रोज 1000 लीटर ऑक्सीजन बनाकर उड़ा देता है सदर अस्पताल:बेडों तक नहीं पहुंची पाइपलाइन, मशीन खराब न हो इसलिए ऐसा करना जरूरी

मुंगेर6 महीने पहले
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मुंगेर के मरीजों की सुविधा के लिए सदर अस्पताल में लाखों रुपए खर्च ऑक्सीजन प्लांट बनाया गया। पाइप लाइन का काम पूरा नहीं होने के कारण मरीजों को इसका कोई फायदा नहीं मिल रहा है। लगातार बंद रहने के कारण कहीं ऑक्सीजन प्लांट खराब ना हो जाए, इसलिए रोज दो घंटे यूं ही ऑक्सीजन का प्रोडक्शन कर उसे बर्बाद कर दिया जाता है।

लगभग दो माह पूर्व स्वास्थ्य विभाग ने ऑक्सीजन प्लांट का उद्घाटन किया था। वो अब एक शो पीस बनकर रह गई है। अस्पताल प्रशासन अब भी मरीजों को ऑक्सीजन उपलब्ध कराने के लिए सिलेंडर पर पानी की तरह पैसे बहा रही है। जबकि सिर्फ वार्ड की पाइप लाइन को सिर्फ मेन ऑक्सीजन प्लांट के पाइप से जोड़ना है। इसमें भी अस्पताल प्रशासन को लगभग 2 महीने से ज्यादा का समय लग रहा है।

अस्पताल प्रबंधक बोले- इंजीनियर नहीं कर पा रहे काम
इस संबंध में अस्पताल प्रबंधक मोहम्मद तौसिफ हसनैन ने बताया कि बिहार मेडिकल सर्विसेज इंफ्रास्ट्रक्चर कोर्पेोरेशन लिमिटेड के द्वारा ऑक्सीजन प्लांट से वार्ड की पाइपलाइन में कनेक्शन किया जाना है। लेकिन कई पत्र लिखने के बाद भी उनके इंजीनियर यह काम नहीं कर पा रहे हैं। 2 महीने का समय हो गया है।

उन्होंने स्वीकार किया कि प्रतिदिन 2 घंटे मेंटेनेंस के लिए मशीन को चलाया जाता है। इसमें 1 घंटे तक ऑक्सीजन प्यूरीफायर बनने में लगता है। इसके बाद के 1 घंटे में लगभग 1000 लीटर ऑक्सीजन तैयार होती है। अगले दिन उस ऑक्सीजन को खुली हवा में छोड़ दिया जाता है। उन्होंने कहा कि इस बारे में आगे विशेष जानकारी सिविल सर्जन ही दे सकते हैं।

15 दिनों में पाइपलाइन का कार्य पूरा करने का था दावा, बीत रहा दूसरा महीना
ऑक्सीजन प्लांट के उद्घाटन के बाद दावा किया गया था कि 15 दिनों के अंदर बची हुई पाइप लाइन का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। अब दूसरा महीना बीत रहा है, पाइपलाइन का कार्य अब तक यथावत है।

मालूम हो कि ऑक्सीजन प्लांट कुल 100 बेडों तक ऑक्सीजन पाइपलाइन का कनेक्शन कर हर बेड पर पाइंट लगाना है। एजेंसी द्वारा महिला और चाइल्ड वार्ड में पाइप लाइन बिछा दी गई है, जबकि पुरूष वार्ड में पाइप लाइन बिछाने का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। वहीं इसके अलावा इमरजेंसी वार्ड, प्रसव केंद्र, ऑपरेशन कक्ष, वृद्धा वार्ड और आईसीयू में पाइप लाइन बिछाई जा रही है।

सभी बेड पर पाइप लाइन पहुंचाने और पाइंट लगाने के बाद इसका कनेक्शन मेन ऑक्सीजन प्लांट से किया जाएगा। यहां एक मेनफॉल्ट रूम बनाया जाएगा। इसका काम इमरजेंसी के समय होगा, जब किसी तकनीकी कारण से ऑक्सीजन प्लांट में कोई परेशानी आएगी। तो इस मेनफॉल्ट रूम में रखे 2000 लीटर क्षमता वाले दो जंबो ऑक्सीजन सिलेंडर से पाइपलाइन द्वारा सभी बेडों तक ऑक्सीजन सप्लाई किया जाना है।

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