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स्वास्थ्य विभाग की आधी-अधूरी तैयारी:सरकारी अस्पतालों में अव्यवस्था; आक्सीजन मापने काे न मशीन, न प्रखंडों में जांच, मायागंज ही है एकमात्र सहारा

भागलपुर17 दिन पहलेलेखक: त्रिपुरारि
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मायागंज के शिशु रोग विभाग की आईसीयू में ही हैं सिर्फ 8 बेड। - Dainik Bhaskar
मायागंज के शिशु रोग विभाग की आईसीयू में ही हैं सिर्फ 8 बेड।
  • बच्चों के लिए जरूरी कोरोना की दवा अभी स्टॉक में, 150 ऑक्सीमीटर खरीदने की तैयारी

कोरोना की तीसरी लहर से बच्चों को बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की तैयारी आधी-अधूरी ही है। एक्सपर्ट के मुताबिक अक्टूबर से तीसरी लहर आ सकती है। इसके लिए अस्पतालों में तैयारियां चल रही है। इस बीच मायागंज और सदर अस्पताल के अलावा प्रखंडों के अस्पतालों में ऑक्सीजन लेवल मापने के लिए मामूली उपकरण ऑक्सीमीटर तक नहीं हैं।

इतना ही नहीं, कोरोना संक्रमण के बीच होने वाली जरूरी जांच मसलन डी-डाइमर, चेस्ट एक्स-रे और केएफटी भी जिले की 8 पीएचसी में नहीं हो रही है। विशेषज्ञों की माने तो उक्त सभी तरह की जांच की जरूरत पड़ सकती है। प्रखंडों में इसकी व्यवस्था न होने से तीसरी लहर के दौरान बच्चों को प्रखंडों से मायागंज अस्पताल रेफर करना होगा। समय पर डायग्नोसिस न होने से इलाज में देरी हो सकती है।

मायागंज और सदर अस्पताल में ही है बच्चों की ऑक्सीजन जांच को पल्स ऑक्सीमीटर

16 प्रखंड हैं जिले में, यहां 16 पीएचसी 2 अहम जांच प्रखंड के अस्पतालों में नहीं होती डी-डाइमर खून के थक्के की जांच के लिए जरूरी किडनी फंक्शन टेस्ट के लिए केएफटी भी जरूरी 8 पीएचसी में एक्स-रे तक नहीं, जबकि चेस्ट के लिए जरूरी

16 में 8 पीएचसी में जरूरी जांच तक नहीं
जिले में सभी 16 प्रखंडों में पीएचसी हैं। इसमें पैथोलॉजिकल जांच के नाम पर सीवीसी व अन्य सामान्य जांच होती है। लेकिन कोरोना संक्रमितों के लिए खून के थक्के की जांच के लिए डी-डाइमर टेस्ट, किडनी फंकक्शन टेस्ट के लिए केएफटी टेस्ट और फेफड़े में इंफेक्शन की जांच के लिए एक्स-रे जरूरी है। डी-डाइमर, केएफटी टेस्ट तो जिले की किसी भी पीएचसी में नहीं हाे रही है।

ये है विभाग की तैयारी
पल्स ऑक्सीमीटर: जिले के अस्पतालों के लिए 150 पल्स ऑक्सीमीटर खरीदने की तैयारी है। इसके ऑर्डर दिए गए हैं।
दवा: बच्चों को बुखार, निमोनिया, सांस तेज चलने पर दी जाने वाली दवाइयां स्टोर में हैं। अन्य दवा के ऑर्डर दिए गए हैं।
जांच: ब्लॉक में जरूरी जांचों के लिए विभाग ने लैब टेक्नीशियन तैनात कर दिए हैं।
मशीनें: जिले के सराकारी अस्पतालों में नवजाताें के लिए बीपी व ब्लड शुगर मापने की मशीन लगेगी।

कोरोना के इलाज में जरूरी है जांच: डाॅ. हेमशंकर
सीनियर फिजिशियन डाॅ. हेमशंकर शर्मा ने बताया, कोराेना हाेने पर ब्लड शुगर, बीपी अाैर अाॅक्सीमीटर का अहम राेल है। इसके बिना मरीज का बेहतर इलाज नहीं हो सकता। उक्त तीनों जांच के बाद डॉक्टर दवाइयों का डोज तय करते हैं। वैसे एचसीक्यू दवा 12 साल से कम उम्र के बच्चाें काे नहीं दे सकते, बाकी दवा में भी उम्र के अनुसार डाेज तय हाेता है।

दवाओं का प्राेटाेकाॅल पहले से तय : एचओडी मायागंज अस्पताल के शिशु विभाग के एचओडी प्राे. डाॅ. आरके सिन्हा का कहना है कि बच्चाें को स्टेराॅयड देने से ब्लड शुगर बढ़ता है। दवा का जो प्रोटोकॉल पहले से तय है, वही है। नया प्राेटाेकाॅल आया तो फिर प्लान करेंगे। जरूरी दवाइयों की सूची एजेंसी को भेज दी है। हमारे पास पल्स आक्सीमीटर अभी हैं।

बच्चाें काे काेराेना से बचाने के लिए दवाइयों का प्राेटाेकाॅल अभी नहीं आया है। वैसे हमारे पास पहले से तय दवा हैं। एसएनसीयू में एक अाैर चाइल्ड स्पेशलिस्ट तैनात करेंगे। 150 पल्स अाॅक्सीमीटर, छाेटे बच्चाें की बीपी और ब्लड शुगर मापने की मशीन भी पर्याप्त संख्या में खरीदने का ऑर्डर भेजा है।
- डाॅ. उमेश शर्मा, सिविल सर्जन​​​​​​​

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