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सर्विस आउटसोर्स:टिकट से सालाना 18 करोड़ कमाई, 3 ट्रेन की सफाई पर 6 करोड़ खर्च, फिर भी सीटों पर धूल

भागलपुर2 महीने पहले
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बिना गल्ब्स व बूट के सफाई करते ठेका एजेंसी के कर्मचारी। - Dainik Bhaskar
बिना गल्ब्स व बूट के सफाई करते ठेका एजेंसी के कर्मचारी।

रेलवे में हर काम आउटसोर्स पर चल रहा है। रोजाना 5 लाख की दर से हर साल यात्रियों से टिकट के नाम पर 18.5 करोड़ बटोरेने वाला भागलपुर रेलवे स्टेशन तीन ट्रेनों की धुलाई पर सालाना 6 करोड़ खर्च कर रहा है। इसके बावजूद ट्रेनों में सफाई नहीं हो रही है। जिम्मेदारों की लापरवाही से न तो ट्रेनों की सफाई की निगरानी हो रही है और सफाई में लापरवाही पर ठेका एजेंसी से जुर्माना भी नहीं वसूला जा रहा। नतीजा, यात्रियों को लंबी दूरी की एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनों में मजबूरन गंदगी के बीच सफर करना पड़ रहा है। यार्ड में ट्रेनाें की धुलाई और मेंटेनेंस हरियाणा की ठेका एजेंसी को दिया गया है।

फरीदाबाद की एजेंसी न्यूटेक जेटिंग इक्विपमेंट्स इंडिया को 2025 तक 4 साल के लिए 24 करोड़ का ठेका दिया है। एजंेसी ने लोकल साइट मैनेजर प्रफुल्ल सिंह ने बताया, तीन ट्रेनें विक्रमशिला, दादर व वनांचल की धुलाई उनके जिम्मे है। गरीबरथ दिल्ली डिपो की ट्रेन है। प्लेटफार्म पर आने के बाद आधे घंटे में जितनी सफाई हो सकती है, की जाती है। धुलाई-पोछा नहीं हो पाता है। यशवंतपुर, सूरत ट्रेनें दूसरी डिपो की हैं। इसलिए यहां धुलाई नहीं होती है।

प्लेटफार्म की सफाई का ठेका दो करोड़ का
प्लेटफार्म की सफाई का जिम्मा भी आउटसोर्सिंग पर है। कोलकाता की रिलायबल कांट्रेक्ट कॉरपोरेशन को 3 साल के लिए दो करोड़ में ठेका दिया गया है। ठेका एजेंसी को प्लेटफार्म और नाले की सफाई का जिम्मा है। एजेंसी के पास 66 मजदूर हैं। लेकिन उनका ड्यूटी रोस्टर सैनेटरी डिपार्टमेंट के हवाले है। सैनेटरी इंस्पेक्टर मनीष कुमार ने बताया, मॉर्निंग में 40, इवनिंग में 16 व नाइट में 10 स्वीपरों की ड्यूटी होती है। सफाई नहीं होने पर लोकल व डिवीजन लेवल अफसर पेनाल्टी लगाते हैं।

दो साल से साफ नहीं हुई है पानी की टंकी
पानी की टंकी की सफाई भी ठेके पर है। आईडब्ल्यू के अधीन इस काम को जोनल स्तर पर चयनित एजेंसी करती है। यहां लापरवाही का आलम यह है कि दो साल से टंकी की सफाई तक नहीं हुई। आईडब्ल्यू इंजीनियरों का तर्क है कि कोरोना को लेकर ट्रेनें नहीं या कम चलीं। इसलिए टंकी की सफाई नहीं हुई है। सितंबर में होगी।

95% मजदूरों की सुरक्षा भी ताक पर
ठेका एजेंसी अपने कर्मचारियों को सुरक्षा भी मुहैया नहीं करा पा रही है। 95 फीसदी सेनेटरी स्टाफ बगैर गल्ब्स, फैक्ट्री शूज के ही काम कर रहे हैं। इससे हादसे का शिकार भी होते हैं। नई पीटलाइन का काम एचवाईटी नामक ठेका एजेंसी के पास है। 4 दिन पहले करंट से मजदूर की मौत हुई थी। मजदूर को बगैर ग्लब्स व फैक्ट्री शूज के काम में लगाया गया था।

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