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बड़ी त्रासदी:ब्लैक फंगस से एक और मौत पटना में 14 नए मरीज मिले; इलाज के लिए बाजार में दवा भी नहीं

पटना/मुजफ्फरपुर/भागलपुरएक महीने पहले
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डॉक्टर बोले - जब दवा उपलब्ध ही नहीं तो हम इलाज क्या करेंगे - Dainik Bhaskar
डॉक्टर बोले - जब दवा उपलब्ध ही नहीं तो हम इलाज क्या करेंगे
  • मुजफ्फरपुर में डॉक्टर की पत्नी की मौत, भागलपुर में जा चुकी है रजौन के युवक की जान

ब्लैक फंगस (म्यूकरमाइकाेसिस) की चपेट में आकर मुजफ्फरपुर के जाने-माने चिकित्सक डाॅ. एनकेपी सिंह की पत्नी प्राे. अरुणा कुमारी ने शनिवार काे प्रशांत अस्पताल में दम ताेड़ दिया। बिहार में म्यूकरमाइकाेसिस से इस साल यह दूसरी माैत है। उनके पुत्र डाॅ. अाराेही ने बताया कि पिछले कुछ दिनाें से मां की तबीयत खराब थी। मां डायबिटीज और गठिया से पीड़ित थी।

पत्नी की माैत के 15 मिनट बाद ही उसी अस्पताल में भर्ती काेराेना पीड़ित उनके पति डाॅ. सिंह की भी माैत हाे गई। इससे पूर्व गुरुवार को बांका के रजौन निवासी धनंजय की ब्लैक फंगस से मायागंज अस्पताल में मौत हो गई थी। इधर, पटना में शनिवार को ब्लैक फंगस के 14 और नए मरीज मिले।

एम्स में आठ नए मरीज भर्ती हुए हैं। नोडल अफसर डॉ. संजीव कुमार के मुताबिक ब्लैक फंगस से संक्रमित होकर अबतक 20 मरीज भर्ती हो चुके हैं। पारस में भी तीन मरीज और आईजीआईएमएस में एक मरीज भर्ती हुआ है। फोर्ड हॉस्पिटल में दो मरीज भर्ती हैं।

चिकित्सकों का कहना है कि ब्लैक फंगस के लिए जो एंटी वायरल आती है, वह उपलब्ध नहीं है। इससे इलाज करने में परेशानी हो रही है। इसके लिए दो तरह की दवाएं आती हैं। एक सस्ती और एक महंगी। दोनों दवा बाजार में उपलब्ध नहीं है। दवा उपलब्ध कराने की हरसंभव काेशिश की जा रही है। इसकी पुष्टि पारस अस्पताल के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. तहत हलीम और रूबन मेमोरियल अस्पताल के निदेशक डॉ. सत्यजीत सिंह ने की।

क्या है म्यूकरमाइकोसिस

म्यूकरमाइकोसिस फंगल इनफेक्शन है। इसे ब्लैक फंगस के नाम से भी जाना जाता है। जो शरीर में बहुत तेजी से फैलता है। इसका संक्रमण नाक, आंख, ब्रेन, फेफड़े या स्किन पर भी हो सकता है।

ये है लक्षण

नाक में दर्द, खून आए या नाक बंद हो जाए, नाक में सूजन, आंख के आसपास दर्द, दांत या जबड़े में दर्द, आंखाें के सामने धुंधलापन या दर्द हो, सिर में दर्द, खांसी, सांस लेने में दिक्कत, चेहरे के हिस्से में सूजन आदि।

क्या है इस बीमारी का कारण?

वरीय फिजिशियन डॉ. विकास सौरभ के मुताबिक कोरोना से ठीक हुए उन्हीं मरीजों में यह संक्रमण देखा जा रहा है, जो शुगर के मरीज हैं। जिनकी इम्युनिटी काफी कम है और उन्हें स्टेरॉयड का हाई डोज पड़ गया। इसके अलावा जो किडनी के मरीज हैं। कैंसर के मरीज हो। कुपोषित हो या अल्कोहलिक हो। गंदे पानी से स्टीम लिए हो। अधिक दिनों तक आईसीयू में रहे हों।

क्या है इसके बचाव के उपाय?

इलाज के दौरान इन विभिन्न बीमारियों से पीड़ित मरीज को जरूरत से ज्यादा स्टेरॉयड का डोज पड़ गया हो तो उन्हें रेगुलर चेकअप की जरूरत है। उसी के अनुसार या स्टेरॉयड या फिर शुगर का लेवल बढ़ा देने वाली दवाओं के डोज का ख्याल रखें। कोई भी लक्षण मिले तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह ले। खासकर ईएनटी और नेत्र रोग विशेषज्ञ से। शुगर की जांच करें और इसे नियंत्रित रखें।

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