टीबी हारेगा देश जीतेगा:बच्चाें में टीबी की पहचान करना मुश्किल : डॉ. सिन्हा

भागलपुर16 दिन पहले
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कार्यशाला का उद्घाटन करते सीएस डॉ उमेश शर्मा व अन्य। - Dainik Bhaskar
कार्यशाला का उद्घाटन करते सीएस डॉ उमेश शर्मा व अन्य।

बच्चाें में टीबी की बीमारी काे पकड़ना बड़ाें से ज्यादा मुश्किल है। क्याेंकि वयस्क मरीज आगे आकर बताते हैं और बच्चाें काे उनके लक्षण के आधार पर डाॅक्टर अपने आई क्यू से पकड़ते हैं। ऐसे में टीबी की पहचान में उनके दिमाग बड़ा राेल है। यह बातें रविवार काे बच्चाें में टीबी की राेकथाम काे लेकर आयाेजित कार्यशाला में शिशु राेग विशेषज्ञ प्राे. डाॅ. आरके सिन्हा ने कहीं।

डाॅ. डीपी सिंह ने कहा कि बच्चाें में टीबी वयस्काें से ही फैलता है। इसलिए बड़ाें काे समय से इलाज कराने की जरूरत है। डाॅ. असीम घाेष ने टीबी की गंभीरता से जांच व इलाज की जरूरत बताई। आईपीए इकाई के अध्यक्ष डाॅ. विनय मिश्रा, सचिव डाॅ. मिथिलेश मुकुल, साइंटिफिक चेयरमैन डाॅ. अजय सिंह, आर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी डाॅ. सुदर्शन झा की मुख्य भूमिका रही।

इसके अलावा डाॅ. एचपी दुबे, डाॅ. राकेश मिश्रा, डाॅ. राकेश कुमार, डाॅ. पवन यादव, डाॅ. विनय कुमार, डाॅ. कामरान फजल, डाॅ. केके सिन्हा, पीजी डाॅक्टर व अन्य माैजूद रहे। इससे पूर्व कार्यक्रम का उद्घाटन सीएस डाॅ. उमेश शर्मा, जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डाॅ. दीनानाथ, डाॅ. शंभु शंकर सिंह व अन्य डाॅक्टराें ने संयुक्त रूप से किया। मंच का संचालन डाॅ. निवेदिता व धन्यवाद ज्ञापन डाॅ. सुदर्शन ने किया।

सभी काे प्रमाण पत्र भी दिया गया। पटना एम्स के डाॅ. अनिल घाेष ने कहा कि मां अगर टीबी से पहले से ग्रसित हो ताे उससे 30 प्रतिशत संक्रमण बच्चाें में बढ़ता है। डाॅ. केके सिन्हा, डाॅ. विनय मिश्रा ने कहा कि एक्सरे माउंटेक्स टेस्ट करवाने से भी बच्चाें में टीबी पूरी तरह पकड़ में नहीं आती। उसके पेट से पानी निकालकर जांच की जाती है। इसके बाद कीटाणु नहीं भी मिले ताे संदिग्ध बता टीबी का इलाज किया जा सकता है। लेकिन इसके लिए सेंट्रल आईएपी और केंद्र सरकार द्वारा पैमाना तय किया गया है।

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