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भागलपुर नगर निगम में फिर 34 लाख का घोटाला:हड़ताल खत्म होते ही हुआ खुलासा, स्थापना शाखा के सहायकों पर 34 मजदूरों से स्थायी नियुक्ति के नाम पर 34 लाख वसूलने का लगा आरोप

भागलपुर12 दिन पहले
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नगर निगम के दैनिक मजदूरों ने स्थापना शाखा के मुख्य सहायक और सेवानिवृत मुख्य सहायक पर आरोप लगाया है। - Dainik Bhaskar
नगर निगम के दैनिक मजदूरों ने स्थापना शाखा के मुख्य सहायक और सेवानिवृत मुख्य सहायक पर आरोप लगाया है।

भागलपुर नगर निगम में रोज घोटालों के नये नये खुलासे हो रहे हैं। ये अलग बात है कि जांच के नाम पर नगर निगम फिसड्डी साबित हो रही है, लेकिन भ्रष्टाचार के दौड़ में अभी सबसे आगे चलने की कोशिश में हैं। अभी लगातार दो घोटालों के जांच की खानापूर्ति चल ही रही थी, तभी एक और नये मामले का खुलासा हुआ। यह मामला 34 लाख का बताया जा रहा है।

क्या है मामला

दरअसल नगर निगम के दैनिक मजदूरों ने स्थापना शाखा के मुख्य सहायक गौतम मल्लिक और स्थापना शाखा के ही सेवानिवृत मुख्य सहायक सेवा प्रभाष सिंह पर स्थायी नौकरी देने के लिए 34 लाख रुपए घूस लेने का आरोप लगाया है। कालीचरण, बालेश्वर हरि, प्रमोद हरि, राजीव हरि, कारू -1, कारू -2, आकाश हरि, बंटी हरि, हरि दास सहित कुल 34 दैनिक मजदूरों का कहना है कि उच्च न्यायालय ने यह आदेश निर्गत किया है कि हमें स्थायी रूप से नगर निगम नौकरी दे। लेकिन कोई न कोई पेंच लगाकर हमलोगों को उच्च न्यायालय के आदेश की अवमानना करते हुए हमे झांसा देकर 34 मजदूरों से एक-एक लाख यानी कुल 34 लाख रूपये प्रभाष सिंह के माध्यम से ले लिए गये। इन लोगों ने बताया कि यह सारा खेल करीब एक से डेढ़ महीने पहले हुआ।

कहां से लाये रूपये

मजदूरों ने कहा कि हमें पता है कि रिश्वत देना गलत है, लेकिन हमलोग यह भी जानते हैं कि इस नगर निगम में बिना चढ़ावा चढ़ाये कोई काम आगे नही बढ़ता। इसलिए फैसला अपने हक में होते हुए भी हमलोग नाजायज पैसा देने के लिए मजबूर हो गये। इसके लिए उन 34 मजदूरों ने सूद पर कर्ज लेकर उन्हें दिया है। किसी ने 5% तो किसी ने 10%, तो किसी ने 15 से 20% पर एक-एक लाख रूपये कर्ज लिया, यह सोचकर कि नौकरी हो जाने के बाद साहूकारों को आराम से पैसा लौटा देंगे। लेकिन अब पैसे भी फंस गये और नौकरी भी नहीं हुई।

मजदूरों ने बताया कि इससे पहले भी 36 मजदूरों को न्यायालय के आदेश पर स्थायी किया जा चुका है। उसी आधार पर हमलोग जो करीब 20 वर्षों से नगर निगम में दैनिक मजदुर के रूप में लगातार काम करते आ रहे हैं, हमारे हक में न्यायालय का फैसला आया है, लेकिन ये लोग मानने को तैयार ही नही हैं।

क्या कहते हैं गौतम मल्लिक

इस बावत गौतम मल्लिक ने भास्कर को बताया कि यह मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। यह मामला न्यायालय में 2015 से शुरू हुआ जो 2018 में ख़ारिज हो गया। इनलोगों ने फिर से अपील किया जो 2019 में ख़ारिज हो गया। इस मामले को नाम बदलकर प्रमोद हरि के नाम से याचिका दायर किया गया था। फिलहाल एक बार फिर से कालीचरण के नाम से मामला कोर्ट में चल रहा है।

क्या कहते हैं उप मेयर

उप मेयर राजेश वर्मा ने कहा कि हर रोज नये नये घोटाले सामने आ रहे हैं, लेकिन मुकम्मल जांच नहीं हो पाता और हो भी कैसे, जब घोटालेबाज ही जांच कर रहे हों तो। इन सब मामलों में पदाधिकारियों की मिलीभगत है इसलिए इसकी उच्च स्तरीय जांच होना चाहिए। नगर आयुक्त प्रफुल्लचंद्र यादव ने कहा कि इस तरह का आरोप लगाने वाले गलत मैसेज दे रहे हैं। ये मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है।

ये भी मामले हैं जांच के घेरे में

भास्कर ने इससे पहले मेयर सीमा साह के पति जिला परिषद् अध्यक्ष टुनटुन साह के पेट्रोल पम्प पर काम करने वाले अनिल तांती के अकाउंट में अवैध रूप से रुपया भेजे जाने वाले मामले का भंडाफोड़ किया था। जिसके बाद वार्ड पार्षदों ने मोर्चा खोलते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर किया था। वहीं ट्रेड लाइसेंस घोटाले की जांच भी अब तक नही हो पाई है।

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