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मंत्रालय की गाइडलाइन की अनदेखी कर छिड़काव:सावधान! सैनिटाइजेशन नहीं, बीमारियों का छिड़काव कर रहा है नगर निगम

भागलपुर12 दिन पहले
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शहर में लोगों की आवाजाही के बीच हो रहा सैनिटाइजेशन।

कोरोनाकाल में सैनिटाइजेशन के नाम पर शहर में हो रहे हाइपो सोडियम क्लोराइट का छिड़काव सेहत काे नुकसान पहुंचा रही है। नगर निगम दुकानाें व आम लाेगाें के बीच ही इसका छिड़काव कर रहा है। कर्मचारियों को इसकी ट्रेनिंग तक नहीं दी गई। इतना ही नहीं, 18 अप्रैल को स्वास्थ्य मंत्रालय की जारी एडवाइजरी भी निगम नहीं मान रहा।

इस एडवाइजरी में हाइपो सोडियम क्लोराइट को इंसानी शरीर के लिए हानिकारक बताया गया था। इसके इस्तेमाल की सलाह नहीं दी गई। इसके बावजूद नगर निगम लगातार पानी में हाइपाे सोडियम क्लोराइट मिलाकर पानी के 6 टैंकर और फायर ब्रिगेड की 4 गाड़ियाें से छिड़काव कर रहा है। इतना ही नहीं, दूसरे राज्यों में इस तरह के सैनिटाइजेशन से पहले लोगों को सूचना दी जा रही है ताकि छिड़काव से पहले वे सावधानी रखें।

भागलपुर में ऐसा न होने से लोगों को परेशानी हो रही है। मेडिकल काॅलेज अस्पताल के स्किन स्पेशलिस्ट डाॅ. राजीव कुमार की माने तो हाइपाे सोडियम क्लोराइट से खुजली, एग्जिमा और एलर्जी होती है। रोजाना 100 में 10 लोग स्किन संबंधी शिकायतों के साथ पहुंच रहे हैं।

ऐसे हाे रहा छिड़काव: निगम के अनुसार सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक का समय सैनिटाइजेशन के लिए तय है। निगम पानी के टैंकर और फायर ब्रिगेड की गाड़ियाें से छिड़काव कर रहा है। लेकिन कर्मचारियों को सैनिटाइजेशन के लिए ट्रेनिंग तक नहीं दी गई है। कर्मचारी गाड़ी लेकर निकलते हैं और पाइप का मुंह सड़क के दाेनाें ओर कर पानी की बाैछार कर निकल जाते हैं। इससे लोग सीधे हाइपो सोडियम क्लोराइट के संपर्क में आ रहे हैं। खाने-पीने की दुकानों में रखे सामान पर भी यह पड़ रहा है।

ऐसे करना चाहिए छिड़काव : एक्सपर्ट बताते हैं, बाजार खुलने से पहले और बंद होने के बाद ही छिड़काव करना चाहिए। छिड़काव करने के दौरान खाने-पीने की दुकानों पर इस केमिकल का छिड़काव नहीं करना चाहिए। उन्हें पहले ही छिड़काव की सूचना दी जानी चाहिए ताकि वे सामान को ढक लें। छिड़काव करने वाले कर्मियों को इसकी ट्रेनिंग दी जानी चाहिए।

अस्पताल में भी हो रहा इस्तेमाल

अस्पताल में काेराेना मरीजाें वाले वार्ड समेत अन्य वार्डाें में 100 एमएल हाइपाे सोडियम क्लोराइट 10 लीटर पानी में मिलाया जाता है। अस्पताल प्रबंधक सुनील कुमार गुप्ता ने बताया, सुबह-शाम सैनिटाइजेशन के लिए टीम बनी है, वह अपना काम कर रही है।

हो सकती है परेशानी: एक्सपर्ट

स्किन स्पेशलिस्ट डाॅ. राजीव कुमार ने बताया, हाइपाे सोडियम क्लोराइट से शरीर में सूखापन, एग्जिमा, एलर्जी और अन्य हिस्से में रिएक्शन हाेते हैं। बरसात में यूं ही पसीने से फंगल इंफेक्शन हाेते हैं पर इस तरह के केमिकल से अन्य एलर्जिक परेशानी हो सकती है। अगर खाने-पीने के सामान में केमिकल पड़ जाए ताे परेशानी बढ़ सकती है।

ये है स्वास्थ्य मंत्रालय की एडवाइजरी

स्वास्थ्य मंत्रालय ने 18 अप्रैल को जारी एडवाइजरी में कहा कि हाइपो सोडियम क्लोराइट सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसके इस्तेमाल की सलाह नहीं दी जाती है। इसका इस्तेमाल शारीरिक और मानसिक तौर पर भी नुकसान पहुंचा सकता है। इससे स्किन, आंख पर असर पड़ सकता है। यह केमिकल सांस से अंदर लेने पर पेट की समस्या, उल्टी और अपर रेस्पिरेटरी सिस्टम को भी खराब कर सकता है।

हरियाणा में ये है व्यवस्था

साेनीपत में दाेपहर में छिड़काव होता है। सैनिटाइजेशन से पहले दुकानाें में रखे खुले सामानाें काे देखते हुए उन्हें बताया जाता है। दाेपहर में छिड़काव करने से तेज धूप में लाेग बाजार में कम आते हैं। सैनिटाइज से पहले कर्मियों काे पानी में केमिकल मिलाने की ट्रेनिंग भी दी गई।

  • सैनिटाइजेशन के लिए कर्मचारियों को हमने ट्रेनिंग नहीं दी है। लेकिन वे जानते हैं कि कैसे काम करना है। सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक सैनिटाइजेशन होता है। लेकिन दुकानाें व आमलाेगाें काे देखते हुए सैनिटाइजेशन करना है। अगर बिना सूचना दुकानाें में भी छिड़काव हो रहा है तो इसे रोकेंगे।

- सत्येंद्र प्रसाद वर्मा, पीआरओ, निगम

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