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हड़ताल:सदर से 110 मरीज बिना इलाज कराए लाैटे, मायागंज में सीनियराें ने नहीं लगाया राउंड

भागलपुरएक महीने पहले
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आईएमए ने डाॅक्टराें पर लगातार हाे रहे हमले काे लेकर शुक्रवार काे चार घंटे का हड़ताल रखी। सुबह 8.30 से दाेपहर 12.30 तक सदर अस्पताल व पीएचसी में डाॅक्टराें ने मरीजाें का इलाज नहीं किया। निजी क्लीनिक में भी इस अवधि में मरीजाें काे नहीं देखा। मेडिकल काॅलेज अस्पताल में भी सुबह की पाली में सीनियराें ने राउंड नहीं लगाया। जूनियराें ने ही मरीजाें का इलाज किया। जबकि सदर अस्पताल में 11 बजे तक मरीजाें का सिर्फ रजिस्ट्रेशन हुआ, इलाज नहीं किया। वहां 110 मरीज बिना इलाज कराए लाैट गए। मायागंज अस्पताल में दोपहर बाद इलाज व्यवस्था पटरी पर लाैटी।

सदर अस्पताल के ओपीडी में 11 बजे से शुरू हुआ इलाज
सदर अस्पताल का ओपीडी सामान्य दिनाें की तरह ही खुला रहा पर डॉक्टरों ने अघोषित रूप से इलाज बंद कर दिया। सुबह आठ बजे से लेकर दोपहर 11 बजे तक डॉक्टर ओपीडी में नहीं बैठे। 11 बजे तक 150 लोगों की भीड़ जमा हाे चुकी थी। लोग इलाज के लिए परेशान रहे। इसकी जानकारी जब सिविल सर्जन को हुई तो उन्हाेंने प्रभारी डाॅ. एके मंडल से बात की ताे 11 बजे के बाद डॉक्टरों ने ओपीडी में मरीजाें का इलाज शुरू किया। इसके बाद दोपहर बाद डेढ़ बजे तक ओपीडी में 150 मरीजों का इलाज हुआ। पुलिस भर्ती में शामिल होने वाले 90 अभ्यर्थियों का भी नेत्र जांच हुई। कुल 350 लोगों का रजिस्ट्रेशन पर 140 लोगों का ही ओपीडी में इलाज हुआ।

अल्ट्रासाउंड व सिटी स्कैन कराने के लिए मरीजों ने किया 4 घंटे इंतजार
सदर अस्पताल में उन मरीजाें काे सबसे ज्यादा दिक्कत हुई जाे दूसरे जिलाें से इलाज कराने आए थे। मायागंज का ओपीडी बंद रहने के कारण सदर अस्पताल ही लाेगाें का सहारा है। अल्ट्रासाउंड व सिटी स्कैन कराने वाले मरीजाें काे चार घंटे तक हड़ताल समाप्त हाेने का इंतजार करना पड़ा। क्लीनिकाें के डाॅक्टराें व कर्मचारियाें काे भी परेशानी हुई, क्याेंकि जिन्हाेंने एक दिन पहले रजिस्ट्रेशन करवा लिया था, उन्हें भी इंतजार करना पड़ा।

डाॅक्टराें के साथ मारपीट करने वालाें काे 10 साल की जेल की सजा हाे : आईएमए
डाॅक्टराें ने अाईएमए हाॅल में मीटिंग की और प्रदर्शन किया। संगठन के अध्यक्ष डाॅ. संदीप लाल ने कहा कि सरकार आईएमए की मांगाें पर ध्यान देते हुए सुरक्षा की व्यवस्था करे। साथ ही डाॅक्टराें के कार्यस्थल पर मारपीट करनेवालाें के खिलाफ 10 साल तक की सजा का प्रावधान किया जाए। इस माैके पर सचिव डाॅ. बसुंधरा लाल, वरिष्ठ डाॅ. एसएन झा, डाॅ. डीपी सिंह, डाॅ. एससी झा, डाॅ. साेमेन चटर्जी, डाॅ. राजीव लाल, डाॅ. संजय निराला, डाॅ. मनीष कुमार, डाॅ. राेमा यादव समेत अन्य माैजूद थे।

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