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महासृजन घाेटाला:पूर्व जिला कल्याण पदाधिकारी को पेंशन मिलेगी या नहीं, इसकी जांच के लिए चलेगी कार्यवाही

भागलपुर15 दिन पहले
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सृजन घाेटाले में फंसे पूर्व जिला कल्याण पदाधिकारी अरुण कुमार के सेवानिवृत्त हुए सालभर से अधिक समय बीत गया है। लेकिन घाेटाले में फंसे हाेने की वजह से अब तक यह तय नहीं हाे पाया है कि उसे पेंशन मिलेगी या नहीं। इसके लिए विभागीय कार्यवाही चलेगी।

यह जांच की जाएगी कि उसे पेंशन दी जानी चाहिए या नहीं। विभागीय कार्यवाही के लिए अनुसूचित जाति व जनजाति कल्याण विभाग ने आदेश जारी किया है। इसमें कहा गया है कि अरुण कुमार पर सरकारी खाते से कराेड़ाें रुपए की हेराफेरी व वित्तीय अनियमितता संबंधी आराेप में बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के तहत कार्यवाही चलेगी।

बिहार राज्य अनुसूचित जाति सहकारिता विकास निगम के प्रबंध निदेशक काे इसका संचालन पदाधिकारी बनाया गया था। प्रबंध निदेशक वर्तमान में अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग के सचिव के पद पर हैं, जाे अनुशासनिक प्राधिकार भी हैं।

इसलिए अब कल्याण विभाग, पटना के उप निदेशक काे संचालन पदाधिकारी बनाया गया है। इसकी काॅपी डीएम काे भेजी गई है। आदर्श केंद्रीय कारा, बेउर के अधीक्षक काे पत्र की काॅपी भेजी गई है, ताकि उसे पूर्व जिला कल्याण पदाधिकारी काे तामिला कराया जा सके।

तीनाें प्राथमिकी में है अरुण कुमार का नाम
अरुण कुमार के कार्यकाल में ही जिला कल्याण कार्यालय से 221 कराेड़ रुपए की हेराफेरी की गई है। इसके लिए तीन प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। तीनाें में पूर्व जिला कल्याण पदाधिकारी काे भी अभियुक्त बनाया गया है। इस मामले में ही पूर्व जिला कल्याण पदाधिकारी बीते चार साल से पटना बेउर जेल में बंद हैं। तीनाें प्राथमिकी की जांच सीबीआई की ओर से चल रही है। इसमें अरुण कुमार की पत्नी इंदु गुप्ता की भी संलिप्तता पाई गई है।

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