लापरवाही का आरोप:अगर प्रसूता को सेंट्रल लाइन लगाया जाता तो बच सकती थी जान : स्पेशलिस्ट सर्जन

मुंगेरएक महीने पहले
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अस्तपाल में आईसीयू में मरीज को लगा सेन्ट्रल लाइन। - Dainik Bhaskar
अस्तपाल में आईसीयू में मरीज को लगा सेन्ट्रल लाइन।
  • क्रिटिकल मरीज को सेंट्रल लाइन लगाने के लिए आवश्यक है आईसीयू

कुशवाहा मार्केट स्थित नर्सिंग होम जीवन ज्योति हॉस्पीटल में अगर सोमवार की सुबह सीजेरियन ऑपरेशन के दौरान नवजात के जन्म के दौरान यूटेरस रैप्चर होने के कारण अत्यधिक रक्तस्त्राव के कारण प्रसव पीड़ित महिला की मौत के बाद परिजनों ने चिकित्सक पर लापरवाही का आरोप लगाया था। परिजनों का कहना था कि बिना आईसीयू व वेंटीलेटर की व्यवस्था के गंभीर स्थिति में मरीज का आपरेशन किए जाने और स्थिति बिगड़ने पर हायर सेंटर रेफर कर दिए जाने के कारण महिला की जान चली गई। इस बावत भास्कर ने शहर में संचालित निजी नर्सिग होम के एक प्रसिद्ध सर्जन डा. अमित कुमार से बातचीत की। उनका कहना था कि सर्जरी के दौरान कभी कभी ऐसी परिस्थिति आती है। जब किसी विषम परिस्थिति से गुजरना पड़ता है। प्राय: कोई डाक्टर अमूमन गलती नही करना चाहता है। लेकिन समय रहते परिस्थिति को हैंडिल करने पर मरीज की जान बचाई जा सकती है। उन्होंने बताया कि सीजेरियन के बाद लोअर एबडोमेन साइड ब्लड क्लॉट होने के कारण अत्यधिक रक्तस्त्राव हाेता है और मरीज की स्थिति गंभीर होने लगती है। बीपी अत्यधिक लो के साथ पल्स रेट कम और हीमोग्लोबिन लगातार होने लगता है। ऐसे में मरीज को आईसीयू में शिफ्ट कर तुरंत जुगलर वैन में सेंट्रल लाइन लगा कर ट्रैक्शन डायथर्मी विधि से डायग्नोस्टिक लेप्रोटॉमी (दुबारा मरीज का पेट खोलकर) ट्रैक्शन डायथर्मी से हीमो-स्टैसिस कर यह सुनिश्चित करना चाहिए।

जीवन ज्योति हॉस्पिटल में आईसीयू नहीं है
बता दें कि जीवन ज्योति हॉस्पिटल में महिला सर्जन डा. सुनंदा ने 26 वर्षीय महिला रेशमी कुमारी का आपरेशन कर दिया। आपरेशन के दौरान मेल बेबी का जन्म लेने के बाद यूटेरस रैप्चर पाए जाने के बावजूद चीरा लगाए गए स्थान काे स्टीच कर दिया गया था। इसके बाद महिला का पेट लगातार फूलने लगा था और स्थिति काफी खराब होने के बाद सुबह 3 बजे उसे हायर सेंटर रेफर किया गया था। संबंधित नर्सिंग होम में आईसीयू की व्यवस्था नहीं रहने के कारण महिला की मौत हो गई थी।

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