कार्यक्रम:डंगरा गांव में पारंपरिक उत्साह के साथ सोहराय पर्व मना रहे आदिवासी

संग्रामपुर8 दिन पहले
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सोहराय पर्व के दौरान पारंपरिक नृत्य करतीं आदिवासी महिलाएं। - Dainik Bhaskar
सोहराय पर्व के दौरान पारंपरिक नृत्य करतीं आदिवासी महिलाएं।
  • सोहराय पर्व में पांच दिनों तक अलग-अलग तरीके से होती है पूजा

सोहराय पर्व को आदिवासी समाज के लोग आज भी निष्ठा पूर्वक विधि विधान से मना रहे है। यह पर्व लगातार 5 दिनों तक चलने वाला सोहराय पर्व को लेकर धपरी और डंगरा गांव में खुशी का माहोल देखा जा रहा है। प्रखंड के आदिवासी बहुल्य गांव में सोहराय पर्व को लेकर उत्सवी माहौल है। शुक्रवार को कटियारी पंचायत के धपरी और डंगरा गांव के लोगों ने पारंपरिक नाच गान के साथ सोहराय पर्व मनाया लोगों ने अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग टोली बनाकर पारंपरिक वेशभूषा पहनकर नृत्य में मशगूल रहे।  पर्व का यह तीसरा दिन था। 5 दिनों तक चलने वाले इन त्योहार में हर दिन अलग-अलग विधि विधान अनुसार समुदाय के लोगों के द्वारा पुजा अनुष्ठान की जाति है। सोहराय को लेकर आदिवासी बहुल्य गांव में धार्मिक वातावरण बना हुआ है, यह पर्व 16 जनवरी तक लगातार चलते रहता है। आदिवासी के मांझीबाबा नवलकिशोर बांस्की कहते है कि 5 दिनों तक अलग-अलग कार्यक्रम होता है, आज घर हर में अच्छा अच्छा भोजन बनता है, और अपने अपने दोस्तो को आमंत्रित कर उन्हें पका हुआ भोजन कराते है। इस सांस्कृतिक कार्यक्रम में महिला और पुरुष दोनों एक साथ मनाते है। इस सांस्कृतिक कार्यक्रम में सुनीता देवी,सीता देवी, फुरकी देवी, पुतुल टुडू, रानी टुडू, लालका टुडू, बाबू लाल हासदा, चुनकेश्वर हेम्ब्रम, मुनेश्वर मुर्मू, बुलबुल हांसदा, तानेश्वर सोरेन, राजू बेसरा आदि शामिल थे।

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