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आंकड़ों का अंतिम संस्कार:सरकारी रिपोर्ट में 15 दिन में 75 मौतें, सच- सिर्फ बरारी में 122 लाशें जलीं

भागलपुर12 दिन पहले
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मायागंज में मौत के बाद काेराेना मरीज का शव ले जाते कर्मी। - Dainik Bhaskar
मायागंज में मौत के बाद काेराेना मरीज का शव ले जाते कर्मी।
  • कोरोना से हो रही मौतें छिपा रही है सरकार
  • हकीकत यह भी है: यह आंकड़े सिर्फ बरारी में हुए दाह-संस्कार के हैं
  • सवाल : नवगछिया, सुल्तानगंज कहलगांव में कितनी लाशें जलीं

जिले में कोरोना वायरस की दूसरी लहर भयानक संकट में बदल चुकी है। अस्पताल फुल हैं। ऑक्सीजन की सप्लाई कम पड़ रही है। संक्रमितों की मौतें हो रही हैं। मृतकों की वास्तविक संख्या सरकारी आंकड़ों से बहुत ज्यादा है। विशेषज्ञों की मानें तो यह संख्या चिंतित करने वाली है, लेकिन वायरस के फैलाव की सही स्थिति नहीं दिखाई जा रही है।

जिले में 19 अप्रैल से 3 मई तक बरारी श्मशान घाट में 122 शवों का कोविड प्रोटोकॉल के तहत अंतिम संस्कार किया गया। लेकिन सरकारी आंकड़ों में माैत की संख्या महज 75 ही बताई जा रही है। यानी, सरकार की सूची में 47 कम मौतें ही दिखाई गई हैं। संक्रमण की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा रहा है कि मरीजों को ऑक्सीजन की दरकार पड़ रही है।

बाजार में निजी स्तर पर लोग ऑक्सीजन सिलेंडर ले जा रहे हैं। बाजार से कोरोना मरीजों के लिए जरूरी जिंकाेविट व सेलिन जैसी टैबलेट भी गायब हैं। दूसरी ओर जिले में वैक्सीनेशन लगाने का अभियान जोर नहीं पकड़ रहा। अब तक जिले में 2,66,610 लोगों को ही वैक्सीन लगाई गई है। यह भी जिले की आबादी का 8.88% ही है। दैनिक भास्कर ने बरारी श्मशान घाट में पड़ताल की तो चौंकाने वाले उक्त आंकड़े सामने आए।

निजी अस्पतालों में मौत के बाद भी घाट पर ला रहे शव

जिले में सिर्फ बरारी श्मशान घाट पर ही 19 अप्रैल से 3 मई तक (15 दिन में) 122 शवों का कोविड प्रोटोकॉल से अंतिम संस्कार किया गया। नगर निगम कर्मियों की माने तो सिर्फ मायागज अस्पताल में हुई मौतों की नहीं, बल्कि निजी अस्पतालों व दूसरे जिलों से इलाज को आए लोगों की लाशें भी बरारी में जल रही हैं। बरारी श्मशान घाट पर 1 मई को 15 शवों का अंतिम संस्कार किया गया, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में कोविड प्रोटोकॉल से महज 9 शवों का अंतिम संस्कार बताया गया।

सवाल : यहां भी तो जल रहे शव, इसका रिकॉर्ड क्यों नहीं

नगर निगम के तर्क के बीच सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर सुल्तानगंज, नवगछिया और कहलगांव के श्मशान मेें भी लाशें जल रही हैं। इसका कोई रिकॉर्ड फिलहाल सार्वजनिक क्यों नहीं है?

हम सिर्फ कोरोना सर्टिफिकेट देखते हैं

अस्पताल से जारी सूची व घाट पर लाशों में अंतर स्वाभाविक है। श्मशान में तो कहीं से भी लाश आ जाती हैं। हम सिर्फ नि:शुल्क दाह-संस्कार के लिए कोविड सर्टिफिकेट देखते हैं। कोविड डेड बॉडी का सर्टिफिकेट अधिकृत निजी अस्पताल भी जारी करता है।
- सत्येंद्र वर्मा, उप नगर आयुक्त

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