एक्वापोनिक्स लेबोरेटरी की शुरुआत:पीजी जूलॉजी में 18 हजार लीटर की टंकी में 3 हजार मछलियां होंगी तैयार

भागलपुर2 महीने पहले
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पीजी जूलॉजी विभाग में तैयार एक्वापोनिक्स लेबोरेटरी, यहीं तैयार होंगी तीन हजार मछलियां। - Dainik Bhaskar
पीजी जूलॉजी विभाग में तैयार एक्वापोनिक्स लेबोरेटरी, यहीं तैयार होंगी तीन हजार मछलियां।

टीएमबीयू के पीजी जूलॉजी विभाग में एक्वापोनिक्स लेबोरेटरी की शुरुआत हुई। लेबोरेटरी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नवोदिता प्रियदर्शी की पहल और आर्थिक सहयोग से तैयार इस लेबोरेटरी का उद्घाटन सोमवार को डीन साइंस और पीजी जूलॉजी के हेड डॉ. अशोक ठाकुर ने किया। उन्होंने कहा, यह पहल सराहनीय है। इस लैब से विभाग की पहचान और ख्याति बढ़ेगी। शोध को भी बढ़ावा मिलेगा।

डॉ. प्रियदर्शी इसी विभाग की छात्रा और रिसर्च स्कॉलर रही हैं। दो लाख से लेबोरेटरी तैयार हुआ है। यह पूर्णत मैकेनाइज़्ड एक्वेरियम है। डॉ. प्रियदर्शी ने बताया, लेबोरेटरी में 18 हजार लीटर क्षमता वाला पानी का टैंक बना है। स्टोर पानी में लगभग तीन हजार मछलियों का उत्पादन होगा। मछली पालन के दौरान उससे निकलने वाले उत्सर्जी पदार्थों से हर्बल और ऑर्गेनिक फलों, सब्जियों और वनस्पतियों का उत्पादन भी होगा।

इस पानी को रिसाइकिल कर टैंक में डाला जाएगा। इस लैब से उत्पादित होने वाले जैविक फल-सब्जी व वनस्पति का उत्पादन मिट्टी रहित होगा। लेबोरेटरी में अभी रेहू, कतला और गोल्ड फिश सहित अन्य 52 मछलियां डाली गई हैं। लैब में धनिया, बिन्स, गोभी, टमाटर के पौधे लगाए गए हैं। उदघाटन पर विभाग के शिक्षक प्रो. प्रभात कुमार राय, डॉ. धर्मशीला, डॉ. डीएन चौधरी, डॉ. ऋतु मिश्रा, डॉ. रेणु सिन्हा, टीएमबीयू के पीआरओ डॉ. दीपक कुमार दिनकर, दिलीप कुमार ठाकुर मौजूद थे।

खुला एक्वापोनिक्स लैब, मछली पालन से निकलने वाले उत्सर्जी पदार्थ से हर्बल, ऑर्गेनिक फल व सब्जियां उपजाएंगे

एक्वापोनिक्स लेबोरेटरी की यह है खासियत
एक्वापोनिक्स पारिस्थितिकी रूप से तैयार ऐसा मॉडल है। इसमें एक ही पारिस्थितिकी तंत्र में मछलियां और पौधे साथ-साथ वृद्धि कर सकते हैं। मछलियों का उत्सर्जी पदार्थ पौधों को जैविक खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराता है। यह मछलियों के लिए जल को शुद्ध करने का काम करता है।

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