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भागलपुर में मनसा देवी की पूजा के लिए उमड़ी भीड़:मन्नत पूरी होने पर डलिया चढ़ाकर कर विषहरी मां को करते हैं प्रसन्न

भागलपुर2 महीने पहले

अंग की धरती भागलपुर की लोकगाथा पर आधारित विषहरी बिहूला पूजा को लेकर आज बिहार के सबसे बड़ी मनसा मन्दिर चंपानगर में सुबह से ही पूजा अर्चना को लेकर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। श्रद्धालु लम्बी लाइन में लग कर अपनी बारी का इन्तजार कर रहे है और माँ मनसा देवी को डलिया चढ़ा रहे है।

वही विषहरी पूजा को लेकर सुरक्षा का भी पुख्ता इंतेजाम किया गया है ।वही लोगों ने बताया कि मनसा देवी की पूजा करीब 1886 से ही मनाई ज आ रही है । भागलपुर में मुख्य रूप से ये पूजा नाथनगर चंपानगर समेत जिले के कई इलाकों मद विषहरी पूजा मनाया जा रहा है।

ये मनसा देवी की कहानी

बिहुला विषहरी की कहानी चंपानगर के तत्कालीन बड़े व्यावसायी और शिवभक्त चांदो सौदागर से शुरू होती है। विषहरी शिव की पुत्री कही जाती हैं लेकिन उनकी पूजा नहीं होती थी। विषहरी ने सौदागर पर दबाव बनाया पर वह शिव के अलावा किसी और की पूजा को तैयार नहीं हुए। आक्रोशित विषहरी ने उनके पूरे परिवार का विनाश शुरू कर दिया। छोटे बेटे बाला लखेन्द्र की शादी बिहुला से हुई थी। उनके लिए सौदागर ने लोहे बांस का एक घर बनाया ताकि उसमें एक भी छिद्र न रहे।

यह घर अब भी चंपानगर में मौजूद है। विषहरी ने उसमें भी प्रवेश कर लखेन्द्र को डस लिया था। सती हुई बिहुला पति के शव को केले के थम से बने नाव में लेकर गंगा के रास्ते स्वर्गलोक तक चली गई और पति का प्राण वापस कर आयी। सौदागर भी विषहरी की पूजा के लिए राजी हुए लेकिन बाएं हाथ से। तब से आज तक विषहरी पूजा में बाएं हाथ से ही पूजा होती है।।

विषहरी माँ को डलिया चढ़ाने का रहता है विशेष महत्व

विषहरी पूजा को लेकर श्रद्धालु मनसा देवी को डलिया चढ़ाने का विशेष महत्व रखती है लोगो ने बताया कि मन्नते पूरी होने को लेकर माता विषहरी को प्रसन्न करने के लिए डलिया में प्रसाद से भरकर चढ़ाते है और जो भी मन्नत मांगते है पूरी होती है।

विषहरी पूजा को लेकर दूरदराज से भक्त आते है दर्शन के लिए

विषहरी पूजा को लेकर मुख्य मंदिर भागलपुर जिले के नाथनगर चंपानगर स्थित मां मनसा देवी की मुख्य मंदिर है जहाँ से पूजा की सुरुवात हुई थी और मंदिर बम पूजा अर्चना के लिए दूरदराज से मां की पूजा अर्चना के लिए आते है।

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