भूकंप दिवस पर विशेष:आज ही के दिन 1934 में भूकंप से नेस्तनाबूद हुआ था मुंगेर

चेतन कुमार झा |मुंगेर10 दिन पहले
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1934 में आई भूकंप के बाद मलवे में तब्दील हुआ शहर व शहर में फैले मलवे को साफ करने के लिए कुदाल उठाई नेहरू जी। - Dainik Bhaskar
1934 में आई भूकंप के बाद मलवे में तब्दील हुआ शहर व शहर में फैले मलवे को साफ करने के लिए कुदाल उठाई नेहरू जी।
  • भूकंप में मारे गए लोगों की याद में हर साल आज के दिन बंद रहती हैं दुकानें, होता है हवन व श्रद्धांजलि सभा

वर्ष 1934 के विनाशकारी भूकंप में आज के दिन ही मुंगेर ध्वस्त हो गया था। 88 साल बाद आज भी विनाशकारी भूकंप को याद कर शहरवासी सिहर उठते हैं। भूकंप की त्रासदी ने उस समय 1434 लोगों की जिंदगी को खामोश कर दिया था। भूकंप की खबर सुनकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, डा. राजेंद्र प्रसाद, खान अब्दुल गफ्फार खान सहित कांग्रेस के कई बड़े नेता का राष्ट्रीय अधिवेशन को स्थगित कर मुंगेर पहुंचे थे। उनके साथ कोई शीर्ष नेता भी एक साथ मलबा हटाने के लिए टोकरी कुदाल लेकर राहत कार्य में आम जनता के साथ लगे थे। तब से लेकर आज तक शहर के लोग 15 जनवरी को शोक दिवस के रूप में मनाते हैं। शोक दिवस के मौके पर हर साल 15 जनवरी को शहर की सभी दुकानें बंद रहती है। भूकंप में मारे गए लोगों की याद में बेकापुर किराना पट्टी स्थित विजय चौक पर प्रत्येक वर्ष हवन एवं श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया जाता है। कार्यक्रम के बाद दरिद्र नारायण भोज का आयोजन भी किया जाता है। इस बार भूकंप दिवस समिति के द्वारा निर्णय लिया गया कि इस बार भूकंप दिवस पर कोविड-19 के कारण शंति यज्ञ एवं नारायण भोज स्थगित कर दिया गया है। समिति की ओर से कोराेना गाइडलाइन का पालन करते हुए मात्र 20 सदस्यों के द्वारा, मृत आत्मा की शांति के लिए शोक सभा का आयोजन किया जाएगा। बाकी अन्य कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया है।

चंडीगढ़ के तर्ज पर फिर से बसाया गया अपना मुंगेर
1934 के भूकंप के बाद जामिनी बाबू एवं उनके सहायक हरि सिंह मुंगेर आए थे। उन्होंने ही चंडीगढ़ की तर्ज पर मुंगेर को नए सिरे से बसाने के लिए नक्शा बनाया था। जिसके बाद मुंगेर शहर को मास्टर प्लान के तहत बसाया गया। सभी सड़कें एक दूसरे से लिंक होकर मुख्य सड़क से जोड़ी गई। सड़क के किनारे पैदल चलने के लिए फुटपाथ और पानी निकासी के लिए नाले बनाए गए। एक सुव्यवस्थित ड्रेनेज सिस्टम, ट्रैफिक सिस्टम और मकानों का निर्माण इस कतारबद्ध तरीके से किया गया कि पर्याप्त खुली जगह लोगों को मिले।

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