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कोर्ट कचहरी:रेप पीड़िता को अब प्रशासन दिलाएगा इंसाफ, हाईकोर्ट में हाेगी अपील

भागलपुर11 दिन पहले
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  • कजरैली की महिला से बलात्कार करने व तीन माह की गर्भवती होने पर गर्भपात के आरोपी युवक और उसके एक रिश्तेदार को एडीजे-1 के कोर्ट ने किया था बरी

कजरैली के एक गांव की रेप पीड़िता के मुजरिमों को अब प्रशासन इंसाफ दिलाएगा। निचली अदालत से मुजरिमों को बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की जाएगी। लोक अभियोजक कार्यालय ने इस मामले को लेकर डीएम व एसएसपी को अनुशंसा की है।

लोक अभियोजक ने तमाम सबूतों व पीड़िता के पक्ष में दी गई गवाही को आधार बनाते हुए विधि विभाग को पूरा कंटेंट भेजने के लिए डीएम कार्यालय को अनुरोध पत्र दिया है। विधि विभाग की मुहर के बाद कंटेंट हाईकोर्ट में फाइल किया जाएगा।

एएसपी की पर्यवेक्षण रिपोर्ट में भी आरोप सत्य साबित हुआ था

मामला 2010 का है। पीड़ित महिला ने तत्कालीन एसएसपी को आवेदन देकर आपबीती बताई थी। जांच के बाद 3 जनवरी 2011 को कजरैली थाना में पीड़िता के पिता की तहरीर पर आरोपी युवक मो. शोएब और उसके रिश्तेदार मो. जब्बार पर एफआईआर दर्ज की गई थी। कजरैली के तत्कालीन थानेदार बालेश्वर यादव ने दोनों पर लगे आरोपों को सत्य पाते हुए चार्जशीट दाखिल की थी। जांच में सहायक पुलिस अधीक्षक की पर्यवेक्षण रिपोर्ट में भी आरोपों को सही पाया गया था।

रिटायर हाेने से मात्र 20 दिन पहले तत्कालीन अपर जिला जज- प्रथम कोर्ट ने कांड में दिया था फैसला

महिला के साथ उसके पड़ोसी ने शादी का सब्जबाग दिखाकर यौन शोषण किया था। वह तीन माह की गर्भवती हो गई तो आरोपी ने भागलपुर में एक महिला डॉक्टर के यहां लाकर गर्भपात करा दिया। बाद में उसने महिला से शादी करने से इंकार कर दिया। पड़ोसी शादीशुदा था।

उसकी पत्नी 2007 में ही किसी बीमारी से मर गई थी। इसी दौरान महिला शोएब के संपर्क में आई और नजदीकी जिस्मानी संबंध बन गए। 10 साल केस चलने के बाद 11 दिसंबर को तत्कालीन एडीजे-1 शाेभाकांत मिश्रा (31 दिसंबर को सेवानिवृत्त) ने पर्याप्त साक्ष्यों की कमी का हवाला देकर मो. शोएब और रिश्ते का साला मो. जब्बार को बलात्कार करने और गर्भवती होेने पर गर्भपात कराने के आरोपों से बरी कर दिया। पीड़िता ने बताया कि शोएब ने बाद में जब्बार की बहन से निकाह कर लिया था और उसने भी धमकी वगैरह मेरे परिजनों को दी थी।

सेशन कोर्ट की अपील काे जिला मजिस्ट्रेट की अनुशंसा जरूरी

सीआरपीसी की धारा 378 (1) बी के तहत राज्य सरकार, किसी मामले में लोक अभियोजक द्वारा सेशन कोर्ट से पारित आदेश पर आपत्ति जताने के बाद उच्च न्यायालय में अपील दाखिल कर सकती है। इसके लिए जिला मजिस्ट्रेट की अनुशंसा जरूरी है। -सत्य नारायण प्रसाद साह, पीपी, भागलपुर

  • लोक अभियोजक ने हाईकोर्ट के लिए कंटेंट तैयार कर डीएम व एसएसपी को भेजा
  • आरोपी के खिलाफ तमाम सबूतों के बावजूद अभियोजन की दलील नहीं मानी गई
  • अब डीएम फाइल विधि सचिव को भेजेंगे, फिर राज्य सरकार अपील दायर करेगी
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