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  • Didn't Get Maca In The Reality Show In 2018; There Was No Money To Bring Home, So Shadow, Milk And Paper Were Also Under The Tree In Mumbai.

सपना हुआ पूरा:2018 में रियलिटी शाे में नहीं मिला माैका; घर लाैटने काे पैसे नहीं थे ताे मुंबई में पेड़ के नीचे साेया, दूध व पेपर भी

गाेराडीह4 महीने पहलेलेखक: पुरुषाेत्तम कुमार
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गोराडीह जमसी के आकाश कुमार सिंह स्टंट दिखाते - Dainik Bhaskar
गोराडीह जमसी के आकाश कुमार सिंह स्टंट दिखाते

टीम इंडिया के हेड काेच राहुल द्रविड़ ने एक बार एक इंटरव्यू में कहा था कि क्रिकेट के फील्ड में वह जितने सफल हुए, उससे ज्यादा असफलता उनके हिस्से में आई। इसलिए वह असफलता पर सफलता से ज्यादा बेहतर स्पीच दे सकते हैं। उनके कहने का मतलब यह था कि असफलताएं अधिक हाे सकती हैं। बड़ी हाे सकती हैं। लेकिन इनसे सीखकर आगे बढ़ने के बाद जाे सफलता मिलती है वह ज्यादा चमक बिखेरती है। गाेराडीह के जमसी के आकाश ने भी यह साबित कर दिखाया है।

डांस के प्रति जुनून काे नहीं हाेने दिया कम
कलर्स चैनल के डांस रियलिटी शाे में सफलता मिलने से पहले उसने असफलता के कई चेहरे देखे पर नाउम्मीद नहीं हुआ। 2018 में उसे एक चैनल ने मुंबई में रियलिटी शाे के लिए बुलाया था। लेकिन तब उसका शाे के लिए चयन नहीं हाे पाया था। यह उसकी असफलता थी। लेकिन इससे भी बड़ी चुनाैती उसके सामने यह थी कि मुंबई से लाैटने के लिए पैसे नहीं थे।

इसके बाद वह दादर के शिवाजी पार्क में एक पेड़ के नीचे रहने लगा। भूख लगती ताे आधी रात में नींद खुल जाती थी। तब उसने कुछ जुगाड़ कर पैसे का इंतजाम करने की साेची। घर लाैटने के लिए नहीं, बल्कि मुंबई में टिककर अपना सपना पूरा करने लिए। उसने दूध बेचना शुरू कर दिया। फिर पेपर बेचा। साथ में डांस के प्रति अपना जुनून बनाए रखा। चार साल तक संघर्ष करने के बाद आखिर वह कलर्स के रियलिटी शाे हुनरबाज का हुनरबाज साबित हुआ।

पढ़ाई के दौरान मारवाड़ी काॅलेज के पास पेड़ से झूलकर करता था प्रैक्टिस
भागलपुर के मारवाड़ी काॅलेज में पढ़ाई के दाैरान वह मलखंभ की प्रैक्टिस करता था। पेड़ से झूल कर अपने हुनर की प्रैक्टिस करता था। इस जुनून और मलखंभ की प्रैक्टिस के कारण उसने रियलिटी शाे में ऐसा एरियल एक्ट पेश किया कि करन जाैहर जैसे बड़े निर्देशक भी यह कहने काे मजबूर हाे गए कि इससे बेहतर परफाॅर्मेंस उन्हाेंने इससे पहले नहीं देखा था। जजाें और दर्शकाें ने उसे 100 में 99 फीसदी अंक दिए और उम्मीद जताई कि वह शाे के फिनाले में जरूर जाएगा।

लक्ष्य काे तय किया ताे सपना हुआ अपना
प्राइवेट ड्राइवर ब्रजकिशोर सिंह और पुष्पा देवी के इस होनहार बेटे ने न सिर्फ अपने माता-पिता का सिर ऊंचा किया बल्कि यह भी साबित किया है कि जुनून के साथ एक लक्ष्य तय कर लगातार मेहनत कर अपने सपने का पीछा किया जाए ताे वह सपना अपना हाे जाता है। ब्रजकिशोर टैक्सी चालक हैं और मां पुष्पा देवी गृहिणी हैं।

आकाश के पिता ब्रजकिशाेर सिंह ने बताया कि 2018 में वह मुंबई यह बताकर नहीं गया था कि क्याें जा रहा है। उन्हें लगा था कि वह वहां काेई काम या छाेटी-माेटी नाैकरी के लिए जा रहा है। लेकिन आज वह गर्व से सबकाे बताते हैं कि उनका बेटा यही सफलता पाने चार साल पहले मुंबई गया था।

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