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विरोध-प्रदर्शन:एम्बुलेंस कर्मचारियों की हड़ताल से जीवन बचाने वाली गाड़ियों को तरसे मरीज

भागलपुर14 दिन पहले
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जिले में एम्बुलेंस कर्मचारियों की हड़ताल से मंगलवार को मरीजों की खासी फजीहत हुई। अस्पतालों से मरीज रेफर होते रहे, लेकिन उन्हें ले जाने के लिए कोई एम्बुलेंस नहीं मिली। मरीजों को घर से अस्पताल लाने और घर पहुंचाने के लिए भी कोई एम्बुलेंस कर्मचारी तैयार नहीं हुआ। नतीजा, मेडिकल कॉलेज अस्पताल में रेफर 7 मरीजों के परिजन परेशान होते रहे।

दो प्रसूताओं को ऑटो रिक्शा रिजर्व कर घर जाना पड़ा। इतना ही नहीं, डीएम के निर्देश पर चुनाव आयोग की आई टीम के लिए सदर अस्पताल में तैनात एम्बुलेंस चालक तूफानी कुमार और इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन सुमन कुमार काे सुबह 8.30 बजे एयरपाेर्ट पर तैनात किया गया था। उन्होंने ड्यूटी से इनकार कर दिया।

इसके बाद सदर अस्पताल के डाॅक्टर निजी गाड़ी से काफिले में गए। एम्बुलेंस कर्मचारी दिनभर सदर अस्पताल परिसर में गाड़ी लगाकर प्रदर्शन करते रहे। अचानक इस हड़ताल पर सदर अस्पताल प्रबंधन ने एम्बुलेंस एजेंसी को शोकॉज कर 24 घंटे में जवाब मांगा है। इधर, जिले के 31 एम्बुलेंस चालकों में चार प्रखंडों पीरपैंती, सबौर, कहलगांव और जगदीशपुर के 6 ड्राइवराें ने हड़ताल में नहीं जाने की बात कही है।

अपनी मांगों पर अड़ा है एम्बुलेंस चालक संघ

एम्बुलेंस चालक संघ के जिलाध्यक्ष लालू कुमार यादव ने बताया कि श्रम अधिनियम के तहत वेतन व अन्य सुविधाएं नहीं मिलने तक हड़ताल जारी रहेगी। सचिव पुष्कर कुमार ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के कार्यपालक निदेशक ने थाने में मुकदमा दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। लेकिन हमारी मांगाें पर उन्हाेंने किसी तरह की बात नहीं की है। इससे साफ है कि सबकी मिलीभगत से एम्बुलेंस एजेंसी के नाम पर पैसे का बंदरबांट हाेता है, यही वजह है कि हमारी हकमारी हाे रही है।

10 हजार खर्च कर जाना पड़ा पटना

मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सांस की बीमारी का इलाज करवा रहे जगदीशपुर के 65 वर्षीय शंभू प्रसाद को पटना रेफर किया गया। एंबुलेंस न मिलने पर उन्हें 10 हजार रुपए खर्च कर निजी एम्बुलेंस से पटना जाना पड़ा।

कर्मचारियों की ये हैं मांगें

  • 2017 से ही निजी एजेंसी एम्बुलेंसकर्मियाें का शाेषण कर रही है, समय पर वेतन नहीं देती।
  • हर माह निजी एजेंसी तरह-तरह के अाराेप लगाकर ड्राइवराें के वेतन की कटाैती करती है।
  • 8 की बजाय 12 घंटे की ड्यूटी अाम है, कभी-कभी 24 घंटे भी लिया जाता है काम।
  • आवाज उठाने पर एजेंसी के पदाधिकारी नाैकरी से हटाने का डर दिखा जबरन ड्यूटी करवाते हैं।
  • ईपीएफ का पैसा समय से सभी एम्बुलेंस चालकाें में खाते में भेजने काे पारदर्शी नियम बनाएं।
  • क्या हमें वार्षिक वेतन वृद्धि का अधिकार नहीं है, 2019 में हुए समझाैते का पालन नहीं हुआ।
  • संक्रमितों काे अस्पताल लाने व ले जाने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं है।

हड़तालियाें ने कब्जे में ली एम्बुलेंस, काम प्रभावित

एंबुलेंस कर्मचारियाें की हड़ताल से प्रभावित हुई स्वास्थ्य सेवाओं काे पटरी पर लाने के लिए मंगलवार काे चार घंटे तक सदर एसडीओ व तिलकामांझी पुलिस मान-मनाैव्वल करती रही पर हड़ताली नहीं माने।

शाम छह बजे से लेकर रात पाैने दस बजे तक जिला प्रशासन के अधिकारी व पुलिस की टीम सीएस ऑफिस में ही माैजूद रही। 102 एंबुलेंस कंपनी के सुपरवाइजर मुकेश कुमार ने थाने काे लिखकर दे दिया है कि हड़तालियाें ने एंबुलेंस काे अपने कब्जे में कर लिया है।

इसलिए मरीजाें काे लाने व घर पहुंचने का काम बाधित है। इनसे एंबुलेंस छुड़वाई जाए। एजेंसी ने काेतवाली थाने काे अाठ लाेगाें के नाम भी दिये हैं। सीएस डाॅ. विजय कुमार सिंह ने बताया कि हड़तालियाें काे समझाने का प्रयास किया जा रहा है।

  • हड़ताल पर गए एम्बुलेंस कर्मचारियाें के लिए आउटसाेर्स एजेंसी को शाेकाॅज किया है। जाे भी मांगें हैं, वह एजेंसी से पूरी होनी है। हमारे स्तर से कुछ नहीं हाेना है। अगर वे वापस नहीं लाैटेंगे ताे कानूनी कार्रवाई होगी।

- डाॅ. विजय कुमार सिंह, सिविल सर्जन

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