प्रवर्तन निदेशालय की बड़ी कार्रवाई:भागलपुर में 1000 करोड़ के सृजन घोटाले में बड़ी कार्रवाई, पीके घोष को ईडी ने गिरफ्तार किया

भागलपुर3 महीने पहले
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पीके घोष - Dainik Bhaskar
पीके घोष

बिहार में 1000 करोड़ के सृजन घोटाले में शनिवार शाम को बड़ी कार्रवाई हुई। भागलपुर के बड़े बिजनेसमैन पीके घोष को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गिरफ्तार किया है। घोटाले के मास्टरमाइंड पीके घोष से पटना स्थित ईडी के दफ्तर में दो दिनों से पूछताछ की जा रही थी। घोष को शुक्रवार को वहां रोक लिया गया। गिरफ्तार करके शनिवार शाम को बेउर जेल भेज दिया गया। पीके घोष, आरजे सिन्हा (सीए) के साथ ऑडिट करते थे।बताया जाता है कि 25-30 लाख के मनी लान्ड्रिंग के केस में गिरफ्तारी हुई है।

जानकारी के मुताबिक दो बार पहले भी पीके घोष को ईडी ने पूछताछ के लिए नोटिस भेजा था, लेकिन वह पेश नहीं हुए। इस बार बुलाने के बाद वहां गए। पीके घोष की सृजन महिला सहयोग समिति में लाइजनर की भूमिका थी। ऑडिटर और प्रशासनिक अफसरों के बीच तालमेल करते थे और सरकारी खजाने की राशि बैंकों से मिलीभगत करके ट्रांसफर कराते थे। इससे सृजन से लाभ लेकर उसने करोड़ों की संपत्ति बनाई। शहर में कई शॉपिंग काम्प्लेक्स खोलकर अपना व्यापार भी खड़ा कर लिया। ईडी ने पीके घोष की पुणे स्थित बंगला पिछले साल ही जब्त की थी।

पीके घोष को तीन दिन पहले ईडी ने पूछताछ करने और अरेस्ट नहीं करने की शर्त पर पटना बुलाया था। पटना में अर्जित संपत्ति के वैध स्रोत के बारे में पूछताछ की गई। घोष ने सृजन से पैसे लेकर पुणे के बंगला खरीदने की बात कही, लेकिन ईडी ने करीब दर्जन भर सबूत घोष के सामने रख कर उनकी बोलती बंद कर दी। ईडी ने अपार्टमेंट बिजनेस और बाजार में संचालित कपड़े के व्यापार में निवेश की भी जानकारी भी ली।

चार साल से थी जांच एजेंसियों की नजर

पीके घोष पर नोटबंदी में भी सचिव रहीं मनोरमा देवी के पैसे को गलत तरीके से सफेद करने के सबूत ईडी ने दिखाए। ईडी की सख्ती और खुद को फंसता देख पीके घोष ने सृजन घोटाले से जुड़े कई लोगों के नाम भी लिए। कुछ राजनेताओं के नाम भी पीके घोष ने ईडी के समक्ष खोले हैं। घोष पर घोटाला उजागर होने के साथ ही चार साल पहले से ही सभी जांच एजेंसियों की नजर थी। पहले ईओयू और एसआईटी ने उसके घर पर दबिश दी थी। सीबीआई के पास केस ट्रांसफर होते ही अफसरों ने उसकी जानकारी खंगाली। इसके बाद इनकम टैक्स और ईडी ने उस पर अपना शिकंजा कसा।

मास्टरमाइंड को बेउर जेल भेजा
चार साल पहले 7 अगस्त 2017 को सृजन घोटाले का खुलासा हुआ था। सरकारी खजाने से करीब 1000 करोड़ रुपए की सेंधमारी कर सृजन महिला विकास सहयोग समिति अपना कारोबार बढ़ाता-रहा। 13 फरवरी 2017 को सृजन की सचिव मनोरमा देवी का निधन हो गया, तब इस घोटाले की परत धीरे-धीरे खुलने लगी। मार्च 2017 में तत्कालीन डीएम आदेश तितरमारे के सिग्नेचर वाला एक चेक बाउंस कर गया। जबकि प्रशासन को पता था कि खाता में पर्याप्त राशि है। लेकिन बैंक ऑफ बड़ौदा ने चेक वापस दिया और कहा कि खाते में पर्याप्त राशि नहीं है। इसके बाद जिला प्रशासन ने इसकी जानकारी राज्य सरकार को दी।

अप्रैल 2020 में ही ईडी ने जब्त की थी पीके घोष की संपत्ति
ईडी ने 2020 के अप्रैल में ही पीके घोष की पुणे स्थित संपत्ति जब्त की थी। ईडी ने घोटाले में संलिप्त करीबियों के नाम से नोएडा, गाजियाबाद, रांची, देवघर, पटना, पुणे, भागलपुर और सबौर में खरीदी गई जमीन, फ्लैट्स और फोरव्हीलर के बारे में मनोरमा देवी के बेटे, पतोहू, बेटियां और पौते को भी बुलाया है।

मनोरमा का बन गया था खासमखास
पीके घोष किसी चार्टर्ड एकाउंटेंट फर्म के लिए काम करता था। यहीं से वह सृजन महिला विकास सहयोग समिति से जुड़ा और सृजन की तात्कालीन सचिव मनोरमा का खास बन गया। वह सरकारी खजाने की लूट में बराबर का भागीदार बन गया। उसने करोड़ों की अकूत संपत्ति बनाई, लेकिन फरवरी-2017 में मनोरमा के निधन से पहले ही उससे दूरी बना ली। संभवत: उसे घोटाले से परदा उठाने की भनक लग गई थी। बता दें कि पिछले साल सीबीआई की कार्रवाई हुई थी। इसमें 6 जुलाई 2011 को फतेहपुर में अंगिका विहार डेवलपर के पीके घोष से खरीदी गई 18.60 लाख के फ्लैट को जब्त किया गया था।

ईडी ने अब तक 18.42 करोड़ की संपत्ति जब्त की है
ईडी ने 30 जून को 4.11 करोड़ की चल-अचल संपत्ति जब्त की है। इसमें सृजन की सचिव स्व. मनोरमा के अलावा घोटाले से जुड़े सरकारी कर्मी, बैंकर्स, व्यवसायियों की संपत्ति शामिल है। पटना, भागलपुर और उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में 3.09 करोड़ के 12 फ्लैट जब्त किए हैं।

भागलपुर, देवघर और सीतामढ़ी में 87.77 लाख कीमत के 5 प्लॉट व मकान जब्त किए गए हैं। 11.89 लाख की एक स्कॉर्पियो व विभिन्न बैंकों में जमा 1.20 लाख रुपए जब्त किए हैं। इससे पहले 29 मई 2020 को 14.32 करोड़ की संपत्ति जब्त की थी।

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