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  • Oxygen Level Was Reached 18, Remained On Ventilator For 18 Days, Became Healthy After 53 Days Of Treatment In Three Different Cities, Said Got New Life Due To Brothers

भैया तूने राखी के बंधन को निभाया:18 पहुंच गया था ऑक्सीजन लेवल, 18 दिन वेंटिलेटर पर रहीं, तीन अलग-अलग शहरों में चले 53 दिनों के इलाज के बाद हुईं स्वस्थ, बोलीं- भाइयों की वजह से मिली नई जिंदगी

चैतन्य| हवेली खड़गपुर9 दिन पहले
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अपने दोनों भाई रजनीश और राकेश के साथ रिंकू सिंह। - Dainik Bhaskar
अपने दोनों भाई रजनीश और राकेश के साथ रिंकू सिंह।
  • जिंदगी को नई उम्मीद देने वाली कहानी : माधोपुर की रिंकू ने भाइयों के दम पर कोरोना को हराया
  • मुंगेर, भागलपुर के मेडिकल कॉलेज और फिर पटना एम्स में चला इलाज, डॉक्टर तक भगवान भरोसे छोड़ चुके थे रिंकू की किस्मत

रक्षाबंधन त्योहार में अभी ढाई महीने का वक्त बाकी है। लेकिन इससे पहले भाई-बहन के अटूट प्रेम और समर्पण की एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो इस पवित्र रिश्ते की मर्यादा को और मजबूत करती है। असरंगज प्रखंड के छोटे से गांव माधोपुर की रहने वाली 48 वर्षीय रिंकू सिंह 53 दिनों बाद कोरोना को हराकर स्वस्थ हुई हैं। वो शायद सबसे ज्यादा दिनों तक कोरोना का दंश झेलने वाली मरीज है। इन 53 दिनों में उनका इलाज मुंगेर, भागलपुर और पटना में चला। उम्रदराज होने के कारण पति सतीश सिंह चाहकर भी पत्नी का समुचित ख्याल रख पाने में असर्मथ थे। ऐसे में बांका के रमचुआ गांव निवासी रिंकू के भाई रजनीश और राकेश हरकदम पर उनके साथ रहे। रिंकू अब कोरोना को मात देकर अपने मायके में भाइयों के साथ रह रही हैं। वो कहती है कि भाइयों की वजह से मुझे नई जिंदगी मिली है।

सांस लेने में परेशानी पर 5 अप्रैल को मायागंज लाई गई थी रिंकू सिंह

रिंकू के पति असरगंज निवासी सतीश प्रसाद सिंह कहलगांव के एक निजी फर्म में नौकरी करते हैं। उन्होंने बताया कि अप्रैल के पहले सप्ताह में रिंकू बुखार से ग्रसित हुई। फिर उन्हें सांस लेने में दिक्कत शुरू हुई। ज्यादा परेशानी पर 5 अप्रैल को उन्हें लेकर जेएलएनएमसीएच भागलपुर लेकर पहुंचा, जहां एंटीजन टेस्ट में वो पॉजिटिव पर आरटीपीसीआर में निगेटिव आई। इलाज के दौरान मायागंज में उनका ऑक्सीजन लेवल लगातार गिर रहा था। इसी बीच रमचुआ से मेरा साला रजनीश बहन की देखभाल के लिए मायागंज आ गया।

बेहद कमजोर हो गई हैं रिंकू, मायके में भाई रख रहे ख्याल| एम्स के डॉ. मुकेश रिंकू की इलाज में जुटे रहे। लगातार इलाज और ईश्वर की कृपा से 40 दिन बाद रिंकू खुद से सांस ले सकी। 53 दिनों के बाद उन्हें 29 मई को अस्पताल से छुट्टी मिली। अभी रिंकू बेहद कमजोर हैं, वो अपने भाईयों के देखरेख में मायके में हैं।

मायागंज के वार्ड में देखरेख करने वाला तक कोई नहीं था: रजनीश

रजनीश ने बताया कि भागलपुर में भी बहन की स्थिति सुधर नहीं रही थी। ऑक्सीजन लेवल गिरते हुए 40 तक पहुंच गया। शुरुआती दिनों में हिचकिचाने के बाद मैं खुद वार्ड में गया तो देखा कि ऑक्सीजन मास्क भी ठीक से नहीं लगा था। वो सांस के लिए हांफ रही थी। फिर मैं वार्ड में रहने लगा। खाने-पीने की दिक्कत हो रही थी। समय पर कोई स्टाफ भी नहीं मिल रहा था। फिर मैंने कोविड यूनिट के इंचार्ज डॉ. हेमशंकर शर्मा से बातचीत की तो उन्होंने बेहतर चिकित्सा के लिए पटना एम्स ले जाने की सलाह दी।

बहन की हालत जान दिल्ली से पटना पहुंचे बड़े भाई राकेश, बेटी पीपीई किट में वार्ड पहुंचीं

रजनीश ने बताया कि भागलपुर से रेफर किए जाने के बाद मैंने सुप्रीम कोर्ट दिल्ली में प्रैक्टिस कर रहे बड़े भाई राकेश को सूचना दी। बहन की बिगड़ती स्थिति देख राकेश पटना पहुंचे। फिर चचेरे भाई की मदद से पटना एम्स में बहन के लिए जगह मिली। 10 अप्रैल को हमलोग बहन को लेकर पटना पहुंचे। एम्स में भी उनकी स्थिति लगातार बिगड़ती रही। इस बीच मेरा भांजा प्रशांत भी मां को देखने आया। एम्स में बहन का ऑक्सीजन लेवल 18 तक पहुंच गया। उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। डॉक्टर तक बहन की किस्मत को भगवान पर छोड़ चुके थे। पटना एम्स में रिंकू को देखने के लिए उनकी बेटी दीपशिखा अपनी दूधमुंही बच्ची को रिश्तेदार के यहां छोड़कर पीपीई किट पहनकर वार्ड तक में पहुंची थी।

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