भागवतकथा का आयोजन:माता-पिता को सद्गति दिलाना हर पुत्र का कर्तव्य : कैलाश राधा शरण

मुंगेर2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
भागवत कथा के सुनती महिला श्रद्धालु। - Dainik Bhaskar
भागवत कथा के सुनती महिला श्रद्धालु।
  • इंदरुख पूर्वी ठाकुरबाड़ी में आयोजित हो रही भागवतकथा

जमालपुर प्रखंड के इंदरुख पूर्वी ठाकुरबाड़ी में चल रहे सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ कथा स्थल पर कथा श्रवण करने पहुंची। जिसमें महिला श्रद्धालुओं की बड़ी उपस्थित देखी गई। कथा के तीसरे दिन कथावाचक ब्रज रसिक कैलाश राधा शरण जी महाराज ने श्रद्धालुओं को कपिल आख्यान की कथा सुनाई। इस क्रम में कैलाश राधा शरण जी महाराज ने भगवान के 24 रूपों का वर्णन करते हुए कहा कि कपिल मुनी भी भगवान के 24 अंशों में एक थे। उनकी मां देहूती थी। उन्होंने अपनी मां के सद्गति के लिए उन्हें ज्ञान दिया। जिससे देहूति का संसार से मोहभंग हो गया तथा वह आत्मज्ञान प्राप्त करने के बाद मोक्ष प्राप्ति के लिए गृह त्याग कर दी। उन्होंने कहा कि माता-पिता को सद्गति दिलाना हर पुत्र का कर्तव्य होता है। इसके बाद उन्होंने सुकदेव जी तथा राजा परीक्षित संवाद की चर्चा करते हुए कहा कि महाभारत की कथा से ही श्रीमद्भावगत की कथा का उदय हुआ है। सुकदेव जी ने राजा परीक्षित के श्रीकृष्ण के प्रति रुची को देखते हुए उन्हें श्रीकृष्ण की कथा विस्तार से कही। मौके पर अमित कुमार सहित सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद थे।

खबरें और भी हैं...