने दाह-संस्कार किया होगा।

कोरोना के शव जलाने के बाद हरबार करते स्नान
पप्पू और राम ने बताया कि कोरोना मृतकों को जलाने के बाद हमलोगों को अपना शरीर सैनिटाइज करने के लिए कोई मशीन नहीं दी गई है। जितनी बार कोरोना शव जलाते हैं उतनी बार स्नान करना पड़ता हैं। बताया कि बबलू और गोपाल सरकारी कर्मी है, जिनका मासिक वेतन 24 हजार है। दिलीप और पप्पू दैनिक मजदूर हैं। उन्हेंं 7 हजार मासिक मिलता है। राम एनजीओ से हैं उन्हें 5 हजार मासिक मिलता है।

सरकारी स्तर ने नहीं मिला है पीपीई, गलव्स, मास्क
इन लोगों ने बताया कि सरकारी स्तर पर हमलोग को पीपीई किट, सैनिटाइजर, ग्लव्स, मास्क कुछ भी नहीं मिलता है। मृतक के परिजनों द्वारा दिया गया सुरक्षा किट पहनकर हमलोग शव का अंतिम संस्कार करते हैं। एक महीने पहले यहां रोज मात्र 4 से 5 लोग अंतिम संस्कार करने के लिए आते है। अभी हमलोग 15 दिनों में एक सौ से अधिक कोरोना मरीजों को जला चुके हैं। अभी यहां सिर्फ कोरोना शव का ही अंतिम संस्कार होता है।

शव जलाते समय आग की धधक से जलते लगता बदन
उन्होंने बताया कि हमलोगों को एक तो सोने का समय नहीं मिलता है अगर सोते भी हैं तो नींद में शव जलाने के सपने आते है। शव जलाने के वक्त टेम्प्रेचर अधिक रहने के कारण एवं आग की धधक से हमलोग पक जाते हैं। वहां रहने की इच्छा तक नहीं होती। जबतक एक शव पूरी तरह से जलती नहीं कि तबतक दूसरी बॉडी आ जाती है।

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