यह कैसी व्यवस्था:हर साल 14 कराेड़ टैक्स, फिर भी निगम में काेई काम ऑनलाइन नहीं

भागलपुरएक महीने पहलेलेखक: त्रिपुरारि
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जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, ट्रेड लाइसेंस व पानी कनेक्शन के लिए आवेदन तक ऑनलाइन नहीं भर पा रहे शहरवासी। - Dainik Bhaskar
जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, ट्रेड लाइसेंस व पानी कनेक्शन के लिए आवेदन तक ऑनलाइन नहीं भर पा रहे शहरवासी।

भागलपुर स्मार्ट सिटी में जरूर शामिल हाे गया है। लेकिन नगर निगम अब तक स्मार्ट नहीं हाे पाया है। सरकार पेपरलेस काम काे तवज्जाे दे रही है, लेकिन नगर निगम का अब तक एक भी काम ऑनलाइन नहीं हाे पाया है। छाेटे-से छाेटे काम के लिए लाेगाें काे निगम के दफ्तर में आना पड़ता है। निगम काे हाेल्डिंग टैक्स, पानी का कनेक्शन फीस, घर का नक्शा पास करने की फीस, ट्रेड लाइसेंस, म्यूटेशन आदि से सालाना 14 कराेड़ की सीधी आमदनी हाेती है, लेकिन इसका पैसा जमा करने की भी ऑनलाइन सुविधा नहीं है। काेई ऐसी व्यवस्था नहीं है कि लाेग घर से ही इसके पैसे पेमेंट कर दें।

इसके लिए लाेगाें काे नगर निगम के दफ्तर में आना पड़ता है। इससे लाेगाें का समय बर्बाद हाेता है। हाेल्डिंग टैक्स भरने के लिए यहां आने वालाें काे ताे यह भी नहीं पता है कि उनके वार्ड के तहसीलदार कहां मिलेंगे। क्याेंकि उनके बैठने की काेर्ई निश्चित जगह नहीं है। वे निगम के अहाते में किसी पेड़ के नीचे, गार्ड रूम या किसी शेड के नीचे बैठ जाते हैं। माैसम ठीक रहा ताे ठीक, नहीं ताे उन्हें खाेजना भी मुश्किल है। जमीन-मकान का नामांतरण, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र आदि बनाने के लिए आवेदन करने तक की ऑनलाइन सुविधा नहीं है।

पेड़ के नीचे रसीद काट रहे तहसीलदार, लोगों को ढूंढे नहीं मिलते
निगम में तहसीलदाराें काे बैठने के लिए निश्चित जगह नहीं है। दफ्तर पहुंचने के बाद वह जगह खाेजने लगते हैं कि कहां बैठेंगे। हाेल्डिंग टैक्स जमा करने के लिए निगम आने वाले लाेगाें काे तहसीलदाराें काे खाेजने में काफी समय बर्बाद हाे जाता है। वार्ड 46 और 49 के तहसीलदार रंधीर कुमार का टैक्स वसूली का सालाना टारगेट 80 लाख है। ये टारगेट ये पेड़ के नीचे बैठकर ही पूरा करते हैं।

वार्ड 34 के तहसीलदार अशाेक सिन्हा के बैठने का ठिकाना जेनरेटर शेड के बगल की छतरी है। वह सालाना 24 लाख का टारगेट यहीं बैठकर पूरा करते हैं। अन्य तहसीलदाराें का भी यही हाल है। वार्ड 34 के भीखनपुर के रहनेवाले अभय कुमार बताते हैं कि टैक्स जमा करने में चार घंटे बर्बाद हाे जाते हैं।

तिलकामांझी वार्ड 32 के सिट्टू दास कहते हैं कि ऑनलाइन व्यवस्था हाे ताे लाेगाें का समय बचेगा। बूढ़ानाथ के रंजीत कुमार ने बताया कि वे दाे दिन निगम दफ्तर आए ताे टैक्स जमा हुआ। पहले दिन वापस गए। दूसरे दिन पता चला कि तहसीलदार क्षेत्र में गए थे। वापस आने पर जमा हुआ। ऑनलाइन व्यवस्था हाेती ताे समय बर्बाद नहीं हाेता।

ट्रिपल-सी का भवन बनने के बाद ऑनलाइन हाेगा काम

  • अभी ट्रेड लाइसेंस, जन्म प्रमाण पत्र व टेंडर काे ऑनलाइन अपलाेड करते हैं। ट्रिपल सी बिल्डिंग में साॅफ्टवेयर का काम हाेने के बाद लाेगाें का काम भी ऑनलाइन हाेगा। तहसीलदाराें काे स्वाइप मशीन दी गई है, लेकिन वे उसमें रुचि कम लेते हैं। उनके बैठने के लिए अलग शाखा बनाने की याेजना है। - प्रफुल्लचंद्र यादव, नगर आयुक्त

शहरवासियाें काे इन काम के लिए निगम के दफ्तर में आना पड़ रहा
1. हाेल्डिंग टैक्स : निगम काे सबसे अधिक आय हाेल्डिंग टैक्स से हाेती है। लेकिन इसके ऑनलाइन जमा करने की सुविधा नहीं है। हाेर्डिंग व टावर लगाने का टैक्स भी ऑनलाइन नहीं है।
2. नामांतरण : काेई जमीन या मकान के म्यूटेशन के लिए निगम में आवेदन देना होता है। उसका अपडेट भी लेनेे आना पड़ता है। ऑनलाइन न यह दिखता है न पता चलता है।
3. जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र : इसके लिए भी निगम आकर आवेदन देना पड़ता है। ऑनलाइन व्यवस्था में दिक्कत नहीं हाेती।
4. पानी कनेक्शन : पानी का कनेक्शन के लिए जलकल शाखा में आकर आवेदन जमा करना पड़ता है। इसके बाद ही इंस्पेक्टर नापी के बाद कनेक्शन देते हैं।
5. स्ट्रीट लाइट की शिकायत : शहर में कहीं भी स्ट्रीट लाइट की खराबी दूर करानी हाे ताे निगम में लिखित शिकायत करने के बाद ही खराबी दूर हाेती है।
6. ट्रेड लाइसेंस : व्यापारियाें काे यहीं से ट्रेड लाइसेंस मिलता है। लाेन के लिए भी इसकी जरूरत हाेती है। लेकिन इसका आवेदन ऑनलाइन नहीं भर सकते।

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