मायागंज अस्पताल में जागरूकता अभियान:ओपीडी में दाे दिवसीय अभियान में 29 बच्चाें का इलाज; टेढ़े पैर को नजरअंदाज न करें, जन्म के तुरंत बाद बच्चों का करें इलाज

भागलपुर2 महीने पहले
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मायागंज में जागरूकता शिविर में बाेलते डाॅ. मनाेज कुमार चाैधरी। - Dainik Bhaskar
मायागंज में जागरूकता शिविर में बाेलते डाॅ. मनाेज कुमार चाैधरी।

टेढ़े-मेढ़े पैर वाले बच्चाें पर नजर पड़े ताे उन्हें नजरअंदाज न करें, बल्कि उन्हें मायागंज अस्पताल में लेकर आए। यहां उनके इलाज की पूरी व्यवस्था की गई हैं। इसके लिए समाज में जागरुकता फैलाने का कार्य डाॅक्टर सिर्फ डॉक्टर ही नहीं आम नागरिक भी करें। ताकि उन बच्चाें काे भी सामान्य जिंदगी जीने का अवसर समय रहते मिल सकें। यह बातें राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत क्लब फुट जागरुकता अभियान में अस्पताल के अधीक्षक डाॅ. असीम कुमार दास ने मरीजाें के परिजनाें से कही। इस दाैरान डाॅक्टराें ने 29 दिव्यांग बच्चाें का इलाज भी किया।

वहीं पीएमआर विभाग के डाॅ. मनाेज कुमार चाैधरी ने कहा कि ऐसे बच्चाें के इलाज करने के मामले में भागलपुर लगातार छह वर्षाें तक बिहार में नंबर वन रहा है। हमारी काेशिश है कि आगे भी इसकी रैंकिंग अच्छी हाे। उन्हाेंने बताया कि क्लब फुट यानी जन्म के तुरंत बाद से टेढ़े-मेढ़े हाथ-पांव वाले बच्चाें में हाेने वाली इस बीमारी की वजह का अबतक पता नहीं चल सका है। लेकिन इसे अनुवांशिक भी माना गया है और यह शरीर में आयरन व कैलशियम की कमी के चलते भी कई बार हाेता है। मगर इसका रिसर्च अभी सामने नहीं आया है।

हर बुधवार किशनगंज से बच्चाें काे लेकर आते हैं परिजन
18 महीने के फैज अली की मां रूबी बेगम किशनगंज के हबीब टाेला से हर बुधवार काे यहां इलाज करवाने आती हैं। एक सिंतबर से ही उसका इलाज चल रहा है। किशनगंज ठाकुरगंज के सावना गांव के ही दाे वर्ष के साहिल रजा भी 20 अक्टूबर से इलाज करवा रहा है। किशनगंज के राजा गांव के रामकुमार व उनकी पत्नी लवली कुमारी हर सप्ताह आठ माह के आर्यन काे लेकर पैर का इलाज कराने आते हैं। बच्चाें के परिजनाें ने बताया कि वे लोग इलाज कराने एंबुलेंस से एक दिन पहले ही भागलपुर आ जाते हैं। इन बच्चाें की माताओं ने कहा कि हमलाेगाें ने गर्भवस्था के दाैरान न ताे आयरन-कैलशियम की गाेली पर्याप्त मात्रा में ली थी और न ही समय से अल्ट्रासाउंड जांच व अन्य तरह के टीकाकरण में शामिल हाे सकी थी।

ऐसे बच्चों के परिवार के सदस्याें काे अस्पताल की जानकारी दें
अगर आम लाेगाें काे भी ऐसे बच्चे कहीं भी दिखे ताे उनके परिवार के सदस्याें काे सूचित करें कि हर बुधवार मायागंज अस्पताल के ओपीडी में इलाज हाेता है और जरूरत के अनुसार ऐसे बच्चाें की सर्जरी भी गुरुवार काे हाेती है। पीएमआर विभाग के रिटायर हाे चुके हेड डाॅ. शैलेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि बच्चाें का इलाज जितनी जल्दी शुरू हाेगा, उतना तेजी से लाभ मिलेगा।

अगर नवजात के जन्म के तुरंत बाद पता चल जाए ताे दाे से तीन बार प्लास्टर करने से हाथ-पांव ठीक हाे जाता है, अन्यथा छह माह से साल भर का भी समय लग सकता है। उन्हाेने बताया कि किशनगंज, अररिया व सीमांचल इलाके से ऐसे बच्चे ज्यादा आते हैं। इस दाैरान हड्डी विभाग के एचओडी डाॅ. दिलीप कुमार सिंह, पीएमआर के डाॅ. एससी झा, आरबीएसके के काे-ऑर्डिनेटर डाॅ. भावना कुमारी, क्याेर इंडिया के सुमनलता और हाॅस्पिटल मैनेजर सुनील कुमार गुप्ता माैजूद रहे।

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