भास्कर फॉलोअप:ये कैसी जांच, जो पूरी ही नहीं हो रही

मुंगेर| संतोष सहाय, समीर सिन्हा2 वर्ष पहले
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अनुराग की फाईल फोटो। - Dainik Bhaskar
अनुराग की फाईल फोटो।
  • 85 दिन बाद भी विजयादशमी गोलीकांड से नहीं उठा पर्दा, गवाह को झूठे मुकदमे में फंसा रही पुलिस
  • भास्कर सवाल: क्या आरोपियों को बचाने के लिए न्याय का गला घोंटा जा रहा है
  • गोलीबारी में जख्मी और गवाह सुमित की मां संगीता देवी बोलीं-बयान लेने के लिए बेटे को बुलाया, बाद में जमालपुर पुलिस ने शराब के साथ उसकी गिरफ्तारी दिखाई, मेरे भाई व नालसी वाद में गवाह सीटू पर भागने का लगाया आरोप

26 अक्टूबर 2020 को दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के समय हुई गोलीकांड और लाठीचार्ज मामले की जांच अभी तक पूरी नहीं हुई है। जांच कहां तक पहुंची है, इस बारे में भी कोई जिम्मेदार अधिकारी कुछ नहीं बोल रहे हैं। गोलीकांड में जान गंवाने वाले अनुराग पोद्धार के परिजन के साथ-साथ शहरवासियों का कहना है कि जांच के मामले में बस लीपापोती की जा रही है। दोषियों को बचाने की कोशिश जारी है। घटना के बाद चुनाव आयोग के निर्देश पर हटाई गई तत्कालीन एसपी लिपि सिंह को सहरसा का एसपी बना दिया गया है। तत्कालीन डीएम राजेश मीणा को सहकारिता विभाग में निबंधक बनाया जा चुका है। लाइन हाजिर हुए कासिम बाजार थानाध्यक्ष शैलेश कुमार को नवगछिया थाना में पदस्थापित कर दिया गया। मामले की जांच के लिए चुनाव आयोग ने मगध रेंज के कमिश्नर को मुंगेर भेजा था। जिन्हें सात दिनों में जांच रिपोर्ट देनी थी। निर्वाचन आयोग सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार उन्होंने अपना रिपोर्ट दे दिया है। साथ ही तत्कालीन डीआईजी मनु महाराज में मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया था। एसआईटी की जांच के बारे में मुंगेर डीआईजी शफीउल हक ने कहा कि पुलिस टीम अभी वैज्ञानिक अनुसंधान के तहत घटना के वायरल वीडियो की जांच कर रही है। जिसके बाद ही घटना में दोषी को सिद्ध किया जा सकता है। उसके बाद मामले में कार्रवाई होगी।

सीआईएसफ की इंटरनल रिपोर्ट में फायरिंग की पुष्टि
घटना की रात तत्कालीन एसपी ने पुलिस द्वारा गोलीबारी से साफ इंकार किया था। लेकिन बाद में सीआईएसएफ की इंटरनल रिपोर्ट में पुलिस और सीआईएसएफ द्वारा फायरिंग की पुष्टि हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार 26 अक्टूबर की रात 11.20 बजे सीआईएसएफ के 20 जवानों की टुकड़ी सुरक्षा ड्यूटी स्थित जिला स्कूल के कैंप में भेजी गई थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि विसर्जन के दौरान स्थानीय पुलिस और श्रद्धालुओं के बीच विवाद शुरू हुआ और कुछ श्रद्धालुओं ने पुलिस और सुरक्षाबलों पर पथराव शुरू कर दिया। हालात को काबू में करने के लिए लोकल पुलिस ने पहले फायरिंग की। फिर सीआईएसएफ के कांस्टेबल ने 13 राउंंड फायरिंग की।

मगध आयुक्त की जांच रिपोर्ट को भी दबा दिया गया
चुनाव आयोग के निर्देश पर मगध के आयुक्त असंगमा चुआ आवो को सात दिन में जांच कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया था। जिसके बाद वो मुंगेर पहुंचे व स्थानीय लोगों के साथ जवानों व मौके पर दंडाधिकारियों से बातचीत कर आयोग को रिर्पोट दी। सूत्रों के अनुसार उन्होंने अपनी रिपोर्ट में तत्कालीन एसपी और डीएम को एक घंटे की देरी से पहुंचने का जिक्र किया है। हालांकि यह रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं हुई है। वहीं गोलीबारी में जख्मी सुमित की मां संगीता देवी ने कहा कि पुलिस ने बयान लेने के लिए बेटे को बुलाया, बाद में जमालपुर पुलिस ने शराब के साथ उसकी गिरफ्तारी दिखाई। साथ ही मेरे भाई और नालसी वाद मंे गवाह सीटू पर भागने का आरोप लगा दिया है।

गलत हस्ताक्षर लेकर केस बदला: अमरनाथ
गोलीकांड में मारे गए अनुराग के पिता अमरनाथ पोद्दार ने बताया की घटना के करीब तीन माह बीतने के बाद अब तक न तो उन्हें इंसाफ मिला और न ही कोई मुआवजा। उन्होंने वासुदेवपुर ओपी प्रभारी सुशील कुमार को नामजद अभियुक्त बनाया था। बावजूद पुलिस द्वारा पुत्र का शव दिए जाते समय उनका हस्ताक्षर गलत तरीके से लेकर अज्ञात के विरूद्ध मामला दर्ज कर दिया गया। जिसके विरूद्ध केस दर्ज करवाया है। मामले में सांसद, विधायक सह मुख्यमंत्री की चुप्पी भी लोगों को साल रही है।

पुत्र शोक में परिवार: घर के इकलौते चिराग अनुराग की मौत को परिजन अभी तक नहीं भूल पाए हैं।
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वीडियो की हो रही जांच

पुलिस टीम अभी वैज्ञानिक अनुसंधान के तहत घटना के वायरल वीडियो की जांच कर रही है। जिसके बाद ही घटनाक्रम के दोषियों पर आरोप सिद्ध किया जा सकेगा। इसके बाद मामले में कार्रवाई होगी।
शफीउल हक, डीआईजी

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