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  • Dipu, Who Came Out As An Independent To Take The Debt Of Soil, Ended The Suspension By Withdrawing His Name, Announced To Contest The Election Eight Days Ago.

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द ग्रेट पाॅलिटिकल ड्रामा:मिट्टी का कर्ज उतारने निर्दलीय उतरे दीपू ने नाम वापस लेकर खत्म किया सस्पेंस, आठ दिन पहले चुनाव लड़ने का ऐलान किया था

भागलपुरएक महीने पहले
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भाजपा प्रत्याशी को मिठाई खिलाकर समर्थन देते दीपक भुवानिया।
  • पूर्व मेयर सह जदयू व्यावसायिक प्रकाेष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष ने भाजपा प्रत्याशी को खिलाई मिठाई, किया समर्थन
  • लाेगाें के मन में उठ रहे थे सवाल कि जब जदयू के गठबंधन से भाजपा के प्रत्याशी मैदान में हैं, ताे भुवानिया का ये बगावती तेवर क्याें

स्मार्ट सिटी की जमीन पर इन दिनाें एक से बढ़कर एक सियासी किरदार देखने काे मिल रहे हैं। ये किरदार एक्शन, ड्रामा और सस्पेंस पैदा कर यहां की जनता का भरपूर मनाेरंजन कर रहे हैं। ऐसे ही एक किरदार के पाॅलिटिकल ड्रामे की यह कहानी है। ये किरदार हैं-पूर्व मेयर सह जदयू व्यावसायिक प्रकाेष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष दीपक भुवानियां उर्फ दीपू भुवानियां...। इन्हाेंने अपनी अदा से हफ्तेभर तक खूब सस्पेंस रचा। साेमवार काे इनके सस्पेंस से पर्दा उठ गया, बल्कि यूं कहें कि इनका ड्रामा खत्म हाे गया और पर्दा गिर गया।

सस्पेंस : 12 काे चुनाव लड़ने का किया था ऐलान
आज से ठीक आठ दिन पहले 12 अक्टूबर काे बीते साेमवार की शाम दीपू भुवानियां ने साेशल मीडिया पर एक पाेस्ट के जरिये चुनाव लड़ने का ऐलान किया था। उन्हाेंने लिखा था-भागलपुर की मिट्टी का बड़ा कर्ज मेरे ऊपर है। आज मैं जो कुछ हूं, वह भागलपुर की देन है। मेरा भी फर्ज बनता है कि इसे कुछ दूं...गंभीर चिंतन के बाद मैंने निर्णय लिया है कि विस के इस महासमर में मैं भी कूद पडूं। मैं भी भागलपुर से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में आपके बीच हूं...।

एक्शन : 14 काे किया नामांकन, कब पर्चा भरा, नहीं चल सका पता
दीपू भुवानियां के इस ऐलान के साथ ही सस्पेंस शुरू हाे गया। लाेगाें के मन में सवाल उठने लगा कि जब इनकी पार्टी के गठबंधन से भाजपा के प्रत्याशी मैदान में हैं, ताे ये बगावती तेवर क्याें? खैर, 14 अक्टूबर काे इन्हाेंने नामांकन पर्चा भरा। लेकिन उस वक्त भी सस्पेंस बरकरार रहा। ये नामांकन कराने ऐसे आए-गए कि किसी काे पता भी नहीं चला। यहां तक की शपथ पत्र जमा नहीं करने से प्रशासन ने नाेटिस भी थमाया। हालांकि अगले दिन शपथ पत्र जमा किया। नामांकन के बाद ये ज्यादा सक्रिय नहीं दिखे।

राेमांच : इस सियासी कहानी में गाेड्डा सांसद की एंट्री
इनके इस सियासी कहानी में 16 अक्टूबर काे गाेड्डा के सांसद निशिकांत दुबे की भी एंट्री हुई। उन्हाेंने साेशल मीडिया पर एक पाेस्ट किया। इसमें लिखा कि दीपक भुवानिया मेरे छाेटे भाई हैं...मैंने उन्हें निर्दलीय के ताैर पर भरे नामांकन काे वापस लेने का आग्रह किया है। इसके साथ ही ये सियासी कहानी और दिलचस्प हाेने लगी। और फिर वही हुआ, जिसकी संभावना सियासी पंडित जता रहे थे।

सस्पेंस खत्म, गिरा पर्दा : आलाकमान के निर्देश पर बदला फैसला
साेमवार काे नाम वापसी का अंतिम दिन था। दीपक भुवानियां ने पहले शाह धर्मशाला फिर स्थान बदलकर अपने घर पर प्रेस कांफ्रेंस की। उन्हाेंने कहा कि अब वे चुनाव नहीं लड़ेंगे। एनडीए से भाजपा प्रत्याशी राेहित पांडे काे समर्थन करेंगे। इसके साथ ही राेहित पांडे के गले में बांह डालकर मिठाई खिलाई, खुद भी खाई और एक-दूसरे का हाथ पकड़कर राेहित काे जीत दिलाने का ऐलान किया।

कहा-जदयू मेरा परिवार, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मेरे श्रद्धेय...पार्टी आलाकामान के निर्देश पर चुनाव लड़ने का फैसला बदलते हुए नामांकन वापस लिया। भुवानियां की इस शानदार भूमिका के साक्षी बने जदयू के जिलाध्यक्ष ड. विजय कुमार सिंह, पूर्व जिलाध्यक्ष अर्जुन प्रसाद, उपाध्यक्ष संजय साह, रवि आदि...।

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